डॉ. कशिश अज़ीज़

Story by  ओनिका माहेश्वरी | Published by  [email protected] | Date 26-08-2026
Dr. Kashish Aziz: Setting a New Benchmark for Quality in the Pharma Sector
Dr. Kashish Aziz: Setting a New Benchmark for Quality in the Pharma Sector

 

ओनिका माहेश्वरी/ नई दिल्ली  

भारतीय फार्मास्युटिकल उद्योग की वैश्विक पहचान केवल बड़ी दवा कंपनियों तक सीमित नहीं है। देश में कई ऐसी मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां भी हैं, जिन्होंने गुणवत्ता, कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग, सरकारी आपूर्ति और निर्यात के दम पर अपना कारोबार खड़ा किया है। इसी कड़ी में यूनिक्योर इंडिया लिमिटेड (Unicure India Ltd.) का नाम सामने आता है। कंपनी की ऑपरेशन्स और क्वालिटी एश्योरेंस की जिम्मेदारी संभाल रहीं डॉ. कशिश अज़ीज़ की भूमिका कंपनी के मैन्युफैक्चरिंग और क्वालिटी सिस्टम को मजबूत बनाए रखने में महत्वपूर्ण है।

करीब 370 करोड़ रुपये का कारोबार

यूनिक्योर इंडिया लिमिटेड एक अनलिस्टेड पब्लिक लिमिटेड कंपनी है, जिसकी स्थापना 1980 में हुई थी और 1984 से कंपनी ने फार्मास्युटिकल फॉर्मुलेशन का निर्माण शुरू किया। उपलब्ध कॉरपोरेट वित्तीय आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024-25 में कंपनी का राजस्व करीब 369.12 करोड़ रुपये रहा। यह पिछले वित्त वर्ष की तुलना में लगभग 12 प्रतिशत कम था। वहीं, 2025-26 के लिए उपलब्ध GST-आधारित कारोबारी जानकारी कंपनी को 100 से 500 करोड़ रुपये के वार्षिक टर्नओवर वर्ग में रखती है। कंपनी का अधिकृत शेयर पूंजी करीब 12.10 करोड़ रुपये और पेड-अप कैपिटल करीब 9.99 करोड़ रुपये है। कंपनी की वित्तीय प्रोफाइल में कम गियरिंग और अपेक्षाकृत मजबूत नेटवर्थ को भी उसकी वित्तीय स्थिरता का आधार माना गया है।

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तीन मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स से कारोबार

यूनिक्योर इंडिया का मैन्युफैक्चरिंग नेटवर्क उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में फैला हुआ है। कंपनी की इकाइयां नोएडा, ग्रेटर नोएडा और रुड़की में हैं। CRISIL के अनुसार कंपनी WHO-GMP अप्रूव्ड और ISO-सर्टिफाइड फार्मास्युटिकल मैन्युफैक्चरर है।
 
कंपनी विभिन्न प्रकार के फार्मास्युटिकल फॉर्मुलेशन तैयार करती है। इनमें टैबलेट, कैप्सूल, ड्राई पाउडर और लिक्विड इंजेक्शन, ड्राई सिरप, ओरल लिक्विड, ऑइंटमेंट, क्रीम, जेल, एंटासिड, एंटीबायोटिक्स, मल्टीविटामिन, एंटीपायरेटिक तथा डायटरी और फूड सप्लीमेंट्स शामिल हैं। कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक उसके उत्पाद पोर्टफोलियो में टैबलेट, कैप्सूल, ड्राई सिरप, सैशे, सिरिंज और जेल भी शामिल हैं।
 
सरकारी कारोबार के साथ कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग

यूनिक्योर के कारोबार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा सरकारी संस्थाओं को आपूर्ति और बड़े फार्मास्युटिकल ब्रांड्स के लिए कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ा रहा है। CRISIL के मार्च 2025 के आकलन के मुताबिक, कंपनी के राजस्व का करीब 60 प्रतिशत सरकारी संस्थाओं से, लगभग 30-35 प्रतिशत कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग से और शेष हिस्सा निर्यात से आता था।
 
यह बिजनेस मॉडल कंपनी को केवल अपने ब्रांडेड उत्पादों पर निर्भर रहने के बजाय सरकारी खरीद, थर्ड-पार्टी मैन्युफैक्चरिंग और अंतरराष्ट्रीय बाजार—तीनों क्षेत्रों में कारोबार करने का अवसर देता है।
 
इससे पहले के वर्षों में भी कंपनी के कारोबार में सरकारी संस्थाओं की बड़ी हिस्सेदारी रही है। फरवरी 2023 की CRISIL रिपोर्ट में सरकारी कारोबार की हिस्सेदारी करीब 75 प्रतिशत, कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग की करीब 18 प्रतिशत और निर्यात की करीब 6-7 प्रतिशत बताई गई थी। इससे कंपनी के बिजनेस मॉडल में समय के साथ आए बदलाव का भी संकेत मिलता है।
 
निर्यात कारोबार में अंतरराष्ट्रीय पहुंच

यूनिक्योर इंडिया का कारोबार घरेलू बाजार तक सीमित नहीं है। उपलब्ध वैश्विक ट्रेड डेटा के अनुसार कंपनी ने 703 निर्यात शिपमेंट 39 खरीदारों तक भेजे हैं, जबकि आयात से जुड़े 24 शिपमेंट 9 सप्लायर्स से दर्ज किए गए हैं। निर्यात में HSN 3004 और HSN 3003 के अंतर्गत आने वाले फार्मास्युटिकल उत्पाद प्रमुख रहे हैं।
 
इन ट्रेड रिकॉर्ड्स में डोमिनिकन रिपब्लिक, उज्बेकिस्तान और वेनेजुएला जैसे बाजारों का उल्लेख मिलता है। इसका अर्थ है कि कंपनी ने भारतीय फार्मास्युटिकल मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को अंतरराष्ट्रीय खरीदारों तक पहुंचाने के लिए निर्यात नेटवर्क भी विकसित किया है।
 
आयात भी सप्लाई चेन का हिस्सा

फार्मास्युटिकल मैन्युफैक्चरिंग में केवल तैयार दवाओं का निर्यात ही महत्वपूर्ण नहीं होता, बल्कि कच्चे माल, एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स और अन्य इनपुट की सप्लाई चेन भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। उपलब्ध ट्रेड डेटा में यूनिक्योर के 24 आयात शिपमेंट और 9 सप्लायर्स का रिकॉर्ड मिलता है।
 
वैश्विक सप्लाई चेन में उतार-चढ़ाव, कच्चे माल की कीमत और लॉजिस्टिक्स लागत जैसे कारक फार्मा कंपनियों की उत्पादन लागत को प्रभावित करते हैं। ऐसे वातावरण में कंपनी के लिए उत्पादन क्षमता, इन्वेंटरी मैनेजमेंट, ऑटोमेशन और क्वालिटी कंट्रोल को साथ लेकर चलना कारोबारी रूप से महत्वपूर्ण हो जाता है।
 
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क्वालिटी एश्योरेंस को बिजनेस की रीढ़ मानती हैं डॉ. कशिश

डॉ. कशिश अज़ीज़ के लिए फार्मास्युटिकल मैन्युफैक्चरिंग में गुणवत्ता केवल नियामकीय आवश्यकता नहीं बल्कि कारोबारी विश्वसनीयता का आधार है। उनका फोकस क्वालिटी एश्योरेंस, उत्पादन प्रक्रियाओं की निगरानी, वैलिडेशन और नियामकीय मानकों के अनुपालन पर है।
 
फार्मा उद्योग में एक बैच की गुणवत्ता सीधे मरीजों की सुरक्षा से जुड़ी होती है। इसलिए कंपनी के उत्पादन संयंत्रों में कच्चे माल से लेकर तैयार उत्पाद तक कई स्तरों पर परीक्षण और निगरानी आवश्यक होती है। यूनिक्योर अपनी आधिकारिक जानकारी में सुरक्षित मैन्युफैक्चरिंग वातावरण, कंटैमिनेशन रोकने वाली संरचना और संवेदनशील व विषैले पदार्थों के लिए अलग स्टोरेज व्यवस्था पर जोर देती है।
 
600 से अधिक पेशेवरों का संगठन

कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार यूनिक्योर इंडिया में 600 से अधिक पेशेवर कार्यरत हैं, जिनमें करीब 100 कर्मचारी अत्यधिक प्रशिक्षित और तकनीकी भूमिकाओं में हैं। कंपनी का लक्ष्य फार्मास्युटिकल उत्पादों के निर्माता, सप्लायर और निर्यातक के रूप में अपनी स्थिति को और मजबूत करना है।
 
डॉ. कशिश अज़ीज़ की पेशेवर यात्रा भी इसी कारोबारी और तकनीकी ढांचे से जुड़ी है। वर्ष 2008 से कंपनी से जुड़ी डॉ. कशिश फार्मेसी में स्नातक और मास्टर्स के बाद पीएचडी कर चुकी हैं। मास्टर्स के दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए उन्हें स्वर्ण पदक मिला। वर्तमान में वे प्रबंधन शिक्षा के माध्यम से अपने कारोबारी और नेतृत्व कौशल को और विस्तार देने पर भी काम कर रही हैं।
 
 
लागत और गुणवत्ता के बीच संतुलन

फार्मा कारोबार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच कंपनियों के सामने लागत कम रखने और गुणवत्ता बनाए रखने की दोहरी चुनौती रहती है। यूनिक्योर के लिए भी कच्चे माल की कीमत, सप्लाई चेन, नियामकीय अनुपालन और उत्पादन क्षमता जैसे मुद्दे कारोबारी प्रदर्शन को प्रभावित करते हैं। डॉ. कशिश का दृष्टिकोण है कि लागत नियंत्रण जरूरी है, लेकिन गुणवत्ता से समझौता करके नहीं। इसके लिए लीन मैन्युफैक्चरिंग, ऑटोमेशन और बेहतर सिस्टम को अपनाना कंपनी की उत्पादन क्षमता और दक्षता बढ़ाने में मदद कर सकता है।
 
एक फार्मा प्रोफेशनल से बिजनेस लीडर तक

डॉ. कशिश अज़ीज़ की कहानी केवल एक महिला फार्मा प्रोफेशनल की सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि यह इस बात का उदाहरण भी है कि किस तरह तकनीकी ज्ञान, क्वालिटी मैनेजमेंट और कारोबारी नेतृत्व को एक साथ लेकर फार्मास्युटिकल मैन्युफैक्चरिंग को आगे बढ़ाया जा सकता है। आज जब भारत वैश्विक फार्मास्युटिकल सप्लाई चेन में अपनी भूमिका लगातार मजबूत कर रहा है, यूनिक्योर इंडिया जैसी कंपनियों के लिए घरेलू सरकारी कारोबार, कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग और निर्यात—तीनों क्षेत्रों में संतुलन बनाना आने वाले वर्षों की विकास रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है।