शेफ साजिदा खान और 'कुलिनरी क्राफ्ट' की सफलता

Story by  ओनिका माहेश्वरी | Published by  onikamaheshwari | Date 23-08-2026
The Success of Chef Sajida Khan and 'Culinary Craft'
The Success of Chef Sajida Khan and 'Culinary Craft'

 

ओनिका माहेश्वरी/ नई दिल्ली 

मुंबई की तेज़ रफ्तार जिंदगी में जहां अधिकांश लोग खाना बनाने को केवल दैनिक आवश्यकता मानते हैं, वहीं कुछ ऐसे लोग भी हैं जो इसे एक कला, विज्ञान और आत्म-अभिव्यक्ति का माध्यम समझते हैं। ऐसी ही शख्सियत हैं शेफ साजिदा खान, जिन्होंने अपने कुकिंग के जुनून को न केवल अपनी पहचान बनाया, बल्कि हजारों लोगों के लिए सीखने, आत्मनिर्भर बनने और अपने सपनों को साकार करने का एक सशक्त मंच भी तैयार किया। एक समर्पित मां, गृहिणी और सफल महिला उद्यमी के रूप में साजिदा खान की यात्रा इस बात का उदाहरण है कि यदि किसी के भीतर अपने हुनर के प्रति सच्चा समर्पण हो, तो वह सीमित संसाधनों से भी एक बड़ी शुरुआत कर सकता है।

साजिदा खान को बचपन से ही खाना बनाने और नए-नए व्यंजनों के साथ प्रयोग करने का शौक था। उनके लिए रसोई केवल भोजन तैयार करने की जगह नहीं थी, बल्कि रचनात्मकता और आनंद का संसार थी। समय के साथ उन्होंने महसूस किया कि मुंबई जैसे महानगर में कुकिंग और बेकिंग सीखने की इच्छा रखने वाले लोगों के लिए ऐसे संस्थानों की कमी है, जहां आधुनिक तकनीकों, व्यावहारिक प्रशिक्षण और पेशेवर माहौल के साथ पाक-कला सिखाई जाए।

उन्हें यह भी महसूस हुआ कि बहुत से लोग खाना बनाना सीखना चाहते हैं, लेकिन पारंपरिक कुकिंग क्लास उन्हें वह अनुभव नहीं दे पाती जिसकी उन्हें तलाश होती है। इसी सोच ने उनके भीतर एक नए सपने को जन्म दिया और उन्होंने पवई के हिरानंदानी गार्डन्स में अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस कुलिनरी क्राफ्ट स्टूडियो की स्थापना की।

शुरुआत आसान नहीं थी। एक गृहिणी और मां होने के कारण उन्हें परिवार और अपने सपने के बीच संतुलन बनाना पड़ा, लेकिन उन्होंने कभी अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया। धीरे-धीरे उनका यह छोटा-सा प्रयास मुंबई के सबसे चर्चित कुकिंग और बेकिंग स्टूडियो में बदल गया। आज कुलिनरी क्राफ्ट केवल एक प्रशिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि एक ऐसा मंच बन चुका है जहां हर उम्र और हर पृष्ठभूमि के लोग अपनी पाक-कला को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का अवसर प्राप्त करते हैं।

साजिदा खान का मानना है कि खाना बनाना केवल किसी रेसिपी को दोहराना नहीं, बल्कि एक अनुभव है। जिस प्रकार लोग किसी फिल्म, संगीत कार्यक्रम या नाटक का आनंद लेने जाते हैं, उसी तरह कुकिंग भी एक ऐसा अनुभव होना चाहिए जो व्यक्ति को सीखने के साथ-साथ खुशी और आत्मविश्वास दे। यही कारण है कि कुलिनरी क्राफ्ट में आने वाले विद्यार्थियों को केवल रेसिपी नहीं सिखाई जाती, बल्कि उन्हें यह भी समझाया जाता है कि किसी व्यंजन के पीछे का विज्ञान क्या है, मसालों का संतुलन कैसे बनाया जाता है, स्वाद और प्रस्तुति के बीच तालमेल कैसे बैठाया जाता है और एक साधारण डिश को यादगार कैसे बनाया जा सकता है।

स्टूडियो में प्रशिक्षण पूरी तरह व्यावहारिक है। यहां विद्यार्थियों को अत्याधुनिक, पूरी तरह एयर-कंडीशंड और आधुनिक उपकरणों से सुसज्जित किचन में अनुभवी शेफ के मार्गदर्शन में काम करने का अवसर मिलता है। चॉकलेट टेंपरिंग, ब्रेड और केक बेकिंग, पेस्ट्री निर्माण, पास्ता तैयार करना, अंडों की विभिन्न तकनीकें, इंटरनेशनल और भारतीय व्यंजनों की बारीकियां, फूड प्लेटिंग और प्रेजेंटेशन जैसी अनेक विधाओं में प्रशिक्षण दिया जाता है।

प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को केवल खाना बनाना ही नहीं सिखाया जाता, बल्कि उन्हें यह भी बताया जाता है कि पेशेवर किचन में किस प्रकार कार्य किया जाता है और गुणवत्ता बनाए रखते हुए समय का प्रबंधन कैसे किया जाता है। शुरुआत आसान नहीं थी। एक गृहिणी और मां होने के कारण उन्हें परिवार और अपने सपने के बीच संतुलन बनाना पड़ा, लेकिन उन्होंने कभी अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया। धीरे-धीरे उनका यह छोटा-सा प्रयास मुंबई के सबसे चर्चित कुकिंग और बेकिंग स्टूडियो में बदल गया। आज कुलिनरी क्राफ्ट केवल एक प्रशिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि एक ऐसा मंच बन चुका है जहां हर उम्र और हर पृष्ठभूमि के लोग अपनी पाक-कला को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का अवसर प्राप्त करते हैं।

साजिदा खान का मानना है कि खाना बनाना केवल किसी रेसिपी को दोहराना नहीं, बल्कि एक अनुभव है। जिस प्रकार लोग किसी फिल्म, संगीत कार्यक्रम या नाटक का आनंद लेने जाते हैं, उसी तरह कुकिंग भी एक ऐसा अनुभव होना चाहिए जो व्यक्ति को सीखने के साथ-साथ खुशी और आत्मविश्वास दे। यही कारण है कि कुलिनरी क्राफ्ट में आने वाले विद्यार्थियों को केवल रेसिपी नहीं सिखाई जाती, बल्कि उन्हें यह भी समझाया जाता है कि किसी व्यंजन के पीछे का विज्ञान क्या है, मसालों का संतुलन कैसे बनाया जाता है, स्वाद और प्रस्तुति के बीच तालमेल कैसे बैठाया जाता है और एक साधारण डिश को यादगार कैसे बनाया जा सकता है।

स्टूडियो में प्रशिक्षण पूरी तरह व्यावहारिक है। यहां विद्यार्थियों को अत्याधुनिक, पूरी तरह एयर-कंडीशंड और आधुनिक उपकरणों से सुसज्जित किचन में अनुभवी शेफ के मार्गदर्शन में काम करने का अवसर मिलता है। चॉकलेट टेंपरिंग, ब्रेड और केक बेकिंग, पेस्ट्री निर्माण, पास्ता तैयार करना, अंडों की विभिन्न तकनीकें, इंटरनेशनल और भारतीय व्यंजनों की बारीकियां, फूड प्लेटिंग और प्रेजेंटेशन जैसी अनेक विधाओं में प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को केवल खाना बनाना ही नहीं सिखाया जाता, बल्कि उन्हें यह भी बताया जाता है कि पेशेवर किचन में किस प्रकार कार्य किया जाता है और गुणवत्ता बनाए रखते हुए समय का प्रबंधन कैसे किया जाता है।

साजिदा खान का मानना है कि अच्छी शिक्षा वही है जो व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनाए। इसलिए कुलिनरी क्राफ्ट का उद्देश्य केवल पाक-कला सिखाना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, रचनात्मक सोच और उद्यमिता की भावना विकसित करना भी है। विशेष रूप से महिलाओं के लिए यह संस्थान एक नए अवसर के रूप में सामने आया है। यहां प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली अनेक महिलाओं ने अपने घरों से बेकरी और फूड बिजनेस शुरू किए हैं, जबकि कई युवाओं ने प्रतिष्ठित होटलों और रेस्तरां में अपनी पहचान बनाई है। इस प्रकार कुलिनरी क्राफ्ट केवल कौशल विकास का केंद्र नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक सशक्तीकरण का माध्यम भी बन गया है।

साजिदा खान का सपना केवल एक सफल स्टूडियो तक सीमित नहीं है। उनका लक्ष्य मुंबई महानगर क्षेत्र के अधिक से अधिक लोगों तक पाक-कला की शिक्षा पहुंचाना है, ताकि हर व्यक्ति स्वादिष्ट और गुणवत्तापूर्ण भोजन तैयार करने की कला सीख सके और यदि चाहे तो इसी हुनर को अपने करियर या व्यवसाय में बदल सके। उनका विश्वास है कि खाना बनाना एक ऐसा कौशल है जो जीवनभर व्यक्ति के साथ रहता है और उसे रचनात्मकता, आत्मविश्वास तथा आर्थिक अवसर तीनों प्रदान करता है।

 

आज कुलिनरी क्राफ्ट उन लोगों के लिए एक प्रेरणादायक नाम बन चुका है जो अपने भीतर छिपे 'मास्टरशेफ' को पहचानना चाहते हैं। यहां आने वाले विद्यार्थियों को केवल स्वादिष्ट व्यंजन बनाना नहीं सिखाया जाता, बल्कि यह भी सिखाया जाता है कि भोजन के माध्यम से लोगों के दिल कैसे जीते जा सकते हैं। साजिदा खान की सफलता यह साबित करती है कि जब किसी महिला का जुनून उसके संकल्प के साथ जुड़ जाता है, तो वह केवल अपना जीवन ही नहीं बदलती, बल्कि समाज में कौशल, रोजगार और उद्यमिता की नई संभावनाओं के द्वार भी खोल देती है। उनकी कहानी उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा है जो अपने सपनों को परिस्थितियों की सीमाओं से बड़ा मानते हैं और विश्वास करते हैं कि मेहनत, सीखने की इच्छा और सकारात्मक सोच के साथ किसी भी मंजिल तक पहुंचा जा सकता है।