नीट आंदोलन पर एमएसओ की दो टूक, हिंसा नहीं संवाद से निकलेगा हल

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 23-07-2026
MSO's clear stance on the NEET agitation: Solution will emerge through dialogue, not violence.
MSO's clear stance on the NEET agitation: Solution will emerge through dialogue, not violence.

 

नई दिल्ली।

देशभर में नीट परीक्षा को लेकर जारी विवाद और छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बीच मुस्लिम स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन ऑफ इंडिया (एमएसओ) ने छात्रों, सरकार और प्रशासन से संयम तथा संवाद का रास्ता अपनाने की अपील की है। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष आरिफुल वाहिदी कादरी ने कहा कि किसी भी लोकतंत्र की वास्तविक ताकत उसके जागरूक, जिम्मेदार और रचनात्मक युवाओं में निहित होती है। छात्रों को अपनी समस्याएं रखने, सवाल पूछने और अपनी जायज मांगों के लिए शांतिपूर्ण तरीके से आवाज उठाने का पूरा संवैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकार है।

उन्होंने कहा कि यदि छात्रों को परीक्षा प्रक्रिया, मूल्यांकन प्रणाली या किसी प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर वास्तविक चिंता है तो उसका समाधान टकराव के बजाय बातचीत, पारदर्शिता और संवैधानिक प्रक्रियाओं के माध्यम से किया जाना चाहिए। उन्हें विश्वास है कि केंद्र सरकार और संबंधित संस्थाएं छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से लेंगी और निष्पक्ष समाधान की दिशा में सकारात्मक कदम उठाएंगी।

हालांकि एमएसओ ने विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा, आगजनी, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और छात्रों तथा पुलिसकर्मियों के घायल होने की घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त की है। संगठन का कहना है कि लोकतंत्र में असहमति जताना हर नागरिक का अधिकार है, लेकिन हिंसा किसी भी आंदोलन को कमजोर करती है और उसके मूल उद्देश्य को नुकसान पहुंचाती है। इसलिए किसी भी परिस्थिति में हिंसक विरोध को उचित नहीं ठहराया जा सकता।

आरिफुल वाहिदी कादरी ने कहा कि आंदोलन के दौरान घायल हुए सभी छात्रों और पुलिसकर्मियों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की जाती है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा जितनी आवश्यक है, उतना ही महत्वपूर्ण कानून व्यवस्था बनाए रखना भी है। दोनों के बीच संतुलन बनाए रखना सरकार और समाज की साझा जिम्मेदारी है।

एमएसओ ने यह भी कहा कि बड़े जन आंदोलनों में कई बार ऐसे बाहरी और राजनीतिक तत्व सक्रिय हो जाते हैं जो छात्रों की वास्तविक समस्याओं को अपने हितों के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश करते हैं। ऐसे में छात्रों को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए ताकि उनका आंदोलन किसी राजनीतिक या विभाजनकारी एजेंडे का माध्यम न बन सके। संगठन ने छात्रों से आग्रह किया कि वे अपने आंदोलन को पूरी तरह शांतिपूर्ण, जिम्मेदार और लोकतांत्रिक बनाए रखें।

संगठन ने छात्रों से संविधान, कानून और सामाजिक सद्भाव का सम्मान करने की भी अपील की। कादरी ने कहा कि ऐसा कोई कदम नहीं उठाया जाना चाहिए जिससे आंदोलन की विश्वसनीयता प्रभावित हो या समाज में तनाव और विभाजन की स्थिति पैदा हो। उन्होंने कहा कि छात्रों की आवाज तभी प्रभावी होगी जब वह शांति, अनुशासन और लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ उठाई जाएगी।

एमएसओ ने सरकार से भी अपील की कि वह छात्र प्रतिनिधियों के साथ लगातार संवाद बनाए रखे, परीक्षा प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करे और सभी वास्तविक शिकायतों का समयबद्ध तथा निष्पक्ष समाधान निकाले। संगठन का मानना है कि संवाद ही किसी भी विवाद का सबसे प्रभावी और लोकतांत्रिक समाधान है।

इसके साथ ही मुस्लिम स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन ऑफ इंडिया का आरोप है कि शिक्षा मंत्रालय निष्पक्ष, विश्वसनीय और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली सुनिश्चित करने में विफल रहा है।अपने संदेश के अंत में संगठन ने कहा कि शिक्षा केवल करियर का माध्यम नहीं बल्कि राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है। एमएसओ का स्पष्ट संदेश है कि "शिक्षा हमारा मिशन है, शांति हमारी पहचान है और राष्ट्र निर्माण हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।" संगठन ने सभी पक्षों से टकराव और हिंसा से दूर रहकर संवाद, न्याय, पारदर्शिता और लोकतांत्रिक मूल्यों के रास्ते पर आगे बढ़ने की अपील की, ताकि छात्रों की आवाज सुनी जाए और देश में विश्वास, सद्भाव तथा मजबूत लोकतांत्रिक व्यवस्था कायम रह सके।