राजस्थान की बेटियां बदल रहीं समाज की तस्वीर

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 26-07-2026
Daughters of Rajasthan are changing the face of society.
Daughters of Rajasthan are changing the face of society.

 

आवाज द वॉयस ब्यूरो/ नई दिल्ली और जयपुर।

राजस्थान अपनी पुरानी धरोहरों, किलों और राजसी इतिहास के लिए दुनिया भर में मशहूर है। लेकिन आज इसी रेगिस्तानी राज्य में एक नया बदलाव आ रहा है। इस बदलाव की कमान संभाली है यहाँ की महिलाओं ने।ये महिलाएं पुरानी सोच को तोड़कर आगे बढ़ रही हैं।शिक्षा, कानून, सेहत, पर्यावरण संरक्षण और कला जैसे क्षेत्रों में इनका काम काबिले तारीफ है।

'आवाज द वॉयस' की खास 'परवाज सीरीज' की इस आखिरी कड़ी में जानिए राजस्थान की उन 10 प्रेरणादायक महिलाओं की कहानी, जिन्होंने अपनी मेहनत से समाज को एक नई राह दिखाई है।

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1. डॉ. शाइस्ता अंजुम: बीड़ी मजदूर की बेटी जो बनी जानी-मानी डॉक्टर

डॉ. शाइस्ता अंजुम की कहानी हर उस इंसान के लिए मिसाल है जो तंगहाली से निकलकर बड़े सपने देखता है। शाइस्ता के पिता बीड़ी बनाने का काम करते थे। परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर थी। इसके बावजूद उनके पिता का सपना था कि उनकी बेटी डॉक्टर बने।

शाइस्ता ने दिन-रात पढ़ाई की और स्त्री रोग विशेषज्ञ (गायनोलॉजिस्ट) बनीं। इस मुश्किल सफर में उनके पति ने उनका पूरा साथ दिया। साथ ही उनकी सास ने अपनी पोती की देखभाल की जिम्मेदारी संभाली ताकि शाइस्ता अपनी पढ़ाई और प्रैक्टिस पूरी कर सकें। आज डॉ. शाइस्ता उन सभी महिलाओं की उम्मीद का चेहरा हैं जो मुश्किल हालात में भी हार नहीं मानतीं।

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2. फिरदौस खान: हस्तशिल्प बेचने से लेकर हेल्थकेयर कंपनी की सीईओ तक

सुरजेनिक्स हेल्थकेयर की सीईओ फिरदौस खान का बचपन काफी संघर्षों में बीता। अजमेर में पली-बढ़ीं फिरदौस ने अपने परिवार की मदद के लिए बचपन में हाथ से बने सामान तक बेचे। लेकिन उनके इरादे मजबूत थे।

फिरदौस ने आम लोगों को बेहतर और सस्ती मेडिकल सुविधाएं देने का फैसला किया। इसी सोच के साथ उन्होंने अपना हेल्थकेयर प्लेटफॉर्म शुरू किया। आज उनका बिजनेस मॉडल मरीजों को ध्यान में रखकर काम करता है। उनका मकसद है कि सही इलाज हर आम इंसान की पहुंच में हो।

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3. मैमूना नर्गिस: देश की ऐतिहासिक कला और पांडुलिपियों की रखवाला

भारत की पुरानी कला और ऐतिहासिक विरासतों को बचाने में मैमूना नर्गिस का नाम बहुत आदर से लिया जाता है। वे देश की प्रमुख आर्ट कंजर्वेटर (कला संरक्षक) में से एक हैं।मैमूना ने सदियों पुरानी मुग़लकालीन पांडुलिपियों, ऐतिहासिक कुरान, प्राचीन मंदिरों, महलों और संग्रहालयों की कलाकृतियों को सहेजने का काम किया है। उनका मानना है कि इतिहास को संभालकर रखना उतना ही जरूरी है जितना कि इतिहास बनाना।

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4. निगार सुल्ताना: जयपुर की अदालतों से लेकर समाज सुधार तक का सफर

जब जयपुर की अदालतों में महिला वकीलों की संख्या न के बराबर थी, तब एडवोकेट निगार सुल्ताना ने वकालत के पेशे में कदम रखा। अपने पिता से मिली सीख और प्रेरणा के दम पर उन्होंने कानून की दुनिया में अपनी खास पहचान बनाई।

निगार सुल्ताना सिर्फ कोर्ट तक सीमित नहीं रहीं। उन्होंने 'पहल एजुकेशन एंड सोशल डेवलपमेंट सोसाइटी' की नींव रखी। इस संस्था के जरिए वे गरीब बच्चों की पढ़ाई और सामाजिक जागरूकता के लिए लगातार काम कर रही हैं।

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5. निशात हुसैन: राजस्थान की पहली महिला काजी जिन्होंने लड़ी हक की लड़ाई

निशात हुसैन पिछले तीन दशकों से महिलाओं के अधिकारों के लिए काम कर रही हैं। वे राजस्थान की पहली महिला काजियों में शामिल हैं। पारिवारिक विवादों को सुलझाने के लिए उन्होंने काउंसिलिंग और मध्यस्थता का रास्ता चुना।

निशात हुसैन ने बाल विवाह रोकने और एक बार में तीन तलाक (इंसटेंट ट्रिपल तलाक) की प्रथा के खिलाफ खुलकर आवाज उठाई। उन्होंने हजारों परिवारों को टूटने से बचाया है। उनका काम दिखाता है कि बातचीत और कानून के सही इस्तेमाल से समाज में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।

6. प्रो. फातिमा सुल्ताना: हाड़ौती के जंगलों और टाइगर्स को दी नई जिंदगी

राजस्थान में वन्यजीव संरक्षण की बात हो तो प्रो. फातिमा सुल्ताना का नाम सबसे ऊपर आता है। उन्होंने हाड़ौती क्षेत्र में बाघों के आने-जाने वाले रास्तों (टाइगर कॉरिडोर) पर गहरा रिसर्च किया।

उनके वैज्ञानिक अध्ययन की बदौलत ही मुकुंदरा हिल्स और रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व को विकसित करने में मदद मिली। प्रो. फातिमा ने अपने छात्रों को भी पर्यावरण और जंगलों की रक्षा करने के लिए प्रेरित किया है।

7. रूबी खान: सामाजिक सेवा, कार रेसिंग और 4,000 किलोमीटर की पदयात्रा

रूबी खान का जीवन बहुमुखी प्रतिभा का उदाहरण है।वे एक सोशल एक्टिविस्ट, कार रेसर, लेखिका और शिक्षिका हैं।कोरोना काल हो या कोई अन्य आपदा, रूबी हमेशा राहत शिविर लगाने और जरूरतमंदों की मदद करने में आगे रहती हैं।

उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और महिला सशक्तिकरण का संदेश देने के लिए 4,000 किलोमीटर लंबी 'भारत यात्रा' पैदल पूरी की। उनका मानना है कि असली नेतृत्व पदों से नहीं, बल्कि लोगों की सेवा करने से तय होता है।

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8. शबाना डागर: 500 साल पुरानी द्रुपद गायकी परंपरा की संरक्षक

शास्त्रीय संगीत की 500 साल पुरानी 'डागर घराने' की द्रुपद परंपरा को जिंदा रखने में शबाना डागर अहम भूमिका निभा रही हैं। जयपुर में स्थित 'डागर आर्काइव' के माध्यम से वे दुर्लभ पांडुलिपियों, पुराने वाद्य यंत्रों और संगीत के इतिहास को संभाल रही हैं।शबाना का यह प्रयास भारतीय शास्त्रीय संगीत की नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़े रखने में बहुत मददगार साबित हो रहा है।

9. ज़ीनत कैफी: बंदिशों को तोड़कर बनीं निडर पत्रकार और उर्दू लेखिका

उर्दू लेखिका और पत्रकार ज़ीनत कैफी ने बचपन से ही समाज की कई बंदिशों का सामना किया। करियर के शुरुआती दिनों में भी उन्हें कई भेदभाव और मुश्किलों का सामना करना पड़ा।

लेकिन ज़ीनत ने अपनी कलम की ताकत को कम नहीं होने दिया। उन्होंने निडर पत्रकारिता और बेहतरीन लेखन के दम पर राजस्थान की चुनिंदा महिला मुस्लिम पत्रकारों में अपनी जगह बनाई। आज वे आजाद सोच और निष्पक्ष पत्रकारिता की मिसाल हैं।

10. फरहा हुसैन: क्रिमिनल वकील से आईआरएस अफसर बनने तक का शानदार सफर

इस सूची की दसवीं प्रेरणादायक शख्सियत हैं फरहा हुसैन। फरहा ने पहले क्रिमिनल लॉयर के रूप में काम किया। इसके बाद उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी की।

फरहा ने ऑल इंडिया 267वीं रैंक हासिल की और भारतीय राजस्व सेवा (IRS) अधिकारी बनीं। उनकी यह सफलता साबित करती है कि सही दिशा में की गई मेहनत से हर मुकाम हासिल किया जा सकता है।

समाज के लिए एक नई उम्मीद

राजस्थान की ये दस महिलाएं आज अलग-अलग क्षेत्रों में मिसाल कायम कर रही हैं। चाहे वो डॉक्टर हों, वकील हों, अफसर हों या फिर कलाकार। इन सभी की कहानियों में एक बात कॉमन है—इनके पास मुश्किलों से लड़ने का हौसला था। इन्होंने न सिर्फ अपना रास्ता खुद बनाया, बल्कि दूसरी महिलाओं के लिए भी आगे बढ़ने के दरवाजे खोले हैं।



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