अलीगढ़
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) में छात्रों और शोधार्थियों के बीच पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राष्ट्रीय पुस्तक न्यास (एनबीटी), भारत की मोबाइल पुस्तक प्रदर्शनी एवं लाइब्रेरी वैन का शुभारंभ किया गया। भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के अधीन संचालित इस पहल के तहत मौलाना आज़ाद लाइब्रेरी परिसर में विभिन्न विषयों की हजारों पुस्तकों का संग्रह विश्वविद्यालय समुदाय के लिए उपलब्ध कराया गया।
इस मोबाइल पुस्तक प्रदर्शनी का उद्घाटन कला संकाय के डीन प्रो. मोहम्मद रिजवान खान और विश्वविद्यालय की मुख्य पुस्तकालयाध्यक्ष प्रो. निशात फातिमा ने संयुक्त रूप से किया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शिक्षक, पुस्तकालय विशेषज्ञ, शोधार्थी और बड़ी संख्या में छात्र उपस्थित रहे। आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण पुस्तकों तक आसान पहुंच उपलब्ध कराना और उनमें अध्ययन की रुचि को बढ़ावा देना है।
इस अवसर पर जनसंपर्क कार्यालय की सदस्य प्रभारी प्रो. विभा शर्मा, हिंदी विभाग की प्रो. इफ्फत असगर, डिप्टी प्रॉक्टर डॉ. हबीबुर्रहमान, डिप्टी लाइब्रेरियन डॉ. मोनव्वर इकबाल, सहायक पुस्तकालयाध्यक्ष, पुस्तकालय कर्मी, विभिन्न विभागों के शिक्षक तथा बड़ी संख्या में छात्र मौजूद रहे।
मोबाइल पुस्तक प्रदर्शनी में हिंदी, उर्दू और अंग्रेजी भाषाओं की पुस्तकों का समृद्ध संग्रह प्रदर्शित किया गया। इसमें साहित्य, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, इतिहास, जीवनी, बाल साहित्य, शिक्षा, संस्कृति, समकालीन विषयों और प्रतियोगी परीक्षाओं से संबंधित अनेक महत्वपूर्ण पुस्तकें शामिल थीं। छात्रों ने विशेष रुचि के साथ नई प्रकाशित शैक्षणिक और सामान्य ज्ञान की पुस्तकों का अवलोकन किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रो. मोहम्मद रिजवान खान ने कहा कि पुस्तकें किसी भी समाज की बौद्धिक प्रगति का आधार होती हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की पुस्तक प्रदर्शनियां छात्रों में पढ़ने की आदत विकसित करने के साथ-साथ उनके ज्ञान के दायरे को भी व्यापक बनाती हैं। उनके अनुसार नियमित अध्ययन न केवल शैक्षणिक सफलता के लिए आवश्यक है, बल्कि व्यक्तित्व विकास और आजीवन सीखने की संस्कृति को भी मजबूत करता है।
उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में जहां अधिकांश जानकारी मोबाइल और इंटरनेट के माध्यम से उपलब्ध है, वहीं पुस्तकों का महत्व आज भी कम नहीं हुआ है। पुस्तकें गहन अध्ययन, विश्लेषणात्मक सोच और शोध की बेहतर समझ विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
विश्वविद्यालय की मुख्य पुस्तकालयाध्यक्ष प्रो. निशात फातिमा ने राष्ट्रीय पुस्तक न्यास की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि मोबाइल लाइब्रेरी वैन के माध्यम से पुस्तकों को सीधे शिक्षण संस्थानों तक पहुंचाने की योजना अत्यंत सराहनीय है। उन्होंने कहा कि इससे विद्यार्थियों, शोधार्थियों और शिक्षकों को उच्च गुणवत्ता वाली पुस्तकों तक सरल और सुविधाजनक पहुंच मिलेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रकार की पहल विश्वविद्यालय परिसर में पढ़ने की संस्कृति को और मजबूत करेगी तथा युवा पीढ़ी को पुस्तकों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उनके अनुसार पुस्तकालय केवल किताबों का संग्रह नहीं, बल्कि ज्ञान, शोध और रचनात्मकता का केंद्र होता है।
मोबाइल पुस्तक प्रदर्शनी में आए विद्यार्थियों और शोधार्थियों ने भी इस पहल का स्वागत किया। कई छात्रों ने बताया कि एक ही स्थान पर विभिन्न विषयों की इतनी बड़ी संख्या में पुस्तकें उपलब्ध होने से उन्हें अपनी पढ़ाई और शोध के लिए उपयोगी सामग्री चुनने का अवसर मिला। विशेष बात यह रही कि अधिकांश पुस्तकें रियायती दरों पर उपलब्ध कराई गईं, जिससे छात्रों में खरीदारी को लेकर खासा उत्साह दिखाई दिया।
कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में शिक्षकों, पुस्तकालय विज्ञान के विशेषज्ञों और शोधार्थियों ने भी प्रदर्शनी का अवलोकन किया और राष्ट्रीय पुस्तक न्यास द्वारा प्रकाशित नवीन पुस्तकों में रुचि दिखाई। कई प्रतिभागियों ने कहा कि ऐसी मोबाइल पुस्तक प्रदर्शनियों का आयोजन देश के अन्य विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों में भी नियमित रूप से किया जाना चाहिए।
राष्ट्रीय पुस्तक न्यास की यह पहल केवल पुस्तक बिक्री तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य पढ़ने की आदत को प्रोत्साहित करना, गुणवत्तापूर्ण साहित्य को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना और शिक्षा के क्षेत्र में ज्ञान आधारित वातावरण तैयार करना है। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में आयोजित इस प्रदर्शनी ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि डिजिटल युग में भी पुस्तकों का महत्व कम नहीं हुआ है और पढ़ने की संस्कृति को मजबूत बनाना उच्च शिक्षा की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।