महाराष्ट्र पुलिस भर्ती: सेवा संस्था की मुफ्त कोचिंग के लिए उमड़े युवा

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 07-07-2026
Maharashtra Police Recruitment: Youth flock for free coaching provided by the service organization. AI image
Maharashtra Police Recruitment: Youth flock for free coaching provided by the service organization. AI image

 

गुलाम कादिर/ नागपुर

नागपुर में इन दिनों मौसम का मिजाज बदला हुआ है। आसमान में घने बादल छाए हैं और रिमझिम बारिश का दौर जारी है। इसके बावजूद विदर्भ के युवाओं के हौसले डिगे नहीं हैं। महाराष्ट्र पुलिस में शामिल होकर देश की सेवा करने का उनका जज्बा हर रुकावट पर भारी पड़ रहा है। विदर्भ क्षेत्र में सामाजिक बदलाव और युवाओं के करियर को नई दिशा देने वाली अग्रणी संस्था 'सेवा' (SEWA) ने एक बार फिर युवाओं के सपनों को नई उड़ान दी है। संस्था की ओर से महाराष्ट्र पुलिस भर्ती परीक्षा की तैयारी के लिए मुफ्त कोचिंग क्लास के सातवें बैच की चयन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इसके लिए चार और पांच जुलाई दो हजार छब्बीस को नागपुर में विशेष इंटरव्यू का शानदार आयोजन किया गया।

इस इंटरव्यू सत्र में भाग लेने के लिए केवल नागपुर ही नहीं, बल्कि पूरे महाराष्ट्र से रिकॉर्ड संख्या में छात्र और छात्राएं पहुंचे। युवाओं के साथ उनके माता-पिता भी इस चयन प्रक्रिया को देखने और अपने बच्चों का हौसला बढ़ाने के लिए आए थे।

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खराब मौसम पर भारी पड़ा युवाओं का जबरदस्त जज्बा

इंटरव्यू के पहले दिन यानी चार जुलाई दो हजार छब्बीस को नागपुर और आसपास के जिलों में सुबह से ही लगातार बारिश हो रही थी। मौसम काफी खराब था, लेकिन युवाओं का जोश देखते ही बनता था। सुदूर ग्रामीण इलाकों से आए छात्र भी सही समय पर इंटरव्यू केंद्र पहुंच गए। इंटरव्यू के पहले ही दिन कुल नब्बे उम्मीदवारों की जांच और साक्षात्कार की प्रक्रिया को पूरा किया गया।

हैरान करने वाली बात यह है कि इस बार सिर्फ पंद्रह दिनों के भीतर चार सौ से अधिक बच्चों ने कोचिंग के लिए अपना रजिस्ट्रेशन कराया है। इनमें सबसे बड़ी तादाद उन मुस्लिम छात्र-छात्राओं की है, जो अब तक बिना किसी सही मार्गदर्शन या कोचिंग के खुद ही तैयारी में जुटे थे। कोई पुलिस कांस्टेबल की तैयारी कर रहा था, तो कोई एमपीएससी परीक्षा के जरिए बड़ा अधिकारी बनने का सपना देख रहा था।

इंटरव्यू में शामिल होने वाले कैंडिडेट्स सिर्फ नागपुर या यवतमाल तक सीमित नहीं थे। वे विदर्भ और मराठवाड़ा के सबसे सुदूर इलाकों से लंबा सफर तय करके यहां पहुंचे थे। जलगांव जिले के पाचोरा, हिंगोली जिले के औंढा नागनाथ, उमरखेड़, जादगांव और नांदेड़ जैसे शहरों से भी युवा अपनी किस्मत आजमाने आए थे। इसके अलावा अमरावती और औरंगाबाद की सीमाओं से सटे छोटे-छोटे गांवों और कस्बों के युवाओं ने भी इस सुनहरे मौके का फायदा उठाने के लिए बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

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उच्च शिक्षित युवाओं ने भी दिखाई पुलिस भर्ती में दिलचस्पी

इस बार के पुलिस भर्ती बैच नंबर सात के इंटरव्यू में एक बेहद हैरान करने वाला और सकारात्मक पहलू सामने आया। आमतौर पर पुलिस कांस्टेबल पद के लिए सामान्य रूप से पास युवा आवेदन करते हैं, लेकिन इस बार कोचिंग के लिए कई ऐसे उम्मीदवार भी आए जो बहुत ज्यादा पढ़े-लिखे थे। इनमें से कुछ छात्र पोस्ट ग्रेजुएट (परास्नातक) की पढ़ाई पूरी कर चुके थे, तो एक छात्र फूड टेक्नोलॉजी में बीटेक की डिग्री हासिल कर चुका था।

संस्था के पदाधिकारियों ने जब इन उच्च शिक्षित युवाओं के शैक्षणिक दस्तावेज देखे, तो उन्होंने एक बहुत ही बेहतरीन फैसला लिया। सेवा संस्था के मेंटर्स ने इन होनहार छात्रों को पुलिस कांस्टेबल जैसी शुरुआती स्तर की नौकरी के बजाय सीधे बड़े पदों के लिए तैयार करने की सलाह दी। बीटेक और पोस्ट ग्रेजुएट कर चुके इन योग्य छात्रों को संस्था द्वारा पहले से चलाई जा रही एमपीएससी (MPSC) यानी महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग की विशेष कक्षाओं में भेज दिया गया। दो सबसे प्रतिभावान छात्रों को सीधे एमपीएससी परीक्षा की तैयारी करने का सुझाव देकर उनका मार्गदर्शन किया गया, ताकि वे भविष्य में बड़े प्रशासनिक अधिकारी बन सकें।

दिहाड़ी मजदूरी कर तैयारी करने वाले गरीब छात्रों का संघर्ष

संस्था की इस निशुल्क कोचिंग का लाभ उठाने के लिए केवल संपन्न परिवारों के बच्चे ही नहीं आ रहे हैं, बल्कि समाज के बेहद गरीब और पिछड़े तबके के युवा भी यहां पहुंचे। इंटरव्यू में एक बड़ी संख्या ऐसे गैर-मुस्लिम उम्मीदवारों की भी थी, जो पहले से ही यवतमाल और नागपुर के तंग कमरों में रहकर किसी तरह पुलिस भर्ती की तैयारी में जुटे हैं।

इन छात्रों की आर्थिक स्थिति इतनी ज्यादा खराब है कि वे अपनी पढ़ाई, रहने और खाने का खर्च निकालने के लिए दिन में दिहाड़ी मजदूरी का काम करते हैं। इसके बाद जो भी थोड़ा-बहुत समय बचता है, उसमें वे पूरी ताकत से पुलिस भर्ती की फिजिकल परीक्षा और लिखित परीक्षा की तैयारी करते हैं। सेवा संस्था के पदाधिकारियों ने इन गरीब बच्चों की बेजोड़ लगन और मेहनत को देखकर उनकी हर संभव मदद करने का पूरा भरोसा दिया।

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पूरी पारदर्शिता के साथ दो अलग पैनलों ने लिए इंटरव्यू

इंटरव्यू की इस पूरी प्रक्रिया को बिना किसी देरी के और पूरी पारदर्शिता के साथ निपटाने के लिए सेवा संस्था ने पुख्ता इंतजाम किए थे। इसके लिए दो अलग-अलग विशेष पैनल बनाए गए थे। हर एक पैनल में संस्था के दो-दो वरिष्ठ और अनुभवी पदाधिकारी शामिल थे। इन टीमों ने बच्चों के सभी जरूरी शैक्षणिक और निवास संबंधी कागजातों की बारीकी से जांच की। इसके साथ ही पुलिस भर्ती के लिए आवश्यक शारीरिक मापदंडों जैसे लंबाई और सीने की चौड़ाई का भी लाइव सत्यापन किया गया।

इंटरव्यू केंद्र पर बच्चों के साथ आई महिलाओं और अभिभावकों में एक अलग ही खुशी और उत्साह का माहौल देखने को मिला। अपने बच्चों के उज्जवल भविष्य और शानदार करियर की संभावनाओं को देखकर माता-पिता की आंखों में उम्मीद की एक नई चमक साफ नजर आ रही थी। संस्था की ओर से की गई बेहतरीन व्यवस्थाओं को देखकर सभी अभिभावकों ने इस अनूठे सामाजिक कार्य की दिल से तारीफ की।

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सेवा संस्था के सेक्रेटरी और पदाधिकारियों का बड़ा संदेश

संस्था के वरिष्ठ मार्गदर्शक सलीमुद्दीन काज़ी सर ने दो दिनों तक चले इस पुलिस भर्ती बैच 7 की इंटरव्यू प्रक्रिया के अपने अनुभवों को साझा किया। उन्होंने बच्चों के भीतर छिपे जज्बे की सराहना करते हुए कहा कि इन युवाओं में आगे बढ़ने की असीम क्षमता है।

वहीं सेवा संस्था के सेक्रेटरी निजामुद्दीन शेख ने समाज के संपन्न लोगों से एक बेहद भावुक अपील की है। उन्होंने कहा कि आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत यह है कि हमारी और आपकी ज़कात का पैसा इन गरीब और जरूरतमंद बच्चों की पढ़ाई-लिखाई पर खर्च हो।

उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि संस्था के पास वर्तमान में इतने सारे बच्चों को एक साथ एक ही जगह पर पढ़ाने और उनके रहने के लिए पर्याप्त संसाधन और असबाब मौजूद नहीं हैं। अगर समाज के प्रबुद्ध और आर्थिक रूप से सक्षम लोग इस नेक काम में आगे आकर मदद करें, तो इन बच्चों के लिए सफलता के कई नए रास्ते खुल सकते हैं।

उन्होंने एक मशहूर शेर के जरिए अपनी बात रखी कि प्यास कहती है चलो रेत निचोड़ी जाए, अपने हिस्से में अब समंदर नहीं आने वाला। अपने काबे की हिफाजत अब हमें खुद ही करनी होगी, क्योंकि अब कोई अबाबील का लश्कर नहीं आने वाला।
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सेवा संस्था पिछले कई वर्षों से नागपुर, यवतमाल और पूरे विदर्भ क्षेत्र में मुस्लिम और पिछड़े तबके के बच्चों के शैक्षिक और सामाजिक उत्थान के लिए लगातार जमीनी स्तर पर काम कर रही है। पुलिस भर्ती के लिए मुफ्त कोचिंग देना, छात्रों के रहने की उत्तम व्यवस्था करना और उनकी पढ़ाई का पूरा खर्च उठाना अब संस्था के मुख्य मिशन का एक अनिवार्य हिस्सा बन चुका है। पांच जुलाई दो हजार छब्बीस को भी इंटरव्यू का अंतिम दौर जारी रहा। संस्था का एकमात्र लक्ष्य समाज के सबसे अंतिम पायदान पर खड़े युवा को भी मुख्यधारा में शामिल होने का पूरा अवसर देना है।

    मुख्य जानकारी: सेवा संस्था की इस मुफ्त कोचिंग के जरिए अब तक विदर्भ क्षेत्र के सैकड़ों गरीब और जरूरतमंद युवा पुलिस विभाग, रेलवे और अन्य सरकारी नौकरियों में शामिल होकर अपने पैरों पर खड़े हो चुके हैं।