कोझिकोड (केरल)
भारतीय छात्र एम. अब्दुल फतह नूरानी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी शैक्षणिक उपलब्धि हासिल की है। उन्हें अमेरिका के प्रतिष्ठित न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी (NYU) में मिडिल ईस्टर्न एंड इस्लामिक स्टडीज़ के पीएचडी कार्यक्रम में दाखिला मिला है। इसके साथ ही उन्हें लगभग ₹5.5 करोड़ की पूरी तरह फंडेड फेलोशिप भी प्रदान की गई है, जो उनके शोध और अध्ययन को आर्थिक रूप से पूरी तरह सुरक्षित बनाती है।
यह फेलोशिप कई प्रतिष्ठित स्कॉलरशिप्स का संयोजन है, जिसमें मैक्रैकेन फेलोशिप, डीन डॉक्टोरल फेलोशिप और डीन ह्यूमैनिटीज स्कॉलर्स प्रोग्राम शामिल हैं। इन सभी के तहत नूरानी को ट्यूशन फीस, स्वास्थ्य बीमा और रहने के लिए स्टाइपेंड जैसी सुविधाएं मिलेंगी।
नूरानी का शोध कार्य खाड़ी देशों में बसे मलयाली मुसलमानों के बीच जीवन और मृत्यु से जुड़े धार्मिक पहलुओं तथा नैतिक पर्यावरण (मोरल इकोलॉजी) पर केंद्रित होगा। उनका यह अध्ययन जलवायु परिवर्तन और स्थिरता (सस्टेनेबिलिटी) से जुड़े वैश्विक विमर्शों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
गौरतलब है कि इस वर्ष नूरानी को दुनिया की कई प्रमुख यूनिवर्सिटीज़ से पीएचडी के ऑफर मिले थे। इनमें यूनिवर्सिटी ऑफ टोरंटो, वेंडरबिल्ट यूनिवर्सिटी, यूनिवर्सिटी ऑफ पेंसिल्वेनिया और सिटी यूनिवर्सिटी ऑफ न्यूयॉर्क जैसी संस्थाएं शामिल हैं। इसके बावजूद उन्होंने न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी को अपने उच्च शोध के लिए चुना।
वर्तमान में नूरानी कोलंबिया यूनिवर्सिटी से इस्लामिक स्टडीज़ और मुस्लिम कल्चर्स में पूरी तरह फंडेड मास्टर्स प्रोग्राम पूरा कर रहे हैं। इससे पहले उन्होंने कोझिकोड स्थित जामिया मदीनाथुननूर से इस्लामिक स्टडीज़ में सात वर्षीय बैचलर प्रोग्राम किया था। इसके बाद उन्होंने हैदराबाद यूनिवर्सिटी से पॉलिटिकल साइंस में गोल्ड मेडल के साथ मास्टर्स की डिग्री हासिल की।
नूरानी को जूनियर रिसर्च फेलोशिप (JRF) भी मिल चुकी है और उन्होंने ब्रिटिश सोसाइटी फॉर मिडिल ईस्टर्न स्टडीज़ तथा जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित मंचों पर अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए हैं।
मलप्पुरम जिले के कडक्कट्टुप्पारा के रहने वाले नूरानी, अब्दुर्रहमान साकाफी और जैनबा के बेटे हैं। उनकी इस उपलब्धि पर भारतीय ग्रैंड मुफ्ती शेख अबूबक्र अहमद और डॉ. मुहम्मद अब्दुल हक्की सहित कई प्रमुख हस्तियों ने उन्हें बधाई दी है।
नूरानी की यह सफलता न केवल उनके व्यक्तिगत संघर्ष और मेहनत का परिणाम है, बल्कि यह भारत के युवाओं के लिए भी एक प्रेरणा है कि समर्पण और शिक्षा के बल पर वैश्विक मंच पर अपनी पहचान बनाई जा सकती है।