नई दिल्ली
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने प्रश्न पत्रों में दिए गए क्यूआर कोड को लेकर फैल रही भ्रामक जानकारी पर स्पष्टता जारी करते हुए लोगों को अफवाहों से सावधान रहने की सलाह दी है। बोर्ड ने कहा कि ये क्यूआर कोड किसी भी तरह के इंटरनेट लिंक के रूप में काम नहीं करते, बल्कि केवल आंतरिक उपयोग के लिए बनाए गए हैं।
सीबीएसई ने अपने आधिकारिक बयान में बताया कि क्यूआर कोड परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और सुरक्षा बनाए रखने के लिए उपयोग किए जाते हैं। इनका उद्देश्य प्रश्न पत्रों की सत्यता, ट्रैकिंग और परीक्षा की अखंडता सुनिश्चित करना है। जब इन्हें स्कैन किया जाता है, तो ये किसी वेबसाइट को नहीं खोलते, बल्कि केवल निर्धारित टेक्स्ट ही दिखाते हैं।
बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति इस टेक्स्ट को गूगल जैसे सर्च इंजन पर खोजता है, तो एल्गोरिदम के आधार पर कुछ असंबंधित परिणाम सामने आ सकते हैं। इन परिणामों का सीबीएसई या उसकी परीक्षा प्रक्रिया से कोई संबंध नहीं होता। ऐसे मामलों को लेकर गलत निष्कर्ष निकालना पूरी तरह भ्रामक है।
सीबीएसई के परीक्षा नियंत्रक संयम भारद्वाज ने कहा कि कुछ लोग जानबूझकर इन क्यूआर कोड्स को गलत तरीके से पेश कर रहे हैं, जिससे बोर्ड की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश हो रही है। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति या संस्था से इन कोड्स को जोड़ना तथ्यात्मक रूप से गलत और भ्रामक है।
बोर्ड ने छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों और मीडिया से अपील की है कि वे किसी भी अपुष्ट जानकारी को साझा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच करें। केवल आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करें और ऐसी किसी भी सामग्री को बढ़ावा न दें जो भ्रम पैदा कर सकती हो।
इसके साथ ही सीबीएसई ने यह भी चेतावनी दी है कि मूल्यांकन प्रक्रिया से जुड़े शिक्षक सोशल मीडिया पर अपने अनुभव या राय साझा करने से बचें। ऐसा करने से छात्रों और अभिभावकों में भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है, जिस पर सख्त कार्रवाई की जा सकती है।
सीबीएसई ने अंत में कहा कि जिम्मेदार सूचना साझा करना ही संस्थाओं की विश्वसनीयता बनाए रखने का सबसे बड़ा आधार है।