भारत–अमेरिका ट्रेड डील में रूसी तेल पर क्या बदलेगा रुख? शीर्ष विदेश नीति विशेषज्ञ लिसा कर्टिस ने बताई पूरी तस्वीर

Story by  एटीवी | Published by  [email protected] | Date 04-02-2026
What will change regarding Russian oil in the India-US trade deal? Top foreign policy expert Lisa Curtis explains the full picture.
What will change regarding Russian oil in the India-US trade deal? Top foreign policy expert Lisa Curtis explains the full picture.

 

वॉशिंगटन डीसी

भारत और अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित ट्रेड डील पर सहमति बनने के बाद एक सवाल सबसे ज़्यादा चर्चा में है—क्या भारत रूसी तेल का आयात पूरी तरह बंद करेगा? इस मुद्दे को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के दावे और भारत सरकार की चुप्पी के बीच भ्रम की स्थिति बनी हुई है।

राष्ट्रपति ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर दावा किया कि भारत ने रूसी तेल खरीदना बंद करने और अमेरिका से अधिक तेल आयात करने पर सहमति जताई है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हुई बातचीत में रूस–यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने पर भी चर्चा हुई। ट्रम्प के मुताबिक, भारत का यह कदम युद्ध खत्म करने में मददगार होगा।

हालांकि, भारत सरकार की ओर से अब तक इस बात की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है कि रूसी तेल आयात को पूरी तरह रोका जाएगा। ट्रेड डील के सटीक प्रावधानों को लेकर दोनों देशों की ओर से संयुक्त बयान का अभी इंतज़ार है।

इस पूरे घटनाक्रम पर शीर्ष अमेरिकी विदेश नीति विशेषज्ञ और Centre for New American Security की निदेशक Lisa Curtis ने अहम विश्लेषण पेश किया है। एएनआई से बातचीत में उन्होंने कहा कि भारत रूसी तेल के आयात में धीरे-धीरे कमी जरूर कर रहा है, लेकिन इसे पूरी तरह बंद करने को लेकर दोनों देशों की समझ अलग-अलग हो सकती है।

लिसा कर्टिस के मुताबिक, “प्रधानमंत्री मोदी ने सार्वजनिक रूप से वह बात नहीं दोहराई, जो राष्ट्रपति ट्रम्प ने कही। भारत रूस को एक ऐतिहासिक और रणनीतिक साझेदार मानता है और वह यह संदेश नहीं देना चाहता कि वह अमेरिकी दबाव में आकर फैसले कर रहा है। हालांकि, भारत यह भी समझता है कि यह मुद्दा राष्ट्रपति ट्रम्प के लिए कितना अहम है।”

उन्होंने यह भी कहा कि भारत–अमेरिका ट्रेड डील का ऐलान दोनों लोकतांत्रिक देशों के रिश्तों के लिए बड़ा सकारात्मक संकेत है। कर्टिस के अनुसार, हाल के महीनों में भारत और अमेरिका के बीच कुछ मतभेद रहे हैं, खासकर भारत–पाकिस्तान तनाव के बाद की परिस्थितियों को लेकर, लेकिन इसके बावजूद यह समझौता संबंधों को नई मजबूती देगा।

कर्टिस ने यह भी रेखांकित किया कि दिसंबर में भारत के रूसी तेल आयात में गिरावट आई थी, जिस पर ट्रम्प प्रशासन की नज़र गई। इसके अलावा, हाल ही में भारत और यूरोपीय संघ के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट भी अमेरिका को तेजी से भारत के साथ डील पूरी करने के लिए प्रेरित कर सकता है।

इस बीच, भारत के वाणिज्य मंत्री Piyush Goyal ने कहा है कि जैसे ही ट्रेड डील की अंतिम रूपरेखा तय होगी और तकनीकी प्रक्रियाएं पूरी होंगी, दोनों देश संयुक्त बयान जारी करेंगे। उन्होंने भरोसा जताया कि यह समझौता हर भारतीय के हितों की रक्षा करेगा और देश के लिए बड़े अवसर खोलेगा।

फिलहाल, रूसी तेल पर भारत का अंतिम रुख क्या होगा—यह सवाल संयुक्त बयान के आने तक खुला ही रहेगा।