वॉशिंगटन
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि उन्होंने ईरान के साथ एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, इस समझौते के तहत ईरान अपने उच्च स्तर पर संवर्धित यूरेनियम के भंडार को कम करेगा, जबकि अमेरिका ईरान पर लगे कुछ प्रतिबंधों में ढील देगा। इससे ईरान को अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपना तेल स्वतंत्र रूप से बेचने का रास्ता मिल जाएगा।
यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब हाल के महीनों में अमेरिका, ईरान और उनके सहयोगियों के बीच बढ़ते तनाव ने पश्चिम एशिया और वैश्विक ऊर्जा बाजारों को प्रभावित किया था। दोनों देशों के बीच हुए इस समझौते को क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, जिन्होंने युद्ध समाप्त कराने के शुरुआती प्रयासों में मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी, ने कहा कि दोनों देशों के नेताओं के हस्ताक्षर के साथ ही यह समझौता तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि शुक्रवार को एक औपचारिक हस्ताक्षर समारोह आयोजित किया जाएगा।
समझौते के प्रमुख प्रावधानों में होर्मुज जलडमरूमध्य को दो महीने तक बिना किसी शुल्क के जहाजों के लिए खोलना शामिल है। यह जलमार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक माना जाता है, जहां से वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। इसके अलावा समझौते में लेबनान की क्षेत्रीय अखंडता बनाए रखने की प्रतिबद्धता भी व्यक्त की गई है।
अमेरिकी अधिकारियों ने कई दिनों की गोपनीय वार्ताओं के बाद समझौते के मसौदे की जानकारी पत्रकारों को दी। बाद में ईरानी सरकारी टेलीविजन ने भी समझौते से जुड़ा पाठ जारी किया, जिसकी सामग्री काफी हद तक अमेरिकी पक्ष द्वारा साझा की गई जानकारी से मेल खाती है।
हालांकि पहले कहा गया था कि राष्ट्रपति ट्रंप और अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने रविवार को डिजिटल माध्यम से समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए थे और शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में एक औपचारिक समारोह आयोजित होगा, लेकिन ट्रंप ने बुधवार को फ्रांस में रहते हुए बताया कि उन्होंने दस्तावेज़ पर औपचारिक रूप से हस्ताक्षर कर दिए हैं।
फ्रांस के वर्साय पैलेस से निकलते समय ट्रंप ने पत्रकारों से कहा, “समझौते पर हस्ताक्षर हो चुके हैं।” इससे पहले उन्होंने जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ रात्रिभोज में हिस्सा लिया था।
एक अमेरिकी अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने भी बुधवार को समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। हालांकि ईरान की ओर से इस पर तत्काल कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई। यह भी स्पष्ट नहीं हो सका है कि इन हस्ताक्षरों के साथ अंतिम व्यापक समझौते के लिए प्रस्तावित 60 दिनों की वार्ता अवधि औपचारिक रूप से शुरू हो गई है या नहीं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। यदि दोनों पक्ष आगामी वार्ताओं में प्रगति करते हैं, तो इसका सकारात्मक असर पश्चिम एशिया की सुरक्षा, वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर देखने को मिल सकता है।