वॉशिंगटन।
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने बड़ा सैन्य कदम उठाते हुए हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर तत्काल नाकेबंदी का आदेश दे दिया है। यह फैसला ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर झुकने से इनकार और इस्लामाबाद में हुई वार्ता के विफल रहने के बाद लिया गया है।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर घोषणा करते हुए कहा कि अमेरिकी नौसेना अब हर उस जहाज को रोकेगी, जो हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की कोशिश करेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर किसी भी ईरानी बल ने अमेरिकी जहाजों या अन्य शांतिपूर्ण पोतों पर हमला किया, तो उसे “कड़ी सैन्य कार्रवाई” का सामना करना पड़ेगा।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, यह नाकेबंदी भारतीय समयानुसार शाम 5:30 बजे से लागू हो जाएगी। इसके तहत ईरान के बंदरगाहों की निगरानी और जहाजों की तलाशी ली जाएगी। हालांकि, गैर-ईरानी बंदरगाहों के बीच आवाजाही करने वाले जहाजों को सीमित रूप से गुजरने की अनुमति दी जा सकती है।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है, जहां से दुनिया के करीब 20 प्रतिशत कच्चे तेल का परिवहन होता है। ऐसे में अमेरिकी नाकेबंदी का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
दरअसल, पिछले कुछ हफ्तों से यह जलडमरूमध्य तनाव का केंद्र बना हुआ है। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हवाई हमलों के बाद ईरान ने इस मार्ग को लगभग बंद कर दिया था। हाल ही में युद्धविराम के बावजूद यहां जहाजों की आवाजाही सीमित बनी हुई है।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance भी पाकिस्तान से बिना किसी समझौते के लौटे हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने अपना “अंतिम और सर्वश्रेष्ठ प्रस्ताव” ईरान के सामने रखा है, अब फैसला तेहरान को करना है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन हॉर्मुज नाकेबंदी के साथ-साथ ईरान पर सीमित सैन्य हमले फिर से शुरू करने पर भी विचार कर रहा है, ताकि कूटनीतिक गतिरोध को तोड़ा जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा सकता है और वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट की आशंका को जन्म दे सकता है। हॉर्मुज जैसे रणनीतिक मार्ग पर किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई न केवल मध्य पूर्व, बल्कि पूरी दुनिया के लिए गंभीर परिणाम ला सकती है।
फिलहाल, दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि ईरान इस कदम पर कैसी प्रतिक्रिया देता है और क्या आने वाले दिनों में हालात और बिगड़ते हैं या फिर कूटनीति कोई नया रास्ता निकालती है।