खबरों से कंटेंट लीड तक: कैसे आयशा ने हर मोड़ पर खुद को साबित किया

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 13-04-2026
From News Reporting to Content Lead: How Ayesha Proved Herself at Every Turn
From News Reporting to Content Lead: How Ayesha Proved Herself at Every Turn

 

सानिया अंजुम

पत्रकारिता की दुनिया में जब लाइव कैमरा ऑन होता है तो बाहर से सब बहुत चमक-धमक वाला दिखता है। लेकिन उस कैमरे के पीछे की जो जद्दोजहद है, वह एक अलग ही कहानी कहती है। आयशा तबस्सुम की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। उन्होंने अपनी शुरुआत मुंबई के बड़े न्यूज रूम से की और आज वे बेंगलुरु इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (BIAL) में कंटेंट लीड के तौर पर एक बड़ी जिम्मेदारी संभाल रही हैं। उनकी पूरी यात्रा में एक बात सबसे अहम रही है और वह है लोगों की कहानियों को उन्हीं के अंदाज में कहना।

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माउंट कार्मेल कॉलेज से पढ़ाई पूरी करने के बाद आयशा ने मुंबई का रुख किया। वहां उन्होंने 'टाइम्स नाउ' जैसे बड़े चैनल में कदम रखा। शुरुआत एक प्रोडक्शन असिस्टेंट के तौर पर हुई थी। धीरे-धीरे वे एसोसिएट प्रोड्यूसर बनीं। आयशा बताती हैं कि पत्रकारिता का असली हुनर कैमरे के सामने नहीं बल्कि उसके पीछे होता है। एडिटिंग टेबल पर कैसे एक कहानी चुनी जाती है, विजुअल्स को कैसे सजाया जाता है और शब्दों का चयन कैसे होता है, यही एक रिपोर्ट को दिल छू लेने वाला बनाता है। उनका मानना है कि जब तक कोई खबर सीधे लोगों की जिंदगी से नहीं जुड़ती, तब तक वह बेअसर है।

आयशा के करियर में साल 2008 एक ऐसा मोड़ लेकर आया जिसे वह कभी नहीं भूल सकतीं। यह उनके करियर का दूसरा ही साल था जब 26/11 के मुंबई आतंकी हमले हुए। उस वक्त वह 'UTVi' में काम कर रही थीं। वह रात आज भी उनकी आंखों के सामने तैर जाती है।

एक सामान्य बिजनेस बुलेटिन खत्म ही हुआ था कि कोलाबा में गोलीबारी की खबर आई। उनकी टीम बहुत छोटी और युवा थी। बड़े चैनलों के पास बहुत संसाधन थे लेकिन आयशा की टीम के पास सिर्फ उनका जज्बा और समझ थी। उस वक्त पीसीआर (प्रोडक्शन कंट्रोल रूम) में बैठकर खबरों को मैनेज करना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं था। आयशा कहती हैं कि उस ऐतिहासिक संकट के समय वहां मौजूद होना उनके लिए गर्व की बात है।

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चार साल मुंबई में बिताने के बाद आयशा बेंगलुरु लौट आईं। यहां उन्होंने एडवरटाइजिंग की दुनिया में कदम रखा। पत्रकारिता ने उनकी देखने और सुनने की इंद्रियों को तेज कर दिया था। वे कहती हैं कि एक पत्रकार सिर्फ आंखों से नहीं देखता बल्कि वह माहौल को महसूस भी करता है। वहीं एडवरटाइजिंग ने उन्हें ग्राहकों के दिमाग को पढ़ना सिखाया। उन्हें समझ आया कि सिर्फ प्रोडक्ट बेचना ही सब कुछ नहीं है। यह समझना जरूरी है कि लोगों की सोच क्या है और उनकी जरूरतें क्या हैं।

इसके बाद आयशा ने 'द न्यू इंडियन एक्सप्रेस' के सप्लीमेंट 'इंडल्ज' के साथ करीब छह साल काम किया। इस दौरान उन्होंने कपिल देव से लेकर कमल हासन और सुनील शेट्टी जैसे सितारों के इंटरव्यू किए। इतने बड़े सितारों से मिलने के बाद आयशा ने एक बहुत सादगी भरी बात सीखी। वे कहती हैं कि पर्दे पर दिखने वाले ये लोग भी हमारे जैसे ही इंसान हैं। उनके भीतर भी वही असुरक्षा और संघर्ष होता है जो एक आम आदमी में होता है।

उन्होंने सुनील शेट्टी से जुड़ा एक किस्सा साझा किया। एक इंटरव्यू के दौरान जब शेड्यूल काफी व्यस्त था, तब सुनील शेट्टी ने खुद रुककर कहा कि पहले इन्हें अपने सवाल पूरे करने दो, हमारे पास समय है। इस छोटी सी घटना ने आयशा को सिखाया कि शोहरत बहुत कम समय के लिए होती है, लेकिन आपका व्यवहार और विनम्रता हमेशा याद रखी जाती है।

आज आयशा बेंगलुरु एयरपोर्ट पर कंटेंट लीड की भूमिका में हैं। यहां वे फिल्मों, रिपोर्ट्स, बड़े आयोजनों के कंटेंट और स्पीच राइटिंग का काम संभालती हैं। इसके साथ ही वे इंटरनल कम्युनिकेशन भी देखती हैं। उनकी यह भूमिका उनके पूरे अनुभव का निचोड़ है। इसमें न्यूज रूम वाली फुर्ती भी चाहिए और विज्ञापन वाली गहरी सोच भी।

आयशा का मानना है कि इंसान को कभी भी सीखना बंद नहीं करना चाहिए। वे कहती हैं कि जब तक हमें दफनाया नहीं जाता, तब तक सीखने की प्रक्रिया चलती रहती है। उन्होंने 2000 के दशक की शुरुआत में याहू पर अपनी पहली ईमेल आईडी बनाई थी और आज वे एआई (AI) के दौर में भी खुद को ढाल रही हैं। वे बदलाव से डरती नहीं हैं बल्कि उसे अपनाती हैं।

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एक मुस्लिम महिला होने के नाते आयशा प्रतिनिधित्व के सवाल पर भी बहुत स्पष्ट हैं। वे कहती हैं कि हमारे समुदाय में बहुत सी ऐसी लड़कियां हैं जिनमें गजब की काबिलियत है। लेकिन अक्सर परिवार का भरोसा न मिल पाने के कारण उनका आत्मविश्वास डगमगा जाता है। आयशा अपनी कामयाबी का श्रेय अपने माता-पिता और भाई को देती हैं। उनका कहना है कि उनके माता-पिता ने उन पर जो भरोसा जताया, उसी की वजह से वे आज इस मुकाम पर हैं।

जब आयशा से उनके करियर के सबसे बड़े पल के बारे में पूछा जाता है, तो वे किसी एक घटना का नाम नहीं लेतीं। उनके लिए एसिड अटैक सर्वाइवर की आवाज बनना भी उतना ही बड़ा था जितना कि किसी बड़े स्टार का इंटरव्यू करना। वे कहती हैं कि जिंदगी के हर पड़ाव का अपना मजा है। आयशा की यह कहानी हमें सिखाती है कि आप चाहे जिस भी प्लेटफार्म पर हों, अगर आपकी नीयत साफ है और आप लोगों से जुड़ना जानते हैं, तो सफलता खुद-ब-खुद आपके कदम चूमती है।