जामिया हमदर्द के VC प्रो. अफसार आलम आवाज से बोले: 'एआई' बेहतर फैसला लेने का जरिया, विकल्प नहीं

Story by  मलिक असगर हाशमी | Published by  [email protected] | Date 13-04-2026
Jamia Hamdard VC Prof. Afsar Alam told 'Awaz': 'AI' is a tool for better decision-making, not a substitute.
Jamia Hamdard VC Prof. Afsar Alam told 'Awaz': 'AI' is a tool for better decision-making, not a substitute.

 

आवाज द वाॅयस/ नई दिल्ली

जामिया हमदर्द विश्वविद्यालय आज न केवल भारत बल्कि दुनिया के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में अपनी जगह बना चुका है। हाल ही में विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर प्रोफेसर डॉक्टर एम. अफसार आलम ने 'आवाज द वॉयस' की संवाददाता अमीना माजिद से खास बातचीत की। इस चर्चा के दौरान उन्होंने विश्वविद्यालय की सफलता के राज, भविष्य की चुनौतियों और तकनीक के बढ़ते प्रभाव पर विस्तार से अपने विचार साझा किए।

प्रोफेसर आलम ने स्पष्ट किया कि किसी भी संस्थान की कामयाबी के पीछे सबसे बड़ा हाथ 'लीडरशिप' और 'रेगुलेशन' का होता है। उन्होंने कहा कि जामिया हमदर्द ने यूजीसी के नियमों को पूरी तरह अपनाया है और गवर्नेंस में पारदर्शिता लाए हैं।

f

रैंकिंग में लगातार सुधार और शोध पर जोर

जामिया हमदर्द ने हाल के वर्षों में अपनी रैंकिंग में जबरदस्त सुधार किया है। प्रो. आलम ने खुशी जताते हुए बताया कि ट्वेंटी ट्वेंटी सिक्स की क्यूएस (QS) रैंकिंग में फार्मेसी विषय में विश्वविद्यालय ने १५वीं रैंक हासिल की है। एनआईआरएफ (NIRF) रैंकिंग में भी फार्मेसी विभाग नंबर वन पर काबिज है। उन्होंने गर्व से कहा कि आज जामिया हमदर्द कई केंद्रीय विश्वविद्यालयों को पीछे छोड़ते हुए टॉप १०० की सूची में शामिल है।

विश्वविद्यालय की इस सफलता का श्रेय उन्होंने रिसर्च और क्वालिटी एजुकेशन में निवेश को दिया। प्रो. आलम ने बताया कि आज जामिया हमदर्द को डीएसटी (DST) फिस्ट की ओर से रिकॉर्ड फंडिंग मिल रही है। इसके साथ ही आईसीएमआर (ICMR) के कई बड़े प्रोजेक्ट्स यहां चल रहे हैं। भारत सरकार ने यहां यूनानी मेडिसिन के लिए 'सेंटर फॉर एक्सीलेंस' और टेलीकॉम सेक्टर में भी रिसर्च सेंटर की जिम्मेदारी सौंपी है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर विशेषज्ञों की राय

कंप्यूटर साइंस के शिक्षक होने के नाते प्रो. आलम ने एआई पर बहुत संजीदा और गहरी बात कही। हाल ही में मलेशिया में 'एआई एंड लॉ' पर हुई इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस से लौटे वाइस चांसलर ने कहा कि आज के दौर में एआई शिक्षा का अनिवार्य हिस्सा बन गया है। आप एआई को इंसान से पूरी तरह अलग नहीं कर सकते।

उन्होंने कहा, "एआई के एप्लीकेशंस का उपयोग बेहतर फैसले लेने के लिए किया जाना चाहिए, लेकिन इस पर पूरी तरह निर्भर होना गलत है। तकनीक को सकारात्मक कार्यों के लिए इस्तेमाल करें, नकारात्मकता के लिए नहीं।" इसी उद्देश्य से जामिया हमदर्द में एक 'इंटरडिसिप्लिनरी सेंटर फॉर एआई' भी बनाया गया है, जहां अलग-अलग विभाग मिलकर शोध कार्य कर रहे हैं।

केवल डिग्री नहीं, व्यक्तित्व विकास है प्राथमिकता

प्रो. आलम का मानना है कि केवल डिग्री हासिल कर लेना शिक्षा का असली मकसद नहीं है। छात्र का मानसिक और विजनरी विकास तभी हो सकता है जब वह एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटीज में हिस्सा ले। उन्होंने बताया कि जामिया हमदर्द में 'कल्चरल कारवां' का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें २४ अलग-अलग इवेंट्स हो रहे हैं। इसमें बैत-बाजी, नात कॉम्पिटिशन और सोलो म्यूजिक जैसे कार्यक्रम शामिल हैं।

विश्वविद्यालय ने हाल ही में अपने स्पोर्ट्स मीट को पूरा किया है। प्रो. आलम ने कहा, "हम चाहते हैं कि हमारे छात्र केवल किताबों तक सीमित न रहें। वे देश के एक जिम्मेदार और वफादार नागरिक बनें। इसीलिए हम स्पोर्ट्स, लिटरेरी और कल्चरल फेस्ट पर विशेष ध्यान देते हैं।"

पूरी बातचीत यहां देखें:-

रोजगार और इंडस्ट्री के साथ तालमेल

आज के दौर में सबसे बड़ी चुनौती 'एम्प्लॉयबिलिटी' यानी रोजगार पाने की योग्यता है। प्रो. आलम ने कहा कि जामिया हमदर्द वही कोर्स शुरू करता है जो इंडस्ट्री ओरिएंटेड होते हैं। विश्वविद्यालय ने हाल के दिनों में लॉ, फूड टेक्नोलॉजी, न्यूट्रिशन और कम्प्यूटेशनल मैथमेटिक्स जैसे कई नए और लोकप्रिय प्रोग्राम लॉन्च किए हैं।

इसके अलावा आर्ट्स के छात्रों के लिए इंटरनेशनल रिलेशन, पब्लिक पॉलिसी और फेडरल स्टडीज जैसे कोर्स शुरू किए गए हैं, ताकि उन्हें आसानी से नौकरी मिल सके। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय के पास सीएजी (CAG) ऑडिट की रिपोर्ट अपडेटेड है और संपत्ति या आयकर संबंधी कोई भी मसला पेंडिंग नहीं है। प्रशासन पूरी तरह पारदर्शी है।

d

ऑनलाइन एजुकेशन और भविष्य की योजनाएं

बदलते समय के साथ जामिया हमदर्द ने ऑनलाइन कोर्सेज में भी अपनी धाक जमाई है। यूजीसी की मंजूरी के साथ आज यहां करीब ढाई हजार छात्र एमबीए, एमसीए और बीसीए जैसे कोर्स ऑनलाइन माध्यम से कर रहे हैं। प्रो. आलम स्वयं इन प्रोग्राम्स की निगरानी करते हैं ताकि छात्रों के भविष्य के साथ कोई समझौता न हो।

बातचीत के अंत में उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय का विजन बहुत स्पष्ट है। वे न केवल अच्छे प्रोफेशनल तैयार करना चाहते हैं, बल्कि ऐसे नागरिक बनाना चाहते हैं जो देश के प्रति समर्पित हों। एनसीसी, एनएसएस और स्पोर्ट्स में जामिया हमदर्द की मौजूदगी इसका प्रमाण है। कश्मीर के छह जिलों के बच्चों को दिल्ली बुलाकर यहां के माहौल से रूबरू कराना भी इसी सामाजिक जिम्मेदारी का हिस्सा था।

प्रो. अफसार आलम के नेतृत्व में जामिया हमदर्द न केवल शिक्षा बल्कि सामाजिक जुड़ाव और तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में एक नया मील का पत्थर स्थापित कर रहा है। उनकी बातों से यह साफ है कि पारदर्शिता, गुणवत्ता और सही लीडरशिप ही किसी संस्थान को शिखर पर ले जाती है।