डिजिटल संप्रभुता की अवधारणा का हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है: अमेरिकी अधिकारी

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 30-06-2026
The concept of digital sovereignty is being weaponized: US official
The concept of digital sovereignty is being weaponized: US official

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली

 
अमेरिका के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि डिजिटल संप्रभुता और कृत्रिम मेधा (एआई) संप्रभुता की अवधारणा को खतरा है और विदेशों में कुछ राजनीतिक समूह अपने हितों के लिए इसका दुरुपयोग कर सकते हैं।
 
अमेरिकी अधिकारी ने साथ ही देशों से आग्रह किया कि वे पहले से मौजूद तकनीकों को दोबारा विकसित करने में अरबों डॉलर खर्च न करें।
 
अमेरिकी विदेश मंत्रालय में आर्थिक मामलों के अवर सचिव जैकब हेलबर्ग ने ‘‘यूएस-इंडिया स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप फोरम लीडरशिप समिट’’ को संबोधित करते हुए यह बात कही।
 
हेलबर्ग ने कहा,‘‘ मेरे विचार में संप्रभुता का मतलब वैश्विक नवाचार व्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदानकर्ता बनना है। यह नवाचार संप्रभुता है, न कि केवल यह कि क्या आपने पिछले साल की पूरी प्रौद्योगिकी प्रणाली को अपने देश में ही नियंत्रित किया।’’
 
उन्होंने कहा कि संप्रभुता का विचार बेहद आकर्षक है और लोगों को सशक्त महसूस कराता है।
 
लेकिन उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, ‘‘खतरा यह है कि विदेशों में कई राजनीतिक गुट इस अवधारणा का इस तरह इस्तेमाल कर रहे हैं कि जैसे संप्रभु बनने के लिए किसी देश को पूरी तकनीकी प्रणाली शुरू से अंत तक अपने देश में ही दोबारा बनानी होगी।’’
 
उन्होंने कहा कि यह मानना कि कोई देश तब तक संप्रभु नहीं हो सकता जब तक उसके पास अपनी पूरी एआई प्रौद्योगिकी प्रणाली न हो, ‘बेहद पिछड़ी सोच’ है और आर्थिक रूप से भी नुकसानदायक है।