होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ा तनाव: अमेरिका ने ईरानी पोत कब्जे में लिया, तेहरान ने दी कड़ी चेतावनी

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 20-04-2026
Tensions Escalate in Strait of Hormuz: US Seizes Iranian Vessel; Tehran Issues Stern Warning
Tensions Escalate in Strait of Hormuz: US Seizes Iranian Vessel; Tehran Issues Stern Warning

 

वॉशिंगटन

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। रविवार को अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास एक ईरानी ध्वज वाले मालवाहक पोत को रोककर अपने कब्जे में ले लिया। अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि यह पोत उनकी नौसैनिक नाकेबंदी से बचने की कोशिश कर रहा था। इस कार्रवाई के बाद ईरान की संयुक्त सैन्य कमान ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए इसे “समुद्री डकैती” और “युद्धविराम का उल्लंघन” बताया है।

पिछले सप्ताह ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नाकेबंदी लागू होने के बाद यह पहली बड़ी घटना है, जिसने क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा दिया है। खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण मार्ग है, अब एक बार फिर टकराव का केंद्र बन गया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए कहा कि ओमान की खाड़ी में तैनात अमेरिकी नौसेना के एक निर्देशित प्रक्षेपास्त्र विध्वंसक पोत ने “तुस्का” नाम के इस ईरानी पोत को कई बार रुकने की चेतावनी दी थी। जब पोत नहीं रुका, तो उसके इंजन कक्ष को निशाना बनाकर उसे वहीं रोक दिया गया। इसके बाद अमेरिकी मरीन ने पोत पर कब्जा कर लिया और उसकी जांच शुरू कर दी।

हालांकि, इस कार्रवाई में किसी के घायल होने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने केवल इतना कहा कि पोत को रोकने के लिए छह घंटे तक लगातार चेतावनी दी गई थी।

इस घटनाक्रम के बीच ईरान ने अमेरिका के साथ संभावित वार्ता पर भी सख्त रुख अपनाया है। ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, मौजूदा हालात में बातचीत की संभावना बेहद कम है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से फोन पर बात करते हुए अमेरिकी कार्रवाई को “दबाव की राजनीति” और “कूटनीतिक विश्वासघात” करार दिया।

वहीं, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी पाकिस्तान के अपने समकक्ष से बातचीत में अमेरिका के रवैये को “बुरी मंशा” और “गंभीरता की कमी” का संकेत बताया।इस बीच पाकिस्तान में संभावित अमेरिका-ईरान वार्ता की तैयारियां जारी हैं, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं और अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के अग्रिम दल के पहुंचने की खबर भी सामने आई है।

इस पूरे घटनाक्रम का असर वैश्विक बाजार पर भी देखने को मिला है। तेल की कीमतों में तेजी आई है और विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तनाव और बढ़ता है, तो दुनिया एक बड़े ऊर्जा संकट का सामना कर सकती है।मौजूदा हालात में यह कहना मुश्किल है कि युद्धविराम आगे जारी रहेगा या नहीं, लेकिन इतना तय है कि होर्मुज जलडमरूमध्य एक बार फिर वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था का केंद्र बन चुका है।