ईरान में सत्ता संतुलन बदला: IRGC के सख्त रुख वाले नेताओं का दबदबा, उदारवादी हाशिए पर

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 20-04-2026
Balance of Power Shifts in Iran: Hardline IRGC Leaders Dominate, Moderates Sidelined
Balance of Power Shifts in Iran: Hardline IRGC Leaders Dominate, Moderates Sidelined

 

तेहरान

ईरान की सत्ता संरचना में एक बड़ा बदलाव सामने आया है, जहां इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कट्टरपंथी नेताओं ने देश की सैन्य और कूटनीतिक रणनीति पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित कर लिया है। न्यूयॉर्क पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, क्षेत्रीय विश्लेषकों का मानना है कि इस बदलाव के चलते ईरान के भीतर मध्यमार्गी नेताओं को पीछे धकेल दिया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, IRGC कमांडर मेजर जनरल अहमद वाहिदी और उनके करीबी सहयोगियों ने देश की कमान संभाल ली है। इस सत्ता परिवर्तन के संकेत हाल के दिनों में होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ती समुद्री गतिविधियों और अमेरिका के साथ प्रस्तावित शांति वार्ता को दरकिनार करने के फैसले से साफ तौर पर दिखाई दे रहे हैं।

वॉशिंगटन स्थित इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर (ISW) ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इस घटनाक्रम से यह स्पष्ट होता है कि विदेश मंत्री अब्बास अराघची जैसे उदारवादी नेताओं की भूमिका सीमित कर दी गई है। अराघची ने ट्रंप प्रशासन के साथ बातचीत के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने का संकेत दिया था, लेकिन IRGC ने इस प्रस्ताव को खारिज करते हुए जलमार्ग को बंद रखने का फैसला किया, ताकि अमेरिकी प्रतिबंधों का जवाब दिया जा सके।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि वाहिदी को मोहम्मद बाघेर ज़ोलघदर का समर्थन प्राप्त हुआ है, जो IRGC के अनुभवी नेता और सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव हैं। इस गठजोड़ ने वाहिदी की स्थिति को और मजबूत किया है, खासकर उस समय जब हालिया संघर्षों में पारंपरिक नौसेना को भारी नुकसान हुआ है और अब ईरान की समुद्री शक्ति तेज़ हमलावर नौकाओं पर निर्भर हो गई है।

पिछले सप्ताहांत में तनाव तब और बढ़ गया जब ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की कोशिश कर रहे कम से कम तीन जहाजों को निशाना बनाया। इस कार्रवाई के कारण फारस की खाड़ी में सैकड़ों जहाज फंस गए हैं और यह स्पष्ट संदेश दिया गया है कि यह महत्वपूर्ण तेल मार्ग IRGC के कड़े नियंत्रण में है।

रिपोर्ट के अनुसार, वाहिदी और ज़ोलघदर की साझेदारी अब कूटनीतिक मोर्चे पर भी असर डाल रही है। ज़ोलघदर को हाल ही में ईरानी प्रतिनिधिमंडल में शामिल किया गया था, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वार्ताएं IRGC और सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई के निर्देशों के अनुरूप हों।

ISW के अनुसार, वार्ता दल के भीतर भी मतभेद उभरकर सामने आए हैं। बताया गया है कि ज़ोलघदर ने वरिष्ठ IRGC नेताओं को शिकायत भेजी थी कि अराघची ने बातचीत के दौरान अपने अधिकार से अधिक लचीलापन दिखाया, विशेषकर “एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस” को लेकर ईरान के समर्थन के मुद्दे पर।

इस आंतरिक असंतोष के बाद तेहरान में सख्त कार्रवाई की गई और वार्ता प्रतिनिधिमंडल को वापस बुला लिया गया। इस निर्णय में होसैन ताएब जैसे वरिष्ठ अधिकारियों की भी भूमिका रही, जो IRGC की खुफिया इकाई के पूर्व प्रमुख रह चुके हैं।

रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया है कि अहमद वाहिदी अब मोजतबा खामेनेई के साथ मिलकर मुख्य निर्णयकर्ता के रूप में उभरे हैं। मोजतबा खामेनेई हाल ही में हुए हवाई हमलों में घायल होने के बाद सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए हैं।

इस नई शक्ति संरचना में अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर ग़ालिबाफ जैसे नेताओं की भूमिका सीमित हो गई है। हालांकि वे पश्चिम विरोधी बयान देते रहे हैं, लेकिन मौजूदा सैन्य नेतृत्व की तुलना में उन्हें अपेक्षाकृत उदारवादी माना जाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलते सत्ता संतुलन के चलते पश्चिमी देशों के साथ किसी भी सार्थक बातचीत की संभावना काफी कमजोर हो गई है। फिलहाल यह भी स्पष्ट नहीं है कि युद्धविराम कितने समय तक कायम रहेगा, जिससे पूरे क्षेत्र की स्थिरता पर अनिश्चितता बनी हुई है।