आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सदस्यों ने बुधवार को गाजा में जारी युद्धविराम समझौते को स्थायी बनाने की पुरजोर मांग करते हुये वेस्ट बैंक में नियंत्रण बढ़ाने की इजराइल की कोशिशों की कड़ी आलोचना की और कहा कि इससे दो-राष्ट्र समाधान की संभावनाओं को गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।
सुरक्षा परिषद के सदस्यों का यह बयान अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्रस्तावित “बोर्ड ऑफ पीस” बैठक से ठीक एक दिन पहले आया है। इस बैठक में फलस्तीन के क्षेत्रों के भविष्य पर चर्चा की जानी है।
संयुक्त राष्ट्र की उच्चस्तरीय बैठक न्यूयॉर्क में बृहस्पतिवार को होने वाली थी, लेकिन जब ट्रंप ने उसी दिन बोर्ड की बैठक की घोषणा कर दी, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि दोनों बैठकों में शामिल होने की योजना बना रहे राजनयिकों की यात्रा प्रभावित हो सकती है, तो सुरक्षा परिषद की बैठक एक दिन पहले आयोजित कर दी गयी।
यह स्थिति इस बात का संकेत है कि संयुक्त राष्ट्र की सबसे शक्तिशाली संस्था और ट्रंप की नई पहल के बीच एजेंडे के टकराव और समानांतर प्रयासों की संभावना है। वैश्विक संघर्षों में मध्यस्थता करने की इस नई पहल की व्यापक महत्वाकांक्षाओं को लेकर कुछ देशों में चिंता है कि कहीं यह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की भूमिका को चुनौती देने या उसके समकक्ष बनने की कोशिश न करे।
संयुक्त राष्ट्र की 15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद में शामिल पाकिस्तान एकमात्र ऐसा सदस्य है जिसने ‘बोर्ड आफ पीस’ की बैठक में शामिल होने का न्यौता स्वीकार किया है।