पीओके में विरोध प्रदर्शन तेज, हालात तनावपूर्ण, 28 मौतों का दावा

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 15-07-2026
Protests intensify in PoK; situation tense; 28 deaths reported.
Protests intensify in PoK; situation tense; 28 deaths reported.

 

नई दिल्ली/मुजफ्फराबाद

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में सुरक्षा स्थिति लगातार तनावपूर्ण बनी हुई है। जम्मू कश्मीर अवामी एक्शन कमेटी (JKAAC) द्वारा 15 जुलाई को प्रस्तावित बड़े विरोध मार्च से पहले विभिन्न जिलों में प्रदर्शन तेज हो गए हैं। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, 14 जुलाई को पीओके के अलग-अलग हिस्सों में कम से कम आठ बड़े विरोध प्रदर्शन आयोजित किए गए, जिनके कारण कई इलाकों में सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ।

रिपोर्टों के मुताबिक, सुधनोती और मथियाल मेरा क्षेत्रों में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच ताजा झड़पें हुईं। इन घटनाओं में नौ लोगों की मौत होने का दावा किया गया है। मृतकों में एक पाकिस्तान रेंजर्स का जवान भी शामिल बताया जा रहा है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

स्थानीय स्रोतों के अनुसार, यदि 5 जून से अब तक की घटनाओं को जोड़ा जाए तो हिंसा में कुल 28 लोगों की मौत होने का दावा किया जा रहा है। इनमें 23 नागरिक और पांच सुरक्षा कर्मी शामिल बताए गए हैं। हालांकि पाकिस्तान सरकार की ओर से इन आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

जम्मू कश्मीर अवामी एक्शन कमेटी ने आरोप लगाया है कि आंदोलन को दबाने के लिए सुरक्षा एजेंसियों द्वारा व्यापक कार्रवाई की जा रही है। संगठन का कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों के खिलाफ बल प्रयोग किया जा रहा है, जिससे क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है। दूसरी ओर, सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने और सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

विरोध प्रदर्शनों का असर आम लोगों के दैनिक जीवन पर भी साफ दिखाई दे रहा है। कई शहरों और कस्बों में बाजार बंद रहे, शैक्षणिक संस्थानों का कामकाज प्रभावित हुआ और अनेक प्रमुख सड़कों पर धरना प्रदर्शन तथा अवरोध लगाए गए। इससे यातायात बाधित हुआ और लोगों को आवागमन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि कुछ इलाकों में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित होने लगी है। स्थानीय लोगों ने खाद्य सामग्री, दवाइयों और अन्य जरूरी सामान की उपलब्धता को लेकर चिंता व्यक्त की है। हालांकि इन दावों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

इस बीच जम्मू कश्मीर अवामी एक्शन कमेटी ने पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी से हस्तक्षेप की अपील की है। संगठन ने उनसे मांग की है कि वे कथित दमनात्मक कार्रवाई को रोकने और मौजूदा स्थिति के शांतिपूर्ण समाधान के लिए अपनी भूमिका निभाएं। समिति का कहना है कि संवाद और राजनीतिक पहल के जरिए ही हालात सामान्य बनाए जा सकते हैं।

सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। विभिन्न प्लेटफॉर्म पर बड़ी संख्या में लोग मौजूदा हालात पर चिंता व्यक्त कर रहे हैं। कई पोस्टों में मुख्यधारा के राजनीतिक दलों और नेताओं की आलोचना की जा रही है, जबकि कुछ उपयोगकर्ता आंदोलन के समर्थन में भी अपनी राय व्यक्त कर रहे हैं। हालांकि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दावों और संदेशों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

विश्लेषकों का मानना है कि यदि प्रस्तावित विरोध मार्च के दौरान तनाव और बढ़ता है तो क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति और जटिल हो सकती है। ऐसे में प्रशासन और आंदोलनकारी संगठनों के बीच संवाद की आवश्यकता पहले से अधिक महसूस की जा रही है।

फिलहाल पीओके में सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है और संवेदनशील इलाकों में निगरानी तेज कर दी गई है। स्थानीय प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए है। दूसरी ओर, प्रदर्शनकारी अपने आंदोलन को जारी रखने की बात कह रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दोनों पक्ष बातचीत का रास्ता अपनाते हैं या क्षेत्र में तनाव और गहराता है।