High alert in Kuwait and Bahrain following Iran's attack; tensions escalate.
तेहरान
पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच क्षेत्र की स्थिति और गंभीर हो गई है। कतर स्थित समाचार चैनल अल जज़ीरा की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने कुवैत और बहरीन की दिशा में मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जिसके बाद दोनों देशों में सायरन बजने लगे और सुरक्षा एजेंसियों ने हाई अलर्ट घोषित कर दिया। हालांकि, इन हमलों के नुकसान और प्रभाव की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है।
रिपोर्ट के अनुसार, हमलों के बाद कुवैत और बहरीन की वायु रक्षा प्रणालियों को तुरंत सक्रिय कर दिया गया। दोनों देशों की सुरक्षा एजेंसियों ने संभावित खतरों से निपटने के लिए आपातकालीन प्रोटोकॉल लागू किए। इस घटनाक्रम ने पूरे खाड़ी क्षेत्र में चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि हाल के दिनों में ईरान और अमेरिका के बीच सैन्य कार्रवाई लगातार तेज होती जा रही है।
कुवैत की सेना ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि देश की सुरक्षा एजेंसियों ने ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमलों से निपटने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए हैं। सेना ने नागरिकों से अपील की कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल सरकारी एजेंसियों द्वारा जारी सुरक्षा निर्देशों का पालन करें। साथ ही लोगों से सतर्क रहने और आपात स्थिति में प्रशासन का सहयोग करने का आग्रह किया गया।
उधर, बहरीन के गृह मंत्रालय ने भी नागरिकों के लिए सुरक्षा सलाह जारी की। मंत्रालय ने लोगों से शांत रहने, घबराहट से बचने और आवश्यकता पड़ने पर निकटतम सुरक्षित स्थान या शरणस्थल में जाने की अपील की। राजधानी मनामा सहित कई क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी बढ़ा दी गई है।
इस घटनाक्रम से पहले अमेरिका ने ईरान के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण किश और क़ेश्म द्वीपों पर नए हवाई हमले किए थे। ईरानी मीडिया के हवाले से आई रिपोर्टों के अनुसार, पिछले तीन दिनों में अमेरिकी सेना ने इन दोनों द्वीपों को कई बार निशाना बनाया है। हालांकि, ईरान ने ताजा हमलों में किसी बड़े नुकसान की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
क़ेश्म द्वीप को ईरान की सामरिक सुरक्षा का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। यह होर्मुज जलडमरूमध्य के निकट स्थित सबसे बड़ा ईरानी द्वीप है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इस क्षेत्र के जरिए ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य की गतिविधियों पर नजर रखता है। माना जाता है कि यहां सैन्य उपकरण, मिसाइलें और अन्य रणनीतिक संसाधन भी मौजूद हैं। यही वजह है कि यह इलाका लंबे समय से अमेरिका की सैन्य निगरानी और अभियानों का केंद्र बना हुआ है।
इस बीच, इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी ईरान को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि यदि ईरान ने इज़रायल को निशाना बनाया तो जवाब पहले के किसी भी संघर्ष से कहीं अधिक सख्त और व्यापक होगा। दक्षिणी इज़रायल के दिमोना शहर में आयोजित एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए नेतन्याहू ने कहा कि अब वह समय बीत चुका है जब इज़रायल केवल सीमित जवाब देता था। उनके अनुसार, किसी भी हमले का जवाब पूरी ताकत के साथ दिया जाएगा।
पश्चिम एशिया में तनाव की शुरुआत इस वर्ष फरवरी के अंत में अमेरिका और इज़रायल द्वारा ईरान के खिलाफ की गई सैन्य कार्रवाई के बाद हुई थी। पिछले सप्ताह से हालात एक बार फिर तेजी से बिगड़े हैं। हालांकि अब तक इज़रायल और ईरान के बीच प्रत्यक्ष सैन्य टकराव की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन दोनों देशों के नेताओं के तीखे बयान और बढ़ती सैन्य गतिविधियां क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ा रही हैं।
रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका के हालिया हमलों के जवाब में ईरान ने फारस की खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और अन्य रणनीतिक प्रतिष्ठानों को भी निशाना बनाने का दावा किया है। वहीं अमेरिका लगातार ईरान के सैन्य और नौसैनिक ठिकानों पर कार्रवाई कर रहा है। दोनों देशों के बीच जारी यह जवाबी कार्रवाई पूरे क्षेत्र की सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह सैन्य टकराव और बढ़ता है तो इसका असर केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा। होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर दुनिया के बड़े हिस्से में कच्चे तेल की आपूर्ति होती है। ऐसे में इस क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों, समुद्री व्यापार, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और विश्व अर्थव्यवस्था पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। इसी कारण अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार सभी पक्षों से संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान तलाशने की अपील कर रहा है।