Pakistan’s judiciary questioned as Baloch Yakjehti Committee lawyers challenge Gulzadi Baloch’s life sentence
बलूचिस्तान [पाकिस्तान]
बलूच यकजेहती कमेटी (BYC) के नेताओं का प्रतिनिधित्व करने वाली कानूनी टीम ने गुलज़ादी बलूच की उम्रकैद की सज़ा की समीक्षा की मांग की है। उनका आरोप है कि सुनवाई के दौरान निष्पक्ष ट्रायल के ज़रूरी नियमों का पालन नहीं किया गया। वकीलों ने क्वेटा में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ये आरोप लगाए और प्रक्रिया के पालन, पारदर्शिता और न्यायपालिका पर दबाव के दावों पर सवाल उठाए, जैसा कि 'द बलूचिस्तान पोस्ट' ने रिपोर्ट किया है। 'द बलूचिस्तान पोस्ट' के अनुसार, गुलज़ादी बलूच की कानूनी टीम के वकील शोएब मेंगल ने कहा कि केस के रिकॉर्ड से पता चलता है कि जिस मामले में उन्हें बाद में दोषी ठहराया गया, उसमें शुरू में उन्हें आरोपी नहीं बनाया गया था।
वकीलों ने तर्क दिया कि उनकी सज़ा से जुड़े हालात की विस्तृत न्यायिक जांच और कार्यवाही की स्वतंत्र समीक्षा की ज़रूरत है। गुलज़ादी बलूच को सितंबर में एडिशनल सेशन जज-I सैयद कादिर शाह बुखारी ने अक्टूबर 2022 में मच पुलिस स्टेशन में दर्ज हत्या के एक मामले में उम्रकैद की सज़ा सुनाई थी। उनकी बचाव पक्ष की टीम ने आरोप लगाया है कि फ़ैसले से पहले पाकिस्तान की आपराधिक प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 342 के तहत उनका बयान दर्ज नहीं किया गया था और बचाव पक्ष को अपनी अंतिम दलीलें पेश करने की अनुमति नहीं दी गई थी।
BYC ने पिछली सुनवाइयों के बारे में भी चिंता जताई थी और आरोप लगाया था कि 7 सितंबर को अभियोजन पक्ष के गवाह से जिरह (cross-examination) के समय गुलज़ादी के बचाव पक्ष के वकील मौजूद नहीं थे। संगठन ने यह भी दावा किया कि जज ने बार-बार दबाव में होने का ज़िक्र किया था और उम्रकैद या मौत की सज़ा देने की संभावना के बारे में बात की थी। 'द बलूचिस्तान पोस्ट' के अनुसार, ये दावे BYC और उसके कानूनी प्रतिनिधियों के आरोप ही हैं। जून में, क्वेटा की एक आतंकवाद-रोधी अदालत ने BYC की मुख्य आयोजक महरंग बलूच और केंद्रीय नेता सिबगतुल्लाह शाहजी को एक अलग मामले में उम्रकैद की सज़ा सुनाई थी। 'द बलूचिस्तान पोस्ट' की रिपोर्ट के मुताबिक, उनके वकीलों ने उस कार्यवाही का बहिष्कार किया था और इसे "चेहरा-विहीन ट्रायल" (faceless trial) बताया था।