काबुल
Afghanistan में सोमवार को 4.4 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया, जिससे क्षेत्र में एक बार फिर भूकंपीय गतिविधियों को लेकर चिंता बढ़ गई है। भारत के National Center for Seismology (NCS) के अनुसार यह भूकंप भारतीय समयानुसार सुबह 3 बजकर 24 मिनट पर आया। भूकंप की गहराई लगभग 95 किलोमीटर बताई गई है, जिससे यह मध्यम गहराई वाला झटका माना जा रहा है।
भूकंप के केंद्र का स्थान 36.109 उत्तरी अक्षांश और 68.738 पूर्वी देशांतर पर दर्ज किया गया। हालांकि इस भूकंप से किसी बड़े नुकसान की तत्काल खबर नहीं मिली है, लेकिन क्षेत्र में लगातार आ रहे झटकों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
इससे पहले 22 अप्रैल को भी अफगानिस्तान में 4.0 तीव्रता का एक और भूकंप आया था, जिसकी गहराई मात्र 10 किलोमीटर थी। विशेषज्ञों के अनुसार, कम गहराई वाले भूकंप ज्यादा खतरनाक होते हैं क्योंकि उनकी तरंगें सतह तक जल्दी पहुंचती हैं और अधिक तीव्र झटके पैदा करती हैं। ऐसे भूकंपों में इमारतों को नुकसान और जान-माल का खतरा अधिक होता है।
वैज्ञानिकों के अनुसार, पृथ्वी की सतह से लेकर लगभग 700 किलोमीटर की गहराई तक भूकंप आ सकते हैं। इस गहराई को तीन भागों में बांटा जाता है—0 से 70 किलोमीटर तक के भूकंप “उथले” (शैलो), 70 से 300 किलोमीटर तक “मध्यवर्ती” और 300 से 700 किलोमीटर तक “गहरे” भूकंप कहलाते हैं। 70 किलोमीटर से अधिक गहराई वाले भूकंपों को आमतौर पर “डीप फोकस” भूकंप भी कहा जाता है।
अफगानिस्तान में भूकंप आना कोई नई बात नहीं है। खासकर Hindu Kush क्षेत्र में अक्सर भूकंपीय गतिविधियां देखने को मिलती हैं। यह इलाका एक सक्रिय भूकंपीय ज़ोन में आता है, जहां भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों के बीच टकराव होता रहता है। यही टकराव इस क्षेत्र में बार-बार भूकंप आने का प्रमुख कारण है।
इसके अलावा, देश के कई हिस्सों से होकर गुजरने वाली प्रमुख फॉल्ट लाइन्स भी भूकंप की संवेदनशीलता को बढ़ाती हैं। विशेष रूप से हेरात जैसे क्षेत्रों में यह खतरा अधिक देखा जाता है।
United Nations Office for the Coordination of Humanitarian Affairs के अनुसार अफगानिस्तान पहले से ही प्राकृतिक आपदाओं के प्रति बेहद संवेदनशील देश है। यहां भूकंप के अलावा भूस्खलन और मौसमी बाढ़ जैसी आपदाएं भी आम हैं। लंबे समय से जारी संघर्ष और सीमित विकास के कारण यहां के समुदाय पहले ही कमजोर स्थिति में हैं, जिससे बार-बार आने वाली आपदाओं का असर और गंभीर हो जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार आ रहे भूकंप इस बात का संकेत हैं कि क्षेत्र में भूकंपीय गतिविधि सक्रिय बनी हुई है। ऐसे में प्रशासन और स्थानीय लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। आपदा प्रबंधन की तैयारियों को मजबूत करना और लोगों को जागरूक करना बेहद जरूरी है, ताकि किसी बड़े भूकंप की स्थिति में नुकसान को कम किया जा सके।
कुल मिलाकर, अफगानिस्तान में आया यह भूकंप भले ही मध्यम तीव्रता का रहा हो, लेकिन यह क्षेत्र की भूकंपीय अस्थिरता और वहां के लोगों की संवेदनशील स्थिति को एक बार फिर उजागर करता है।