वॉशिंगटन डीसी
व्हाइट हाउस कॉरेस्पोंडेंट्स डिनर के दौरान हुई गोलीबारी ने अमेरिकी सुरक्षा व्यवस्था और राजनीतिक माहौल को झकझोर कर रख दिया है। अधिकारियों के अनुसार, इस हमले का मुख्य निशाना अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके प्रशासन के वरिष्ठ सदस्य थे।
घटना शनिवार शाम उस समय हुई जब सैकड़ों पत्रकार, सरकारी अधिकारी और राष्ट्रपति ट्रंप कार्यक्रम में शामिल थे। गोलीबारी होटल के बाहर उस स्थान के पास हुई जहां डिनर आयोजित किया जा रहा था। मौके पर तैनात सीक्रेट सर्विस एजेंट्स ने तुरंत कार्रवाई करते हुए हमलावर को काबू कर लिया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया।
अमेरिकी कार्यवाहक अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लांश के अनुसार, संदिग्ध व्यक्ति कैलिफोर्निया से ट्रेन के जरिए शिकागो होते हुए वॉशिंगटन डीसी पहुंचा था। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि हमलावर ने सुनियोजित तरीके से इस हमले को अंजाम देने की योजना बनाई थी। उसके पास दो हथियार थे, जिन्हें उसने पिछले कुछ वर्षों में खरीदा था।
हालांकि अधिकारियों ने अभी तक आधिकारिक रूप से हमलावर की पहचान उजागर नहीं की है, लेकिन कई अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उसका नाम कोल टोमस एलेन बताया जा रहा है, जो कैलिफोर्निया के टोरेंस का निवासी है। बताया जा रहा है कि वह एक शिक्षित व्यक्ति था और कंप्यूटर साइंस तथा मैकेनिकल इंजीनियरिंग में कई डिग्रियां रखता था।
राष्ट्रपति ट्रंप ने इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि संदिग्ध ने एक “एंटी-क्रिश्चियन घोषणापत्र” लिखा था और वह मानसिक रूप से अस्थिर व्यक्ति प्रतीत होता है। ट्रंप ने यह भी बताया कि हमलावर के परिवार ने पहले ही स्थानीय पुलिस को उसकी गतिविधियों को लेकर चिंता जताई थी।
इस हमले में एक सीक्रेट सर्विस अधिकारी घायल हुआ, जिसे गोली लगी, लेकिन उसकी हालत अब स्थिर बताई जा रही है। हमलावर को बिना चोट के हिरासत में ले लिया गया और उसे मेडिकल जांच के लिए अस्पताल भेजा गया। फिलहाल वह जांच एजेंसियों के साथ सहयोग नहीं कर रहा है और उस पर कई गंभीर आरोप लगाए जाने की संभावना है।
घटना के बाद पूरे इलाके में भारी सुरक्षा बल तैनात कर दिया गया। नेशनल गार्ड और अन्य एजेंसियों ने तुरंत मोर्चा संभाला, जबकि हेलीकॉप्टर लगातार इलाके की निगरानी करते रहे।
इस घटना के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने व्हाइट हाउस परिसर में एक सुरक्षित और बड़ा बॉलरूम बनाने की अपनी योजना को फिर से आगे बढ़ाने की बात कही। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं बताती हैं कि देश के शीर्ष नेतृत्व के लिए और अधिक सुरक्षित स्थान की आवश्यकता है।
गौरतलब है कि ट्रंप पहले भी अपने ऊपर हमले की आशंका जता चुके हैं और इसे पिछले दो वर्षों में तीसरी बड़ी सुरक्षा चुनौती बताया जा रहा है। हालांकि इस बार उन्होंने अपेक्षाकृत शांत प्रतिक्रिया देते हुए देश में एकता और राजनीतिक सहयोग की अपील की।
यह घटना अमेरिका में सुरक्षा, राजनीतिक ध्रुवीकरण और चरमपंथी विचारधाराओं के बढ़ते खतरे की ओर भी इशारा करती है, जिस पर अब व्यापक बहस शुरू हो गई है।