ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची मॉस्को रवाना, कूटनीतिक हलचल तेज

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 27-04-2026
Iranian Foreign Minister Abbas Araqchi Departs for Moscow; Diplomatic Activity Intensifies
Iranian Foreign Minister Abbas Araqchi Departs for Moscow; Diplomatic Activity Intensifies

 

माॅस्को

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी कूटनीतिक प्रयासों के बीच पाकिस्तान से आगे की वार्ताओं के लिए रूस रवाना हो गए हैं। ईरानी विदेश मंत्रालय के अनुसार, अराघची रविवार को इस्लामाबाद से मॉस्को के लिए रवाना हुए, जहां वे आगे की रणनीतिक बातचीत में हिस्सा लेंगे।

पिछले कुछ दिनों से अब्बास अराघची लगातार एक राजधानी से दूसरी राजधानी का दौरा कर रहे हैं। इस तेज़ कूटनीतिक गतिविधि के पीछे मुख्य उद्देश्य ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव को कम करना और संभावित शांति वार्ता को बनाए रखना है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई मध्यस्थ देश इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में लगे हुए हैं।

अराघची ने पाकिस्तान का दो दिवसीय दौरा पूरा करने के बाद शनिवार को ओमान का रुख किया था। वहां उन्होंने ओमानी नेतृत्व के साथ महत्वपूर्ण बैठकें कीं, जिनमें क्षेत्रीय शांति और वार्ता प्रक्रिया को लेकर चर्चा हुई। इसके बाद वे रविवार शाम को फिर पाकिस्तान लौटे और वहीं से रात में मॉस्को के लिए रवाना हो गए।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने वार्ता के दूसरे दौर के लिए अपने प्रतिनिधि पाकिस्तान नहीं भेजे, लेकिन इसके बावजूद पाकिस्तान इस पूरे मामले में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। पाकिस्तानी अधिकारियों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच अप्रत्यक्ष बातचीत अब भी जारी है और संवाद के रास्ते पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं।

इस बीच यह भी जानकारी सामने आई है कि ईरान ने पाकिस्तान के माध्यम से अमेरिका को कुछ “लिखित संदेश” भेजे हैं। इन संदेशों में ईरान की कुछ महत्वपूर्ण शर्तें और “रेड लाइन्स” शामिल हैं, जिनमें उसका परमाणु कार्यक्रम और होरमुज़ जलडमरूमध्य से जुड़ी नीतियां प्रमुख हैं। हालांकि, इन संदेशों को औपचारिक वार्ता का हिस्सा नहीं माना जा रहा है, बल्कि इन्हें कूटनीतिक संवाद बनाए रखने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

हालांकि 8 अप्रैल से शुरू हुए अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष में फिलहाल युद्धविराम बना हुआ है, लेकिन इसके आर्थिक प्रभाव पूरी दुनिया में महसूस किए जा रहे हैं। ईरान द्वारा होरमुज़ जलडमरूमध्य को बंद करने के कारण वैश्विक बाजार में तेल, प्राकृतिक गैस और उर्वरकों की आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है। इसके चलते कीमतों में भारी वृद्धि हुई है और विकासशील देशों में खाद्य संकट और भूख बढ़ने की आशंका भी गहरा गई है।

शनिवार को वार्ता के नए दौर की उम्मीद तब जगी थी, जब अमेरिकी वार्ताकार स्टीव विटकॉफ और जेरड कुशनर के इस्लामाबाद आने की संभावना थी। हालांकि, बाद में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह दौरा रद्द कर दिया। ट्रंप ने कहा कि “बेमतलब की बातचीत के लिए बैठने का कोई फायदा नहीं है।”

रविवार को ट्रंप ने और स्पष्ट करते हुए कहा कि अमेरिका के पास सभी विकल्प मौजूद हैं और अगर ईरान बातचीत करना चाहता है, तो उसे खुद पहल करनी होगी। उन्होंने कहा कि “अगर वे बात करना चाहते हैं, तो वे हमारे पास आएं या हमें कॉल करें, हमारे पास सुरक्षित संचार व्यवस्था है।”

अमेरिका में भी इस मुद्दे को लेकर घरेलू दबाव बढ़ता जा रहा है। ईरान द्वारा होरमुज़ जलडमरूमध्य को बंद करने से पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है, जिससे आम जनता पर असर पड़ा है। इसके अलावा, नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों के चलते ट्रंप प्रशासन पर राजनीतिक दबाव भी बढ़ रहा है।

कुल मिलाकर, अब्बास अराघची का यह दौरा केवल एक राजनयिक यात्रा नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति में बदलते समीकरणों और बढ़ते तनाव के बीच शांति की संभावनाओं को तलाशने की एक महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है।