दुबई
ईरान में इजराइल की खुफिया एजेंसी मोसाद से कथित संबंधों और सरकार विरोधी प्रदर्शनों में शामिल होने के आरोप में एक व्यक्ति को शनिवार को फांसी दे दी गई। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह कार्रवाई देश में हाल के वर्षों में सुरक्षा और राजनीतिक मामलों को लेकर हो रही कठोर दंडात्मक कार्रवाइयों की एक और कड़ी है।
फांसी दिए गए व्यक्ति की पहचान इरफान कियानी के रूप में की गई है। ईरानी न्यायपालिका से जुड़ी मिजान समाचार एजेंसी ने जानकारी दी कि कियानी को जनवरी में इस्फहान शहर में सुरक्षा बलों पर कथित हमले सहित कई गंभीर आरोपों में दोषी ठहराया गया था। एजेंसी ने दावा किया कि वह मोसाद के लिए “मिशन पर” काम कर रहा था, हालांकि इस दावे के समर्थन में कोई ठोस सार्वजनिक सबूत प्रस्तुत नहीं किया गया।
रिपोर्टों के अनुसार, कियानी पर सरकार विरोधी प्रदर्शनों में भाग लेने और सुरक्षा व्यवस्था को अस्थिर करने जैसी गतिविधियों में शामिल होने का भी आरोप था। यह प्रदर्शन जनवरी में हुए थे, जिनके बाद ईरान में बड़े पैमाने पर गिरफ्तारी और कड़ी कार्रवाई देखने को मिली थी।
ईरान में हाल के वर्षों में राजनीतिक तनाव और आंतरिक विरोध प्रदर्शनों के बीच कई मामलों में लोगों को मौत की सजा दी गई है। विशेष रूप से सरकार द्वारा कथित जासूसी, विदेशी खुफिया एजेंसियों से संपर्क और विरोध प्रदर्शनों में भागीदारी जैसे आरोपों के तहत कार्रवाई तेज हुई है। इन मामलों में कई बार अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने चिंता जताई है।
मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि ईरान में कई मुकदमे बंद दरवाजों के पीछे चलाए जाते हैं, जहाँ आरोपियों को निष्पक्ष सुनवाई का पूरा अवसर नहीं मिलता। उनका यह भी आरोप है कि कई मामलों में स्वीकारोक्ति दबाव में ली जाती है और सबूतों की पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं।
हालिया घटनाक्रमों में केवल कथित जासूस ही नहीं, बल्कि प्रदर्शनकारियों और ईरान के निर्वासित विपक्षी समूहों से जुड़े लोगों को भी मौत की सजा दिए जाने की खबरें सामने आई हैं। इससे देश की न्यायिक प्रक्रिया और मानवाधिकार स्थिति को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस और आलोचना बढ़ी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान में आंतरिक असंतोष और बाहरी सुरक्षा खतरों को लेकर सरकार की सख्त नीति के चलते इस तरह की कार्रवाइयाँ लगातार जारी हैं। हालांकि, सरकार का दावा है कि ये फैसले राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक हैं।
इस घटना ने एक बार फिर ईरान की न्यायिक प्रणाली और मानवाधिकार रिकॉर्ड पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय पहले भी कई बार ईरान से निष्पक्ष सुनवाई और पारदर्शी न्यायिक प्रक्रिया सुनिश्चित करने की अपील कर चुका है।
फिलहाल इस मामले पर ईरानी सरकार की ओर से अतिरिक्त कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन देश में इस तरह की कार्रवाइयाँ आने वाले समय में भी जारी रहने की आशंका जताई जा रही है।