नई दिल्ली:
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने अमेरिका और ईरान के बीच हुए नए समझौते का स्वागत करते हुए इसे स्थायी शांति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। मैक्रों ने कहा कि यह समझौता न केवल क्षेत्रीय तनाव को कम करने में मदद करेगा, बल्कि रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने का रास्ता भी तैयार करेगा।
मैक्रों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए बताया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस के वर्साय पैलेस में आयोजित एक रात्रिभोज के दौरान अमेरिका-ईरान समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस समझौते से वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता आएगी और तेल व गैस की कीमतों में गिरावट देखने को मिल सकती है।
मैक्रों ने अपने संदेश में कहा, “राष्ट्रपति ट्रंप ने आज रात वर्साय में अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता स्थायी शांति का मार्ग प्रशस्त करता है और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की अनुमति देता है। यह सही दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे जल्द ही ऊर्जा की कीमतों में कमी आने की संभावना है।”
व्हाइट हाउस ने भी इस अवसर का एक वीडियो साझा किया, जिसमें राष्ट्रपति ट्रंप मैक्रों की मौजूदगी में दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर करते दिखाई दे रहे हैं। व्हाइट हाउस ने इसे दोनों देशों के बीच संबंधों में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धि बताया।
रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने वर्चुअल माध्यम से इस 14-सूत्रीय समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। समझौते का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच शत्रुता समाप्त करना, होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना और अगले 60 दिनों के भीतर एक व्यापक अंतिम समझौते की दिशा में बातचीत शुरू करना है।
अमेरिकी प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, यह समझौता तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। इसके तहत होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही ईरान के संवर्धित यूरेनियम भंडार से जुड़े मुद्दों के समाधान और आर्थिक प्रतिबंधों में चरणबद्ध राहत देने का भी प्रावधान शामिल है।
ईरान के सरकारी मीडिया प्रेस टीवी के अनुसार, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने पुष्टि की है कि ओमान और अन्य देशों की मध्यस्थता से हुई बातचीत के बाद दोनों पक्षों ने इस समझौते को अंतिम रूप दिया और हस्ताक्षर किए।
14 बिंदुओं वाले इस समझौते में तत्काल सैन्य कार्रवाई रोकने, लेबनान सहित क्षेत्रीय तनाव कम करने, अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने, ईरान की जमी हुई संपत्तियों को चरणबद्ध तरीके से मुक्त करने और ईरान के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर के अमेरिकी समर्थित आर्थिक विकास कार्यक्रम का भी उल्लेख है।
इसके अलावा, ईरान ने एक बार फिर आश्वासन दिया है कि वह परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा और न ही उन्हें हासिल करने का प्रयास करेगा। समझौते में यह भी कहा गया है कि संवर्धित यूरेनियम के भंडार से जुड़े भविष्य के सभी मुद्दों पर अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की निगरानी में चर्चा की जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समझौता सफलतापूर्वक लागू होता है, तो यह न केवल पश्चिम एशिया में स्थिरता लाने में मदद करेगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए भी सकारात्मक साबित हो सकता है।