विदेश मंत्री जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर अपनी मुलाकात की जानकारी साझा करते हुए लिखा कि वे इजरायली समकक्ष और उनकी टीम से मिलकर “प्रसन्न” हैं तथा दोनों देशों के बीच सहयोग और क्षेत्रीय विकास पर सार्थक चर्चा हुई। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब प्रधानमंत्री Narendra Modi दो दिवसीय आधिकारिक दौरे पर इजरायल में हैं।
इस दौरे के दौरान एक महत्वपूर्ण क्षण तब आया जब इजरायली संसद Knesset ने प्रधानमंत्री मोदी को “स्पीकर ऑफ द क्नेस्सेट मेडल” से सम्मानित किया। यह क्नेस्सेट का सर्वोच्च सम्मान है, जो भारत-इजरायल रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने में उनके “व्यक्तिगत नेतृत्व और असाधारण योगदान” के लिए प्रदान किया गया। सम्मान प्रधानमंत्री के संसद में दिए गए संबोधन के बाद प्रदान किया गया।
अपने भाषण में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत में इजरायल के साहस, दृढ़ संकल्प और उपलब्धियों के प्रति गहरी प्रशंसा है। उन्होंने दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि आधुनिक राष्ट्र-राज्यों के रूप में औपचारिक संबंध स्थापित होने से बहुत पहले ही भारत और यहूदी समुदाय के बीच दो हजार वर्षों से अधिक पुराना संबंध रहा है। उन्होंने ‘बुक ऑफ एस्थर’ में भारत के ‘होदु’ उल्लेख और प्राचीन काल में व्यापारिक संबंधों का जिक्र किया।
प्रधानमंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि यहूदी समुदाय ने भारत में बिना किसी उत्पीड़न या भेदभाव के सदियों तक सम्मानपूर्वक जीवन बिताया और भारतीय समाज का अभिन्न हिस्सा बना रहा। उनके संबोधन को क्नेस्सेट में खड़े होकर अभिवादन (स्टैंडिंग ओवेशन) मिला और सांसदों ने जोरदार तालियों से स्वागत किया। भाषण के बाद कई सांसदों ने प्रधानमंत्री के साथ तस्वीरें भी खिंचवाईं।
विशेषज्ञों का मानना है कि जयशंकर-सार की बैठक और प्रधानमंत्री मोदी का सम्मान, दोनों मिलकर भारत-इजरायल संबंधों को रक्षा, प्रौद्योगिकी, नवाचार और क्षेत्रीय सुरक्षा के क्षेत्रों में नई दिशा देने वाले साबित हो सकते हैं।