Pune celebrates Ramadan with Iftar markets offering every flavour
आवाज द वॉयस/ पुणे
पुणे की शामें आजकल कुछ बदली-बदली सी हैं। सूरज ढलते ही शहर की आबो-हवा में सोंधी महक घुलने लगती है। रमजान का पाक महीना शुरू होते ही पुणे की गलियों का मिजाज पूरी तरह बदल गया है। यहाँ सिर्फ इबादत का ही दौर नहीं है। बल्कि शाम होते ही दस्तरखान की ऐसी रौनक सजती है कि पूरा शहर स्वाद के सफर पर निकल पड़ता है। क्या हिंदू और क्या मुसलमान। हर कोई इफ्तार की इन खास गलियों में खिंचा चला आ रहा है।
पुणे में इफ्तार का जिक्र हो और कैंप इलाके के एमजी रोड की बात न आए। ऐसा तो मुमकिन ही नहीं है। यह इलाका रमजान में शहर की धड़कन बन जाता है। शाम होते ही यहाँ कोयले पर भूनते कबाबों का धुआं आसमान में तैरने लगता है। एमजी रोड की तंग गलियों में देर रात तक पैर रखने की जगह नहीं मिलती।
यहाँ के सीख कबाब और मक्खन में डूबा हुआ तवा चिकन चखने के लिए लोग मीलों दूर से आते हैं। कैंप की खासियत यहाँ की फिरनी और मालपुआ भी है। गरम मालपुआ और ठंडी रबड़ी का जो जोड़ यहाँ मिलता है। वह स्वाद सालों तक जुबान से नहीं उतरता। यहाँ का चिकन रोल भी युवाओं के बीच जबरदस्त हिट रहता है।
अगर आप असली मुगलई जायके की तलाश में हैं। तो फिर कोंढवा के कौसरबाग का कोई मुकाबला नहीं है। यह इलाका पुणे का नया फूड हब बन चुका है। यहाँ का हलीम सबसे ज्यादा मशहूर है। हलीम को कई घंटों तक धीमी आंच पर घोटा जाता है। मटन और अनाज के इस मेल पर जब कुरकुरी तली हुई प्याज डाली जाती है।
तो स्वाद अपने चरम पर पहुँच जाता है। यहाँ हलीम के लिए लंबी कतारें दिखना आम बात है। इसके अलावा कौसरबाग का शोरमा और रसीला ग्रिल्ड चिकन भी लोगों को बहुत लुभाता है। यहाँ की रौनक देखकर लगता है जैसे आधी रात को भी शहर जाग रहा है।
भवानी पेठ की गलियों का अपना एक पुराना आकर्षण है। यहाँ इफ्तार के वक्त गजब की गहमागहमी रहती है। यह जगह अपनी खास बिरयानी के लिए पहचानी जाती है। यहाँ की चिकन बिरयानी में मसालों का ऐसा बैलेंस होता है कि हर निवाले में जायका मिलता है। भवानी पेठ के कीमा समोसे भी बहुत चर्चा में रहते हैं। लोग घर जाते वक्त यहाँ से समोसे पैक करवाना नहीं भूलते। यहाँ का खाना चखकर आपको घर के बने मसालों की याद आ जाएगी। यहाँ की करी और ग्रेवी वाली डिश भी काफी पसंद की जाती हैं।
मोमीनपुरा की बात करें तो यहाँ का माहौल आपको किसी दूसरी ही दुनिया में ले जाएगा। यहाँ की इफ्तार मार्केट में कदम रखते ही आपको चारों तरफ कबाबों की दुकानें दिखेंगी। कोयले की आंच पर पकते कबाबों की आवाज और खुशबू यहाँ की पहचान है। मोमीनपुरा में लोग खासतौर पर शाही टुकड़ा खाने आते हैं। यहाँ की नाइटलाइफ़ और खाने-पीने का अंदाज बहुत निराला है। मीठे की दुकानों पर मिलने वाली वैरायटी यहाँ के इफ्तार को पूरा करती है।
वानावाड़ी और हडपसर भी अब खाने के शौकीनों के रडार पर आ गए हैं। वानावाड़ी में पिछले कुछ सालों में इफ्तार की बहुत बड़ी मार्केट तैयार हुई है। यहाँ के तंदूरी चिकन और हलीम के दीवाने बढ़ते जा रहे हैं। हडपसर की तरफ भी इफ्तार के बाजार का काफी विस्तार हुआ है। यहाँ मुगलई खानों के साथ-साथ चिकन टिक्का और नए जमाने के फ्यूजन फूड भी खूब बिकते हैं। यहाँ के खानों में मसालों का तालमेल कमाल का होता है।
कोरेगांव पार्क उन लोगों के लिए बेहतरीन है जो पारंपरिक स्वाद के साथ थोड़ा मॉडर्न माहौल चाहते हैं। यहाँ की बिरयानी और मालपुआ परोसने का अंदाज थोड़ा अलग और नया है। युवाओं के बीच यह जगह काफी लोकप्रिय है क्योंकि यहाँ देर रात तक बैठने और गपशप करने का माहौल मिलता है। यहाँ पारंपरिक स्वाद को बड़े ही सलीके से पेश किया जाता है।
रमजान के ये दिन पुणे को एकता और भाईचारे के रंग में रंग देते हैं। इफ्तार के इन ठिकानों पर मजहब की दीवारें गिर जाती हैं। बस खाने की मेज पर बैठा इंसान और उसका स्वाद ही नजर आता है। अगर आप पुणे में हैं। तो इन गलियों का चक्कर लगाए बिना आपका रमजान अधूरा है। पुणे का यह इफ्तार केवल पेट नहीं भरता। बल्कि शहर की मिली-जुली संस्कृति और मोहब्बत की कहानी भी कहता है।