इतिहास रचा: इज़रायल की नेसेट ने किया प्रधानमंत्री मोदी का सम्मान

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 26-02-2026
History made: Israel's Knesset honours PM Modi
History made: Israel's Knesset honours PM Modi

 

तेल अवीव/नई दिल्ली

कूटनीतिक इतिहास में एक उल्लेखनीय अध्याय जुड़ गया है। प्रधानमंत्री Narendra Modi उन विरले वैश्विक नेताओं में शामिल हो गए हैं जिन्हें इज़रायल और फ़िलिस्तीन—दोनों पक्षों—द्वारा सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान से अलंकृत किया गया है। पश्चिम एशिया की जटिल भू-राजनीति के बीच यह उपलब्धि न केवल भारत की संतुलित विदेश नीति का प्रमाण है, बल्कि इस क्षेत्र में नई दिल्ली की विश्वसनीयता और बढ़ते प्रभाव को भी रेखांकित करती है।

इज़रायल की संसद Knesset में दिए गए उनके ऐतिहासिक संबोधन के बाद उन्हें “स्पीकर ऑफ द नेसेट मेडल” से सम्मानित किया गया,यह इज़रायली संसद का सर्वोच्च सम्मान है। इस अलंकरण के साथ वे यह प्रतिष्ठा पाने वाले पहले विश्व नेता बने। यह सम्मान भारत-इज़रायल रणनीतिक साझेदारी को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने में उनकी निर्णायक भूमिका की औपचारिक स्वीकृति के रूप में देखा जा रहा है। संबोधन के समापन पर सांसदों ने खड़े होकर तालियों की गड़गड़ाहट के बीच उनका अभिवादन किया—एक ऐसा क्षण जिसने कूटनीतिक शिष्टाचार से आगे बढ़कर भावनात्मक निकटता का संदेश दिया।

यह पहली बार नहीं है जब प्रधानमंत्री मोदी को पश्चिम एशिया में सर्वोच्च सम्मान से नवाज़ा गया हो। वर्ष 2018 में फ़िलिस्तीन ने उन्हें “ग्रैंड कॉलर ऑफ द स्टेट ऑफ फ़िलिस्तीन” से सम्मानित किया था, जो वहाँ का सर्वोच्च नागरिक अलंकरण है। इस प्रकार वे उन चुनिंदा नेताओं में शुमार हो गए हैं जिन्हें क्षेत्र के दोनों पक्षों से उच्चतम मान्यता प्राप्त हुई है। यह उपलब्धि भारत की उस नीति को सुदृढ़ करती है जिसमें इज़रायल के साथ रणनीतिक सहयोग और फ़िलिस्तीन के साथ पारंपरिक समर्थन—दोनों को संतुलित रूप से आगे बढ़ाया जाता है।

नेसेट में अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने भारत और इज़रायल के संबंधों की प्राचीन जड़ों का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों सभ्यताओं के बीच संवाद हजारों वर्षों से चला आ रहा है। उन्होंने एस्तेर की पुस्तक में भारत के “होदू” के रूप में उल्लेख और तालमुद में प्राचीन व्यापारिक संबंधों का संदर्भ दिया। उनके शब्दों में इतिहास की स्मृति और वर्तमान की संभावनाएँ एक साथ प्रतिध्वनित हो रही थीं। उन्होंने कहा कि यह केवल सरकारों के बीच संबंध नहीं, बल्कि लोगों के बीच विश्वास और सम्मान की साझेदारी है यही साझेदारी दोनों देशों की मित्रता की असली ताकत है।

प्रधानमंत्री ने इज़रायल की उपलब्धियों विशेषकर विज्ञान, प्रौद्योगिकी, कृषि और जल प्रबंधन के क्षेत्रों में की सराहना करते हुए कहा कि भारत इन क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा करना चाहता है। उनके साथ इज़रायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने एक प्रौद्योगिकी और नवाचार प्रदर्शनी का अवलोकन किया, जहाँ अत्याधुनिक वैज्ञानिक विकास और स्टार्टअप नवाचारों को प्रदर्शित किया गया। दोनों नेताओं ने इस बात पर बल दिया कि भविष्य की साझेदारी नवाचार-आधारित होगी जहाँ स्टार्टअप, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा, कृषि-प्रौद्योगिकी और हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में संयुक्त पहलें नई दिशा तय करेंगी।

प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी रेखांकित किया कि भारत में यहूदी समुदाय ने सदियों से शांति और सम्मान के साथ जीवन व्यतीत किया है। भूमध्य सागर और हिंद महासागर को जोड़ने वाले प्राचीन समुद्री मार्गों से भारत आने वाले यहूदी व्यापारियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत ने उन्हें अवसर और गरिमा दी, और उन्होंने भारतीय समाज के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाई। यह साझा विरासत आज के संबंधों की नैतिक और सांस्कृतिक नींव है।

अपने भाषण में उन्होंने योग और आयुर्वेद के प्रसार का भी उल्लेख किया। उन्होंने याद दिलाया कि 2006 में उनकी पहली यात्रा के समय इज़रायल में योग केंद्रों की संख्या सीमित थी, जबकि आज लगभग हर क्षेत्र में योग का अभ्यास हो रहा है और आयुर्वेद के प्रति उत्सुकता बढ़ी है। उन्होंने युवा इज़रायलियों को भारत आने का आमंत्रण दिया ताकि वे भारतीय समाज की ऊर्जा, आध्यात्मिकता और समग्र जीवनशैली का अनुभव कर सकें। यह आह्वान केवल पर्यटन को बढ़ावा देने का नहीं, बल्कि सांस्कृतिक सेतु को और मजबूत करने का संकेत था।

संसदीय सहयोग के मोर्चे पर भी नई पहलें सामने आई हैं। प्रधानमंत्री ने बताया कि भारतीय संसद ने इज़रायल के लिए एक संसदीय मैत्री समूह की स्थापना की है, ताकि दोनों देशों के सांसदों के बीच संवाद और सहयोग को संस्थागत रूप दिया जा सके। यह कदम लोकतांत्रिक संस्थाओं के बीच प्रत्यक्ष संपर्क को बढ़ावा देगा और नीति-निर्माण के स्तर पर परस्पर सीखने की प्रक्रिया को सुदृढ़ करेगा।

सोशल मीडिया मंच X पर प्रधानमंत्री ने नेसेट को संबोधित करने को “सम्मान” बताया और सांसदों से मुलाकात को “खुशी” का क्षण कहा। उन्होंने लिखा कि उनके भाषण में दोनों देशों के बीच प्राचीन संबंधों और आपसी सम्मान की भावना को रेखांकित किया गया है। डिजिटल कूटनीति के इस दौर में ऐसे संदेश वैश्विक दर्शकों तक तुरंत पहुँचते हैं और सार्वजनिक कूटनीति को नई धार देते हैं।

विश्लेषकों का मानना है कि इज़रायल और फ़िलिस्तीन, दोनों से सर्वोच्च सम्मान प्राप्त करना,भारत की ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ की नीति का प्रतिफल है। नई दिल्ली ने दशकों से दो-राष्ट्र समाधान के प्रति समर्थन और इज़रायल के साथ बढ़ते सुरक्षा-प्रौद्योगिकी सहयोग—दोनों को साथ लेकर चलने की कोशिश की है। यह संतुलन आसान नहीं रहा, परंतु आज की उपलब्धि इस नीति की विश्वसनीयता को रेखांकित करती है।

नेसेट में मिला सम्मान केवल एक पदक नहीं, बल्कि उस विश्वास का प्रतीक है जो इज़रायल भारत की भूमिका पर जताता है। वहीं, फ़िलिस्तीन से प्राप्त सर्वोच्च अलंकरण इस बात का प्रमाण है कि भारत ऐतिहासिक प्रतिबद्धताओं को भी उतनी ही गंभीरता से निभाता है। पश्चिम एशिया के संवेदनशील परिदृश्य में यह दोहरी मान्यता भारत को संवाद, शांति और सहयोग के एक संभावित सेतु के रूप में स्थापित करती है।

अंततः, यह घटना केवल कूटनीतिक उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत की उस व्यापक दृष्टि का प्रतिफल है जिसमें इतिहास, संस्कृति, रणनीति और जन-संपर्क—सभी को एक साथ साधा जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह सम्मान पश्चिम एशिया में भारत की बढ़ती उपस्थिति और प्रभाव का संकेत है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह प्रतीकात्मक उपलब्धि किस प्रकार ठोस साझेदारियों और क्षेत्रीय स्थिरता की दिशा में ठोस परिणामों में परिवर्तित होती है। फिलहाल, यह क्षण भारतीय कूटनीति के लिए गर्व और आत्मविश्वास का है,जहाँ संतुलन, सम्मान और संवाद की नीति को अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्पष्ट मान्यता मिली है।