मलिक असगर हाशमी / नई दिल्ली
भारत के संगीत जगत की सबसे चमकती ध्रुव तारा आशा भोसले ने एक बार फिर साबित कर दिया कि कलाकार का कोई धर्म नहीं होता। उनकी आवाज ने तो हमेशा दिलों को जोड़ा ही है। इस बार उनके शब्दों ने भी वही जादू किया है। रमजान का पाक महीना चल रहा है। चारों तरफ इबादत का माहौल है। इसी बीच आशा जी का एक वीडियो सोशल मीडिया की सुर्खियों में आ गया है। इस वीडियो में वे बड़े ही प्यार और अदब के साथ रोजेदारों को रमजान की मुबारकबाद दे रही हैं।

हालाँकि यह संदेश एक संस्थान के विज्ञापन के तौर पर आया है। लेकिन उनके चेहरे की मासूमियत और शब्दों की गहराई ने इसे एक रूहानी पैगाम बना दिया है। उनके चाहने वाले इसे विज्ञापन की तरह नहीं देख रहे। वे इसे एक बड़ी कलाकार की बड़ी सोच मान रहे हैं। लोग इस वीडियो को खूब शेयर कर रहे हैं। प्रतिक्रियाओं का सैलाब उमड़ पड़ा है।
सादगी और विनम्रता का संगम
वीडियो में आशा जी का अंदाज बेहद सुकून देने वाला है। वे एक आलीशान और फूलों वाली कुर्सी पर बैठी हैं।
उन्होंने सफेद रंग की साड़ी पहनी है। उनका चेहरा चमक रहा है। वे दोनों हाथ जोड़कर रोजेदारों को संबोधित करती हैं। उनकी विनम्रता दिल जीत लेती है। वे कहती हैं।
"रमजान का महीना मुबारक हो। यह महीना बेहद शांति वाला है।"
आशा जी ने इस दौरान रमजान की असल अहमियत पर भी बात की। वे कहती हैं।
"आप सब दुआ मांगते रहते हैं गरीबों के लिए। आपके पास जो रहता है। उसे सबमें बांट देते हैं।" इन चंद लाइनों में उन्होंने इस पाक महीने का पूरा सार समझा दिया।
त्याग और सेवा ही तो रमजान की असली पहचान है। उनके चेहरे के भाव बता रहे हैं कि वे इन शब्दों को सिर्फ बोल नहीं रही हैं। वे इन्हें महसूस कर रही हैं।
दुआओं से भर गया कमेंट बॉक्स
सोशल मीडिया पर इस वीडियो को अब तक हजारों लोग देख चुके हैं। ढाई हजार से ज्यादा लोगों ने इसे लाइक किया है।
एक हजार से ज्यादा कमेंट्स आ चुके हैं। लोग उन्हें दुआएं दे रहे हैं। उम्मे सलमा ने लिखा। "रमजान मुबारक हो मैम।" अमीन खान ने लिखा। "शुभकामनाओं के लिए शुक्रिया। आपको और मेरे भारतीय दोस्तों को भी बधाई।"
सगीरा बी कैरोल ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए लिखा। "मैम। आपको भी रमजान मुबारक।
यह सुनकर बहुत अच्छा लगा।" इकबाल पीरबक्स ने उन्हें 'डियर मैम' कहते हुए अल्लाह से उनकी सलामती की दुआ की। रोटेरियन रिजवानी खान और खुर्शीद खान ने भी उन्हें तहे दिल से मुबारकबाद दी।
एक प्रशंसक मोहम्मद वसीम ने तो भावुक होकर लिख दिया। "अल्लाह करे आप 200साल जिंदा रहें। यह हमारी दुआ है।"
सुशील कुमार आनंद का कमेंट काफी गहरा था। उन्होंने लिखा। "मोहब्बत के बिना हर इबादत अधूरी है।" यह शब्द आज के समय में एकता की सबसे बड़ी मिसाल हैं।

लीजेंड हमेशा लीजेंड ही रहता है
आशा भोसले का यह बयान 'असीस मिडिल ईस्ट' नामक संस्थान के लिए था। इसमें वे रोजेदारों को इफ्तार के लिए आमंत्रित करती दिख रही हैं। लेकिन जनता ने विज्ञापन के पीछे छिपी उनकी रूहानी भावना को पकड़ लिया। लोगों ने लिखा कि इसीलिए लीजेंड हमेशा लीजेंड ही रहता है। मोहम्मद अब्दुल रहीम ने भी यही बात दोहराई।
वीडियो में आशा जी की आवाज की वह खनक आज भी बरकरार है। वे जब दोबारा कहती हैं। "रमजान का महीना मुबारक हो।" तो वह किसी प्रार्थना की तरह लगता है। अबरार अहमद ने 'सुभानअल्लाह' कहकर उनकी तारीफ की। मैमून आलम और बिल्किस माधा ने भी उन्हें दुआएं दीं।
एकता का एक नया सुर
आज जब दुनिया में दूरियां बढ़ रही हैं। ऐसे में एक प्रख्यात हिंदू गायिका का मुस्लिम भाई-बहनों को इस तरह याद करना एक बड़ी बात है। यह भारत की गंगा-जमुनी तहजीब की जीती-जागती मिसाल है। आशा जी ने बचपन से संगीत को जिया है। संगीत ने उन्हें सबको प्यार करना सिखाया है।
इस पाक महीने में रोजेदार भूख और प्यास सहकर खुदा की इबादत करते हैं। आशा जी ने इसी जज्बे को सलाम किया है। उन्होंने गरीबों के प्रति हमदर्दी रखने वालों की तारीफ की है। यह संदेश बताता है कि इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म है।
आशा भोसले का यह वीडियो आज हर उस इंसान के लिए जवाब है जो समाज को बांटने की कोशिश करता है। सुरों की यह मलिका हमें सिखा रही है कि त्योहार किसी के भी हों। खुशियां सबकी होनी चाहिए। उनकी यह छोटी सी मुबारकबाद करोड़ों दिलों को सुकून दे गई है। सोशल मीडिया पर अब भी उनके लिए दुआओं का सिलसिला जारी है।
यह रिपोर्ट हमें याद दिलाती है कि कला और कलाकार हमेशा सरहदों और दीवारों से ऊपर होते हैं। आशा जी की लंबी उम्र की दुआ आज हर घर में हो रही है।