न्यूयॉर्क
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को समाप्त करने के लिए सात दिन की योजना पेश की है। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस योजना में सातवें दिन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने और इसके बाद ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर व्यापक बातचीत शुरू करने का प्रस्ताव शामिल है।
अराघची ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान पत्रकारों से बातचीत में बताया कि ईरान ने मध्यस्थों के जरिए अमेरिका के सामने यह प्रस्ताव रखा है। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव इसी वर्ष जून में अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौता ज्ञापन (MoU) के समान है।
अराघची के मुताबिक, “हमने मध्यस्थों के जरिए अमेरिका के सामने एक योजना रखी है। यदि कुछ शर्तें पूरी होती हैं तो सातवें दिन के अंत में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोल दिया जाएगा और बातचीत फिर से शुरू हो जाएगी।” उन्होंने यह भी कहा कि यदि अमेरिका के मध्यावधि चुनावों से पहले कोई समझौता हो जाए तो यह बेहतर होगा।
इससे पहले जर्मनी के विदेश मंत्री योहान वाडेफुल के साथ बैठक में अराघची ने कहा कि ईरान ने कूटनीतिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए अपनी उचित शर्तें और आवश्यकताएं अमेरिकी पक्ष के सामने रख दी हैं। उन्होंने जोर दिया कि क्षेत्र में सुरक्षा बहाल करने के लिए ईरान के खिलाफ अमेरिकी हस्तक्षेप और आक्रामक कार्रवाई को समाप्त करना जरूरी है।
ईरानी विदेश मंत्री ने अपने शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम को लेकर कूटनीति जारी रखने की ईरान की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि बातचीत में ईरान की सद्भावना को कोई पक्ष नजरअंदाज नहीं कर सकता। उन्होंने बातचीत के दौरान ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाई का भी उल्लेख किया और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में असुरक्षा के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराए जाने पर आपत्ति जताई।
अराघची ने जर्मनी समेत यूरोपीय देशों की भी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि यूरोपीय देश अंतरराष्ट्रीय कानून के अमेरिकी उल्लंघनों और दबाव की राजनीति को नजरअंदाज कर रहे हैं।
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर तेहरान का रुख भी सामने रखा और कहा कि संयुक्त राष्ट्र में भरोसा बहाल करने के लिए सभी देशों को संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों और उद्देश्यों तथा अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करना होगा।
इस बीच, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में जून में दोनों पक्षों के बीच हुए समझौते को लागू नहीं किए जाने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिकी पक्ष को जिम्मेदार ठहराया।
पेजेश्कियन ने कहा कि ईरान और अमेरिका के बीच एक समझौता हुआ था और उस पर हस्ताक्षर भी किए गए थे। उन्होंने कहा कि ईरान उस समझौते के आधार पर आगे बढ़ने के लिए तब भी तैयार था और अब भी तैयार है।
उन्होंने कहा कि उस समय स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को ईरान ने बंद नहीं किया था और वह खुला था। पेजेश्कियन के अनुसार, इसके बाद ईरान पर हमला किया गया और उसके सर्वोच्च नेता, वैज्ञानिकों, सैन्य कमांडरों तथा सरकारी अधिकारियों से जुड़े लोगों की हत्या की गई।
पेजेश्कियन ने अमेरिका पर बातचीत के बजाय सैन्य कार्रवाई का रास्ता अपनाने का आरोप लगाया और कहा कि ईरान बातचीत के लिए तैयार है।
ईरान की ओर से रखे गए इस प्रस्ताव के बाद अब आगे की बातचीत और संभावित समझौते को लेकर अमेरिकी रुख महत्वपूर्ण माना जा रहा है। संघर्ष को समाप्त करने के लिए कूटनीतिक समाधान की संभावनाओं के बीच ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने और परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत बहाल करने को अपनी प्रस्तावित सात-दिवसीय योजना से जोड़ा है।