AI के अगले 12-18 महीने तय करेंगे तकनीक का लाभार्थी: बिल गेट्स

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  onikamaheshwari | Date 24-09-2026
"AI decisions in next 12-18 months will determine who benefits from technology": Bill Gates

 

न्यूयॉर्क [US]
 
माइक्रोसॉफ्ट के को-फाउंडर बिल गेट्स ने ANI के साथ एक खास इंटरव्यू में कहा कि अगले 12 से 18 महीनों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर लिए गए फैसले यह तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे कि आने वाले सालों में इस टेक्नोलॉजी का फायदा किसे मिलेगा। उन्होंने लोकल भाषा में AI, भारतीय डेटा, सुरक्षा और घरेलू टैलेंट की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। गेट्स ने कहा, "इनमें से किसी भी चीज़ में देरी नहीं की जा सकती। अगले 12 से 18 महीनों में लिए गए फैसले ही तय करेंगे कि किसे फायदा होगा और किसे नहीं।" गेट्स ने कहा कि AI पहले की टेक्नोलॉजी से बिल्कुल अलग है और इसके जोखिम और फायदे इस बात पर निर्भर करेंगे कि इसे कैसे डेवलप और इस्तेमाल किया जाता है।
 
उन्होंने कहा, "AI ऐसी चीज़ है जैसा हमने पहले कभी नहीं देखा। मैंने इसके जोखिमों के बारे में लिखा है, जिन्हें हम सभी को गंभीरता से लेने की ज़रूरत है। लेकिन एक ही समय में दो बातें सच हो सकती हैं। जहाँ AI नई अनिश्चितताएँ और खतरे पैदा करता है, वहीं यह बहुत अच्छा भी हो सकता है। यह सब इस बात पर निर्भर करता है कि इसका इस्तेमाल कैसे किया जाता है और हम अभी क्या फैसले लेते हैं।" उन्होंने यह भी कहा कि भारत के पास AI का इस्तेमाल करके यह पक्का करने का बड़ा मौका है कि टेक्नोलॉजी का फायदा शहरों के साथ-साथ गाँवों और छोटे कस्बों तक भी पहुँचे। उन्होंने कहा कि भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर इसके लिए एक मज़बूत आधार देता है।
 
गेट्स ने ऐसे उदाहरण दिए जहाँ किसान मोबाइल फोन का इस्तेमाल करके बीमार पत्ते की तस्वीर ले सकते हैं और कुछ ही मिनटों में अपनी भाषा में समस्या और संभावित उपाय के बारे में जानकारी पा सकते हैं। इसके बाद खेत में स्प्रे करने और कीटों के हमले या फसल के नुकसान को रोकने में मदद के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया जा सकता है। उन्होंने भारत की भाषाओं और स्थानीय बोलियों में AI को प्रभावी ढंग से काम करने लायक बनाने की अहमियत पर भी ज़ोर दिया।
 
उन्होंने कहा कि मुख्य रूप से अंग्रेज़ी पर ट्रेन किए गए AI सिस्टम स्थानीय भाषाओं में पूछे गए स्वास्थ्य से जुड़े सवालों को गलत समझ सकते हैं, इसलिए हेल्थकेयर में टेस्टिंग बहुत ज़रूरी है। गेट्स ने कहा, "भाषा मायने रखती है - लेकिन स्थानीय संदर्भ भी मायने रखता है। सभी भारतीयों के लिए उपयोगी होने के लिए, AI को भारतीय स्थितियों के लिए भारतीय डेटा पर बनाया जाना चाहिए, और भारत को यह तय करना चाहिए कि उस डेटा को कैसे मैनेज और सुरक्षित किया जाए।" उन्होंने अलग-अलग क्षेत्रों में AI टैलेंट डेवलप करने की भारत की ज़रूरत पर भी ज़ोर दिया, जिसमें पॉलिसी बनाने वाले, रिसर्चर, डॉक्टर, टीचर और कृषि विशेषज्ञ शामिल हैं, जो यह तय करेंगे कि टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कैसे किया जाए।
 
गेट्स ने कहा कि AI सर्विस प्रोवाइडर्स को समय पर फैसले लेने के लिए बेहतर जानकारी देकर हेल्थकेयर में भी सुधार कर सकता है। AI टूल्स, हेल्थ सेंटर में काम करने वाले आशा वर्कर या डॉक्टर की मदद कर सकते हैं ताकि वे बीमारियों का जल्दी पता लगा सकें और ज़रूरत पड़ने पर मरीज़ों को स्पेशलिस्ट के पास भेज सकें। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि हेल्थकेयर AI की सुरक्षा पक्की करने के लिए इसके डेवलपमेंट में ज़्यादा समय लगेगा। उन्होंने यह भी कहा कि हेल्थ डेटा बहुत निजी होता है और प्राइवेसी की सुरक्षा ज़रूरी है। खेती के क्षेत्र में, गेट्स ने महाराष्ट्र की 'महाविस्तार' (MahaVISTAAR) एडवाइज़री सर्विस का उदाहरण दिया कि कैसे AI का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा सकता है। यह मुफ़्त सर्विस राज्य के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का हिस्सा है और किसानों को अपनी भाषा में ऐप, वॉइस कॉल या मैसेज के ज़रिए फ़सल, मौसम और कीटों के बारे में खास सलाह पाने की सुविधा देती है।
 
उन्होंने बताया कि 7 लाख से ज़्यादा किसान इस सर्विस से जुड़ चुके हैं और हर महीने लगभग 70,000 नए किसान इसमें शामिल हो रहे हैं। गेट्स ने साइबर सिक्योरिटी को भी निकट भविष्य की एक चिंता बताया। जिन AI टूल्स से लोग उपयोगी काम कर सकते हैं, उन्हीं का इस्तेमाल अहम सिस्टम पर हमले के लिए भी किया जा सकता है। उन्होंने कहा, "निकट भविष्य की एक चिंता साइबर सिक्योरिटी है। जिन टूल्स से लोग अच्छे काम करते हैं, उन्हीं का इस्तेमाल करके कोई अस्पताल के सिस्टम पर हमला भी कर सकता है, इसलिए सरकारों और कंपनियों को अभी से सुरक्षा में निवेश करने की ज़रूरत है।"
उन्होंने यह भी कहा कि जैसे-जैसे AI आम होता जाएगा, काम का स्वरूप तेज़ी से बदलेगा, जिससे भारत के युवा और टेक-सेवी वर्कफ़ोर्स के लिए स्किल डेवलपमेंट ज़रूरी हो जाएगा।
 
गेट्स ने कहा कि भारत की भाषाई विविधता के बीच AI को सुलभ बनाने में 'भाषिनी' (Bhashini) जैसी कोशिशें अहम होंगी। उन्होंने कहा कि उनका फ़ाउंडेशन, दूसरे संगठनों के साथ मिलकर, 3 अरब लोगों को उनकी अपनी भाषा में - खासकर उन भाषाओं में जिनका प्रतिनिधित्व कम है - AI तक पहुँचने में मदद करने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा कि भारत में AI का फ़ायदा आख़िरकार न सिर्फ़ टेक्नोलॉजी तक पहुँच पर निर्भर करेगा, बल्कि इस बात पर भी निर्भर करेगा कि इसे स्थानीय ज़रूरतों के हिसाब से कैसे ढाला जाता है, सही डेटा प्रैक्टिस के ज़रिए कैसे सुरक्षित रखा जाता है और इसे ज़िम्मेदारी से लागू करने में सक्षम टैलेंट का कैसे सहयोग मिलता है।