आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत के साथ मॉस्को के समय की कसौटी पर खरे उतरे संबंधों की सराहना करते हुए आगाह किया कि भारत-रूस संबंधों को कमजोर करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर पश्चिमी देशों का दबाव वैश्विक स्थिरता के लिए नुकसानदायक होगा। उन्होंने यह भी कहा कि भारत की आर्थिक प्रगति ‘‘अचानक नहीं हुई है’’, बल्कि यह मोदी के नेतृत्व में किए गए कठिन परिश्रम का परिणाम है।
‘पीटीआई’ सहित दुनिया की प्रमुख समाचार एजेंसियों के प्रमुखों के साथ बृहस्पतिवार रात को हुई बातचीत में पुतिन ने भारत की स्वतंत्र विदेश नीति की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि रूस भारत के साथ अपने समग्र सहयोग को और विस्तार देने के लिए प्रतिबद्ध है और दोनों देशों के बीच वार्षिक द्विपक्षीय व्यापार को मौजूदा 60 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़ाकर 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने की परिकल्पना कर रहा है।
पुतिन ने स्वच्छ ऊर्जा, औषधि और हाइड्रोकार्बन क्षेत्र को व्यापार व निवेश संबंधों की निरंतर प्रगति को आगे बढ़ाने वाले प्रमुख क्षेत्रों के रूप में चिह्नित किया।
पुतिन ने ‘पीटीआई’ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और प्रधान संपादक विजय जोशी के एक सवाल पर कहा, ‘‘भारत दुनिया की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, जिसने सबसे अधिक आर्थिक वृद्धि दर दिखाई है। यह अचानक नहीं हुआ है। यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार की कड़ी मेहनत का परिणाम है।’’
रूसी राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘हमें उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में हमारा द्विपक्षीय व्यापार 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच जाएगा। हमारे पास अधिक सक्रिय रूप से काम करने और इससे भी अधिक महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को हासिल करने के लिए सभी आवश्यक आधार मौजूद हैं। हम केवल ऊर्जा क्षेत्र की योजनाओं की बात नहीं कर रहे हैं, बल्कि हाइड्रोकार्बन के क्षेत्र में भी नए अवसर और मंच विकसित होंगे।’’
भारत पर रूस के साथ अपने संबंध सीमित करने का दबाव बनाने को लेकर पश्चिमी देशों की तीखी आलोचना करते हुए पुतिन ने कहा कि मॉस्को को इसका कोई नकारात्मक प्रभाव दिखाई नहीं दिया है। उन्होंने कहा कि इस तरह की रणनीतियां अंततः उलटा असर डालेंगी।