बलूचिस्तान [पाकिस्तान]
बलूच एक्टिविस्ट सामी दीन बलूच ने बलूच कवयित्री हबीबा पीर जान के कथित तौर पर जबरन गायब किए जाने की कड़ी निंदा की है। उन्होंने पाकिस्तानी सुरक्षा एजेंसियों पर मनमाने ढंग से हिरासत में लेने, डराने-धमकाने और परिवारों को परेशान करके बलूच महिलाओं को निशाना बनाने का आरोप लगाया है। X पर शेयर की गई एक पोस्ट में उन्होंने बताया कि 25 मई को कराची में सुरक्षाकर्मियों ने हबीबा पीर जान को हिरासत में लिया था और तब से वह लापता हैं। एक्टिविस्ट के अनुसार, यह पहली बार नहीं है जब कवयित्री को कथित तौर पर जबरन गायब किया गया हो। उन्हें पहले 2022 में भी हिरासत में लिया गया था और लगभग एक सप्ताह बाद रिहा कर दिया गया था।
सामी दीन बलूच ने हबीबा के मामले को बलूच महिलाओं के जबरन गायब किए जाने के एक बड़े पैटर्न का हिस्सा बताया। उन्होंने दावा किया कि इसी तरह के हालात में गायब हुईं कई महिलाओं को बाद में मीडिया के सामने पेश किया गया और बयान देने के लिए मजबूर किया गया, जबकि अन्य का अभी तक कोई पता नहीं चला है। एक्टिविस्ट ने खास तौर पर माह जबीन के मामले का ज़िक्र किया, जो उनके अनुसार अभी भी लापता हैं और उनका परिवार अभी भी उनके ठिकाने के बारे में जानकारी का इंतज़ार कर रहा है।
सामी ने आगे आरोप लगाया कि हबीबा पीर जान के गायब होने पर शुरू में सरकार समर्थक सोशल मीडिया अकाउंट्स ने जश्न मनाया था और उनकी हिरासत को सुरक्षा के लिहाज़ से एक बड़ी कामयाबी बताया था। उनके अनुसार, बाद में उन्हीं अकाउंट्स ने अपनी पोस्ट डिलीट कर दीं और कवयित्री को भगोड़ा बताना शुरू कर दिया। उन्होंने यह भी दावा किया कि बाद में हबीबा के लिए इनाम की घोषणा की गई और उन्हें 'वॉन्टेड' (वांछित) घोषित कर दिया गया। एक्टिविस्ट ने अधिकारियों पर हबीबा के परिवार को लगातार परेशान करने का आरोप लगाया। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारी उनके घर गए, परिवार के सदस्यों के मोबाइल फ़ोन ज़ब्त कर लिए और डराने-धमकाने व चरित्र हनन का एक सुनियोजित अभियान शुरू किया।
इस स्थिति को बुनियादी मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन बताते हुए सामी दीन बलूच ने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों से दखल देने की अपील की। उन्होंने हबीबा पीर जान की सुरक्षित वापसी के लिए तत्काल प्रयास करने और जबरन गायब करने के चल रहे चलन को खत्म करने की मांग की।