नई दिल्ली
भारत और अमेरिका के बीच घोषित अंतरिम व्यापार ढांचे (Interim Trade Framework) के बाद एशियाई देशों के मुकाबले भारत की बाह्य आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया है। निवेश बैंक JM Financial की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, इस समझौते से भारत के निर्यात में तेज़ी आने, डॉलर प्रवाह मज़बूत होने और इक्विटी बाज़ार—खासकर निर्यात-उन्मुख क्षेत्रों—में सकारात्मक धारणा बनने की संभावना है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रभावी टैरिफ में कमी और दंडात्मक शुल्कों की वापसी से अमेरिका के साथ भारत के व्यापार संतुलन में सुधार होगा। वित्त वर्ष 2026 में अब तक ऊंचे टैरिफ के कारण व्यापार पर जो दबाव बना था, वह घटेगा। बेहतर निर्यात प्रवाह से डॉलर इनफ्लो बढ़ने, चालू खाते और भुगतान संतुलन (BoP) को सहारा मिलने तथा रुपये में सीमित मजबूती का रुझान बनने की उम्मीद जताई गई है।
रिपोर्ट का आकलन है कि भारत की तुलनात्मक बाह्य स्थिति उन एशियाई उभरते बाज़ारों से बेहतर हुई है, जो अब भी अमेरिकी बाज़ार में ऊंचे प्रभावी टैरिफ का सामना कर रहे हैं। इसे भारतीय इक्विटीज़ के लिए “स्पष्ट रूप से सकारात्मक” संकेत बताया गया है—विशेषकर निर्यात-आधारित सेक्टरों के लिए।
हालांकि, रिपोर्ट ने यह सावधानी भी बरती है कि ऊंचे वैल्यूएशन के चलते विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) का नया निवेश चरणबद्ध हो सकता है, तुरंत तेज़ उछाल की उम्मीद नहीं करनी चाहिए।
यह अंतरिम ढांचा 6 फरवरी 2026 को भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका की संयुक्त घोषणा के ज़रिये सामने आया था और इसे व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) की दिशा में पहला कदम माना जा रहा है। इसके तहत अमेरिका भारतीय वस्तुओं पर 18 प्रतिशत का पारस्परिक टैरिफ लागू करेगा, जबकि अंतरिम समझौते (ITA) के सफल समापन पर अधिक उत्पादों पर टैरिफ हटाने का मार्ग भी प्रशस्त किया गया है।
टैरिफ के अलावा, दोनों देशों ने गैर-टैरिफ बाधाओं को कम करने, नियम-ए-ओरिजिन तय करने, सप्लाई चेन की मजबूती बढ़ाने और डिजिटल ट्रेड नियमों पर आगे बढ़ने पर सहमति जताई है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि अमेरिका ने अतिरिक्त 25 प्रतिशत एड-वैलोरम ड्यूटी को औपचारिक रूप से वापस ले लिया है, जो 7 फरवरी 2026 से प्रभावी है।
सेक्टरवार असर की बात करें तो इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात पहले की छूटों के चलते largely अप्रभावित रहेगा। वहीं, हीरे-आभूषण, टेक्सटाइल्स, मशीनरी, केमिकल्स और ऑटोमोबाइल्स जैसे क्षेत्रों में टैरिफ कटौती से प्रतिस्पर्धात्मकता में ठोस सुधार की संभावना है।
कुल मिलाकर, रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि यह अंतरिम ढांचा भारत–अमेरिका व्यापार संबंधों के लिए मज़बूत आधार तैयार करता है और आगे चलकर भारत के निर्यात, बाह्य संतुलन और बाज़ार धारणा को समर्थन देगा।





