बलूचिस्तान
पाकिस्तान के अशांत प्रांत बलूचिस्तान से एक गंभीर खबर सामने आई है। अलगाववादी संगठन Baloch Liberation Army ने दावा किया है कि उसने अपने कब्जे में लिए गए सात पाकिस्तानी सैनिकों को मृत्युदंड दे दिया है। संगठन के अनुसार इन सैनिकों को “ऑपरेशन हेरोफ II” के दौरान पकड़ा गया था।
स्थानीय समाचार पोर्टल The Balochistan Post की रिपोर्ट के मुताबिक बीएलए ने एक बयान जारी कर कहा कि इन सातों सैनिकों का संबंध पाकिस्तान की नियमित सैन्य इकाइयों से था। संगठन का आरोप है कि इन सैनिकों पर जबरन गुमशुदगी, नागरिकों के साथ दुर्व्यवहार और कथित युद्ध अपराधों में शामिल होने के आरोप थे।
बीएलए ने अपने बयान में कहा कि इन आरोपों के आधार पर तथाकथित Baloch National Court ने उन्हें दोषी ठहराया था। इसके बाद संगठन की वरिष्ठ कमांड परिषद की मंजूरी के बाद मंगलवार को इन सभी को मृत्युदंड दिया गया।
संगठन का दावा है कि उसने 14 फरवरी को पाकिस्तान सरकार और सेना को एक अल्टीमेटम जारी किया था। इस अल्टीमेटम में कैदियों की अदला-बदली की मांग करते हुए सात दिन की समय सीमा तय की गई थी। बाद में संगठन ने कथित मानवीय आधार पर इस समय सीमा को बढ़ाकर चौदह दिन कर दिया था।
बीएलए के मुताबिक इस अवधि के दौरान उसे यह महसूस हुआ कि पाकिस्तान की सैन्य नेतृत्व कैदियों की रिहाई को लेकर गंभीर नहीं है। संगठन ने आरोप लगाया कि कैदी विनिमय को लेकर शुरुआती बातचीत केवल समय हासिल करने की एक रणनीति थी, जबकि उसी दौरान पाकिस्तानी सेना बलूचिस्तान में अपने सैन्य अभियानों को तेज करती रही।
बीएलए ने यह भी दावा किया कि इस दौरान पाकिस्तानी सेना ने क्षेत्र में गनशिप हेलीकॉप्टर, ड्रोन और भारी सैन्य बल की तैनाती के साथ कई कार्रवाई कीं। संगठन का आरोप है कि इन सैन्य अभियानों का उद्देश्य बलूच लड़ाकों को निशाना बनाना था।
संगठन की वरिष्ठ कमांड परिषद ने कथित तौर पर यह निष्कर्ष निकाला कि मानवीय आधार पर दी गई अतिरिक्त समय सीमा का इस्तेमाल केवल सैन्य कार्रवाई बढ़ाने के लिए किया गया। बीएलए ने कहा कि उसके अनुसार पाकिस्तान की सैन्य नेतृत्व केवल ताकत की भाषा समझती है।
बीएलए ने इस घटना के लिए पाकिस्तान के सैन्य नेतृत्व को जिम्मेदार ठहराते हुए आरोप लगाया कि उसने अपने सैनिकों की जान से ज्यादा अहमियत राजनीतिक और सैन्य रणनीतियों को दी।हालांकि खबर लिखे जाने तक पाकिस्तानी सेना या सरकार की ओर से इस दावे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इस बीच क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति को लेकर चिंताएं और बढ़ गई हैं।





