मलिक असगर हाशमी / नई दिल्ली
भारतीय क्रिकेट के गलियारों में इन दिनों एक जोरदार बहस छिड़ी हुई है। चर्चा के केंद्र में हैं दो बड़े नाम—अजित अगरकर और जहीर खान। सोशल मीडिया से लेकर न्यूज़ रूम तक, हर जगह बस एक ही सवाल है। क्या अजित अगरकर की बीसीसीआई चयन समिति के अध्यक्ष पद से विदा होने वाली है? क्या टीम इंडिया के पूर्व दिग्गज तेज गेंदबाज जहीर खान को बोर्ड में कोई बड़ी और नई भूमिका मिलने जा रही है? हालांकि बीसीसीआई की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन अटकलों का बाजार पूरी तरह गर्म है।

कहा जाता है कि जहाँ धुआं होता है, वहाँ आग जरूर होती है। सोशल मीडिया पर चल रही खबरों पर गौर करें तो 'सौ मुँह और सैकड़ों बातें' वाली स्थिति बनी हुई है। एक बड़ा वर्ग यह दावा कर रहा है कि अजित अगरकर के बाद चयन समिति की कमान जहीर खान को सौंपी जा सकती है। वहीं, एक दूसरा वर्ग 'मुंबई लॉबी' का जिक्र कर रहा है। उनका कहना है कि यह लॉबी अगरकर के कामकाज से पूरी तरह खुश नहीं है और जहीर खान उनकी पहली पसंद बनकर उभरे हैं। लेकिन इन सबसे इतर, एक तीसरी और ज्यादा ठोस खबर यह आ रही है कि जहीर खान को चयनकर्ता नहीं, बल्कि भारत के भविष्य के तेज गेंदबाजों को तैयार करने की एक विशेष जिम्मेदारी दी जा सकती है।
🚨BREKING NEWS🚨
— indianTeamCric (@Teamindiacrick) March 4, 2026
Zaheer khan likely to replace Ajit Agarkar as chairman of the BCCI selection committee. pic.twitter.com/oMVAiOCsUq
तेज गेंदबाजी का नया मिशन और जहीर की भूमिका
ताजा मीडिया रिपोर्ट्स, विशेषकर टाइम्स ऑफ इंडिया की खबरों के अनुसार, बीसीसीआई ने भारत में एक व्यापक 'तेज गेंदबाजी मूवमेंट' चलाने का मन बना लिया है। इसके लिए जहीर खान से बेहतर नाम भला और कौन हो सकता है? बताया जा रहा है कि जहीर अब देश में तेज गेंदबाजों की एक नई पौध तैयार करने में बीसीसीआई की मदद करेंगे। उन्हें बेंगलुरु स्थित बीसीसीआई के 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' (COE) में विशेष तेज गेंदबाजी ट्रेनिंग कैंप आयोजित करने का जिम्मा सौंपा गया है।
असल में, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में पिछले साल दिसंबर से मुख्य तेज गेंदबाजी कोच का पद खाली पड़ा है। इससे पहले 60 वर्षीय ट्रॉय कूली इस पद पर थे। उनका चार साल का कार्यकाल खत्म होने के बाद बीसीसीआई ने फरवरी में नए आवेदन मंगवाए थे, लेकिन अब तक कोई सटीक रिप्लेसमेंट नहीं मिल पाया है। ऐसे में बीसीसीआई के हेड ऑफ क्रिकेट वीवीएस लक्ष्मण ने जहीर खान के नाम का सुझाव दिया है। सूत्रों की मानें तो जहीर खुद भी कोचिंग और मेंटरशिप की भूमिका को लेकर काफी उत्साहित हैं। आईपीएल में लखनऊ सुपर जायंट्स और मुंबई इंडियंस के साथ उनका जुड़ाव यह साबित करता है कि वे युवाओं के साथ काम करना पसंद करते हैं।
Mumbai lobby again. Hmmm..
— ⛩️ ӨᗪIㄚ卂几 (@NaadanNinja) March 4, 2026
Zaheer atleast was important for Indian cricket unlike agarbathi. Let's see where this goes https://t.co/qYfEfwMrHn
जहीर खान: चालाकी और कौशल का बेजोड़ संगम
जहीर खान भारतीय क्रिकेट इतिहास के उन गिने-चुने गेंदबाजों में से हैं जिनके पास वो तमाम गुण थे जो कभी पाकिस्तानी तेज गेंदबाजों की पहचान हुआ करते थे। वे नई गेंद को स्विंग कराना जानते थे और पुरानी गेंद से रिवर्स स्विंग का जादू बिखेरते थे। उपमहाद्वीप की सपाट पिचों पर विकेट कैसे निकालना है, यह कला जहीर को बखूबी आती थी। उनकी तुलना अक्सर महान वसीम अकरम से की जाती रही है। भले ही कौशल के मामले में अकरम का स्तर अलग था, लेकिन मानसिक तौर पर जहीर उनके बेहद करीब थे।
जहीर के पास बल्लेबाजों को पढ़ने की अद्भुत क्षमता है। वे बल्लेबाज की जरा सी कमजोरी को भांप लेते हैं और फिर उस पर बेरहमी से वार करते हैं। उनकी सबसे बड़ी खूबी यह रही कि वे मैदान पर जितने आक्रामक थे, मैदान के बाहर उतने ही शांत और लो-प्रोफाइल। विवादों से उनका नाता कभी नहीं रहा, जो उन्हें बीसीसीआई की पसंद के तौर पर और भी मजबूत बनाता है।

चोटों से संघर्ष और शानदार वापसी का सफर
जहीर खान का करियर उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। उनके करियर को तीन प्रमुख हिस्सों में देखा जा सकता है। साल 2000 में जब उन्होंने चैंपियंस ट्रॉफी में स्टीव वॉ को एक सटीक यॉर्कर पर बोल्ड किया था, तब पूरी दुनिया ने उनके टैलेंट का लोहा माना था। इसके बाद 2003-04 के ऑस्ट्रेलिया दौरे पर लगी एक रहस्यमयी चोट ने उन्हें करीब दो साल तक परेशान किया। हर बार वापसी की कोशिश एक नई चोट के साथ खत्म हो जाती थी।
लेकिन 2006 का साल उनके करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। जहीर ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपने रन-अप को छोटा किया, अपनी फिटनेस पर काम किया और इंग्लैंड में वॉस्टरशायर के लिए काउंटी क्रिकेट खेला। वहां उन्होंने 78 विकेट चटकाए और खुद को नए सिरे से तैयार किया। इसके बाद जब वे भारतीय टीम में लौटे, तो वे पहले से कहीं ज्यादा घातक थे। 2007 में ट्रेंट ब्रिज टेस्ट की जीत हो या 2011 का विश्व कप, जहीर खान भारतीय आक्रमण की धुरी रहे। 2011 विश्व कप की जीत को वे अपने करियर का सबसे गौरवपूर्ण पल मानते हैं।
टेस्ट क्रिकेट के प्रति अटूट प्रेम
जहीर खान ने हमेशा टेस्ट क्रिकेट को प्राथमिकता दी। उनके करियर का अंत भी उसी गरिमा के साथ हुआ जैसा एक दिग्गज का होना चाहिए। अपने आखिरी टेस्ट मैच में भी उन्होंने पांच विकेट चटकाए थे। 311 टेस्ट विकेटों के साथ वे भारत के लिए कपिल देव के बाद सबसे सफल तेज गेंदबाज हैं। संन्यास के बाद भी वे आईपीएल के जरिए खेल से जुड़े रहे। दिल्ली डेयरडेविल्स की कप्तानी की और फिर मेंटर के तौर पर अपनी सेवाएं दीं।

निष्कर्ष: क्या होगा जहीर का अगला रोल?
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि जहीर खान बीसीसीआई के साथ फुल-टाइम जुड़ेंगे या केवल विशेष कैंपों के लिए उपलब्ध रहेंगे। लेकिन बोर्ड की जॉब प्रोफाइल को देखें तो नया कोच राष्ट्रीय टीम के सपोर्ट स्टाफ के साथ मिलकर काम करेगा। इसका मतलब है कि जहीर की भूमिका केवल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि वे सीधे तौर पर टीम इंडिया के 'बेंच स्ट्रेंथ' को मजबूत करेंगे।
सोशल मीडिया पर चल रही अटकलें अपनी जगह हैं, लेकिन बीसीसीआई का जहीर की ओर रुख करना यह दिखाता है कि बोर्ड अब जमीनी स्तर पर तेज गेंदबाजी को मजबूत करना चाहता है। अजित अगरकर का क्या होगा, यह तो वक्त ही बताएगा, लेकिन जहीर खान की वापसी निश्चित रूप से भारतीय तेज गेंदबाजों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। जहीर के पास वो अनुभव है जो किताबों या साधारण कोचिंग से नहीं मिलता। वे जानते हैं कि कब आक्रमण करना है और कब संयम बरतना है।
अगर जहीर यह जिम्मेदारी संभालते हैं, तो आने वाले समय में हमें भारतीय पिचों पर भी तेज गेंदबाजों का वही दबदबा देखने को मिल सकता है, जो जहीर के दौर में हुआ करता था। बीसीसीआई का यह कदम भारतीय क्रिकेट के भविष्य की नींव रखने जैसा है।