अजमेरी गेट की वह हवेली, जहाँ से जुड़ी हैं सायरा बानो की बचपन की यादें

Story by  ओनिका माहेश्वरी | Published by  onikamaheshwari | Date 05-03-2026
Saira Bano's Historic Haveli: A Forgotten Heritage in Delhi's Ajmeri Gate
Saira Bano's Historic Haveli: A Forgotten Heritage in Delhi's Ajmeri Gate

 

ओनिका माहेश्वरी/ नई दिल्ली  

दिल्ली के अजमेरी गेट क्षेत्र में स्थित एक जर्जर हवेली, जो कभी बॉलीवुड की एक महान अभिनेत्री, सायरा बानो के परिवार का हिस्सा थी, आज भी अपनी इतिहासिक भव्यता को बयां करती है। इस हवेली का इतिहास न केवल दिल्ली की शाही धरोहर का प्रतीक है, बल्कि यह भारतीय सिनेमा की समृद्ध संस्कृति और एक परिवार के अनमोल कनेक्शन को भी दर्शाता है।

अजमेरी गेट के पास, कुंडेवालान गली में स्थित इस हवेली को सायरा बानो की मां, नसीम बानो का पैतृक घर माना जाता है। यह हवेली एक समय में दिल्ली के प्रसिद्ध और ऐतिहासिक क्षेत्रों में से एक रही है, जो आज भी अपने भव्य अतीत को संजोए हुए है। यह हवेली न केवल एक परिवार की यादों का खजाना है, बल्कि यह उस समय के संगीत, कला और संस्कृति का भी प्रतीक है, जब दिल्ली अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए प्रसिद्ध थी।

यह हवेली लगभग 1644 के आसपास निर्मित हुई थी, और यह उस समय की शाही दिल्ली का हिस्सा थी, जहाँ नवाबों और दरबारियों का आना-जाना था। यह क्षेत्र मुग़लकाल और ब्रिटिश शासन का गवाह रहा है, और हवेली का वास्तु शिल्प उस समय के शाही वैभव को दर्शाता था। हवेली के अंदर की दीवारों पर की गई नक्काशी, लकड़ी की कसीदाकारी और लोहे के मेहराब उस दौर की कलात्मकता की पहचान हैं।

लेकिन वक्त के साथ यह हवेली अपनी भव्यता से खोती गई। आज यह एक जीर्ण-शीर्ण अवस्था में है, और इसके कई हिस्से अब स्थानीय निवासियों द्वारा किराए पर लिए गए हैं। वर्तमान में, यह हवेली अपनी ऐतिहासिक स्थिति को खो चुकी है, लेकिन फिर भी यह आज भी दिल्ली के सबसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थलों में से एक मानी जाती है।

पुरानी दिल्ली की गलियों में आज भी यह घर, मिट्टी, चौखट इंतज़ार कर रहा है  अपनी बेटी सायरा बानो का - आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation

समय की कसौटी पर खरा उतरता हुआ। सायरा बानू के घर का प्रवेश द्वार

सायरा बानो, जिन्होंने भारतीय सिनेमा में अपनी अदाकारी और सुंदरता से लाखों दिलों में जगह बनाई, के लिए इस हवेली का महत्व न केवल ऐतिहासिक है, बल्कि यह उनके परिवार के लिए एक बहुत ही निजी भावनात्मक जुड़ाव भी है। यह हवेली उस समय की यादों से भरी हुई है जब वे यहां अपनी मां, नसीम बानो के साथ बचपन बिताती थीं। सायरा बानो का इस हवेली से एक गहरा भावनात्मक रिश्ता है। यह वह घर था, जहां उनकी मां, जो खुद एक प्रसिद्ध अभिनेत्री थीं, अपने परिवार के साथ रहती थीं।

इस हवेली के कक्षों में नसीम बानो की आवाज़, उनका गाना-बजाना, और नृत्य की खनक गूंजती थी। यही वह जगह थी जहां नसीम बानो ने फिल्मी करियर की शुरुआत की और सायरा बानो ने अपनी मां से कई सीखें लीं। सिनेमा की दुनिया में अपनी पहचान बनाने के बाद भी, सायरा बानो इस हवेली को कभी नहीं भूल पाईं। यह उनके जीवन का वह हिस्सा है जो आज भी उनके दिल में जीवित है। हालांकि, आज यह हवेली खराब स्थिति में है, लेकिन सायरा बानो की यादें इस हवेली में समाई हुई हैं। उनका दिल आज भी इसी हवेली के आंगन में बसा हुआ है, जहां उन्होंने अपना बचपन बिताया।

हालांकि सायरा बानो की हवेली का ऐतिहासिक महत्व आज भी कायम है, लेकिन इस पर कानूनी विवाद भी चल रहे हैं। इस हवेली के मालिकाना हक को लेकर कोर्ट में मामले दायर किए गए हैं। स्थानीय लोग और किरायेदार इसके मालिक बनने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि सायरा बानो के परिवार के सदस्य इस प्रॉपर्टी पर अपनी दावेदारी कर रहे हैं। इस हवेली के बारे में एक चेतावनी भी दी गई है, जिसमें कहा गया है कि इसके किसी भी हिस्से को बिना कानूनी अधिकार के न खरीदा जाए, अन्यथा कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस विवाद ने हवेली की स्थिति को और जटिल बना दिया है, और यह देखने वाली बात होगी कि भविष्य में इसका क्या होता है।

पुरानी दिल्ली की गलियों में आज भी यह घर, मिट्टी, चौखट इंतज़ार कर रहा है  अपनी बेटी सायरा बानो का - आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation

इस हवेली की वास्तुकला उस समय के कारीगरी का अद्भुत उदाहरण है। हवेली के अंदर प्रवेश करते ही एक बड़ा आंगन दिखाई देता है, जिसे चारों ओर से संकीर्ण गलियारों से जोड़ा गया है। आंगन के दोनों ओर सीढ़ियां जाती हैं, जो पहली मंजिल तक पहुंचती हैं। हवेली की दीवारों में सुंदर नक्काशी और लोहे के मेहराब हैं, जो उस समय की विशिष्ट वास्तुशिल्प कला को दर्शाते हैं। हालांकि, समय के साथ इन संरचनाओं में भारी टूट-फूट आई है, लेकिन फिर भी यह हवेली अपने आप में एक ऐतिहासिक धरोहर बनी हुई है। यह हवेली एक समय में संगीत और कला का केंद्र रही थी, जहाँ नसीम बानो और उनकी साथी कलाकार नृत्य और गाने की रिहर्सल किया करते थे। हवेली के एक कमरे में नृत्य और संगीत का अभ्यास हुआ करता था, और यह वही स्थान था जहां से कई संगीतज्ञों और कलाकारों ने अपनी कला में निपुणता हासिल की।

आज भी इस हवेली के मूल्य में कोई कमी नहीं आई है। स्थानीय निवासियों और बिल्डरों की नजरें इस पर बनी हुई हैं, और यह पूरी संभावना है कि भविष्य में इस हवेली को नष्ट कर यहां एक विशाल इमारत का निर्माण किया जाएगा। लेकिन, इसका ऐतिहासिक महत्व और सांस्कृतिक धरोहर इसे संरक्षित करने की आवश्यकता को और भी महत्वपूर्ण बना देती है। यह हवेली सायरा बानो और उनके परिवार के लिए सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि एक याद है, एक सपना है, और एक अतीत है, जो कभी भी नष्ट नहीं हो सकता। अगर इस हवेली को बचाया जाता है, तो यह आने वाली पीढ़ियों के लिए एक अमूल्य धरोहर साबित होगी, जो भारतीय सिनेमा और संस्कृति के इतिहास को जीवित रखेगी।'

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दिल्ली के अजमेरी गेट स्थित सायरा बानो की हवेली न केवल उनके परिवार का ऐतिहासिक घर है, बल्कि यह एक भावनात्मक यात्रा है, जो एक महान अभिनेत्री और उनके परिवार की कहानी को बयां करती है। यह हवेली एक ऐसा स्थान है जहां हर दीवार, हर कमरे में यादें समाई हुई हैं।

हालांकि आज यह जीर्ण-शीर्ण अवस्था में है, लेकिन इसके भीतर समाहित इतिहास और संस्कृति इसे कभी भी नष्ट होने नहीं देंगे। यह हवेली सायरा बानो के दिल और आत्मा का हिस्सा है, और हमेशा रहेगी, चाहे परिस्थितियां कैसी भी हों।