काबुल
अफगानिस्तान अब अमेरिका के साथ दो दशक लंबे युद्ध के अतीत को पीछे छोड़कर नए और सहयोगात्मक संबंध स्थापित करना चाहता है। तालिबान सरकार के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्तकी ने कहा है कि अफगानिस्तान अमेरिकी निवेश का स्वागत करेगा और दोनों देशों के रिश्तों को भविष्य के सहयोग के आधार पर आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
मुत्तकी ने सोमवार, 31 अगस्त को ब्रिटिश अखबार फाइनेंशियल टाइम्स को दिए एक साक्षात्कार में यह बात कही। उन्होंने संकेत दिया कि काबुल और वॉशिंगटन के बीच लंबे समय से चले आ रहे सैन्य टकराव को पीछे छोड़कर आर्थिक और कारोबारी सहयोग की नई शुरुआत की जा सकती है।
मुत्तकी ने कहा कि अमेरिका और अफगानिस्तान के संबंधों को केवल पिछले 20 वर्षों के युद्ध के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। उनका आकलन भविष्य में दोनों देशों के बीच संभावित सहयोग और संबंधों के आधार पर किया जाना चाहिए।
अफगान विदेश मंत्री ने कहा कि अगर अमेरिका अफगानिस्तान में निवेश करना चाहता है तो उसके लिए कई क्षेत्रों में अवसर मौजूद हैं। इनमें खनन, बुनियादी ढांचा, कृषि और व्यापार प्रमुख हैं। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि अमेरिकी निवेश का प्रस्ताव सीधे अमेरिकी सरकार के सामने रखा गया है या यह व्यापक रूप से अमेरिकी कंपनियों और निवेशकों के लिए है।
अफगानिस्तान प्राकृतिक संसाधनों के लिहाज से काफी समृद्ध माना जाता है। अमेरिका और अफगानिस्तान की पूर्व सरकार की ओर से किए गए भूवैज्ञानिक सर्वेक्षणों के मुताबिक, देश में लगभग एक ट्रिलियन डॉलर मूल्य के संभावित खनिज संसाधन मौजूद हैं।
इनमें सोना, तांबा, लौह अयस्क, नाइओबियम, कोबाल्ट और लिथियम जैसे महत्वपूर्ण खनिज शामिल हैं। वैश्विक स्तर पर इलेक्ट्रिक वाहनों और बैटरी उद्योग के विस्तार के कारण लिथियम और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों की मांग बढ़ी है। ऐसे में अफगानिस्तान के खनिज संसाधन विदेशी निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकते हैं।
अमेरिका और नाटो सेनाओं की 2021 में अफगानिस्तान से वापसी के बाद तालिबान ने देश पर दोबारा नियंत्रण स्थापित कर लिया था। इसके बाद से तालिबान सरकार ने क्षेत्रीय देशों के साथ आर्थिक संबंध मजबूत करने की कोशिश की है।
रिपोर्ट के मुताबिक, अफगानिस्तान ने चीन और ईरान के साथ खनिज संसाधनों के दोहन से जुड़े करीब 7 अरब डॉलर के समझौते किए हैं। इससे साफ है कि तालिबान सरकार विदेशी निवेश और प्राकृतिक संसाधनों के व्यावसायिक इस्तेमाल के जरिए देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
हालांकि, अमेरिका और तालिबान के बीच कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर मतभेद अभी भी कायम हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अफगानिस्तान से बगराम एयरबेस अमेरिका को सौंपने की मांग की है।
बगराम एयरबेस अफगानिस्तान में अमेरिकी सैन्य अभियान का एक प्रमुख केंद्र रहा है। अमेरिकी सेनाओं की वापसी के बाद इस सैन्य अड्डे पर तालिबान का नियंत्रण हो गया।
मुत्तकी ने बगराम को लेकर अमेरिका की मांग पर स्पष्ट रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान की जमीन और संपत्ति देश की राष्ट्रीय संपत्ति है और इसे किसी दूसरे देश को नहीं सौंपा जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि अफगानिस्तान पर लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंध प्रभावी साबित नहीं हो रहे हैं।
अफगान विदेश मंत्री के बयान को तालिबान सरकार की ओर से अमेरिका के साथ संबंधों को एक नए आधार पर आगे बढ़ाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। तालिबान जहां एक ओर युद्ध के अतीत को पीछे छोड़ने की बात कर रहा है, वहीं दूसरी ओर वह विदेशी निवेश और आर्थिक सहयोग के जरिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी स्थिति मजबूत करना चाहता है।
हालांकि, अमेरिका और तालिबान के बीच संबंध अभी भी कई जटिल मुद्दों से घिरे हुए हैं। अफगानिस्तान में तालिबान की सत्ता को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंताएं बनी हुई हैं। ऐसे में दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग और व्यापक राजनयिक संबंध किस दिशा में आगे बढ़ते हैं, यह आने वाले समय में महत्वपूर्ण होगा।
स्रोत: फाइनेंशियल टाइम्स