ब्रेव सीएफ 107 में कश्मीर के ओवैस याकूब की धमाकेदार जीत

Story by  मलिक असगर हाशमी | Published by  [email protected] | Date 02-08-2026
Kashmir's Owais Yaqoob scores a spectacular first-round victory at Brave CF 107.
Kashmir's Owais Yaqoob scores a spectacular first-round victory at Brave CF 107.

 

आवाज द वाॅयस/ नई दिल्ली

बुल्गारिया के बुर्गास शहर में आयोजित ब्रेव कॉम्बैट फेडरेशन 107 (BRAVE CF 107) टूर्नामेंट में भारत के उभरते हुए मिक्स मार्शल आर्ट्स (MMA) स्टार ओवैस याकूब ने इतिहास रच दिया है। कश्मीर के पुलवामा जिले से ताल्लुक रखने वाले 27 वर्षीय ओवैस याकूब ने शनिवार रात एक बार फिर अपनी ताकत और सटीक रणनीति का लोहा मनवाया। उन्होंने बुल्गारिया के अजेय फाइटर डेलियान जार्जीव को पहले ही राउंड में तकनीकी नॉकआउट (TKO) से हराकर एक और ऐतिहासिक जीत दर्ज की है।

यह मुकाबला बेहद खास माना जा रहा था। ऐसा इसलिए क्योंकि यह मुकाबला दुनिया के दो बेहतरीन ट्रेनिंग कैंप्स के बीच की जंग की तरह देखा जा रहा था। एक तरफ बुल्गारिया के डेलियान जार्जीव थे जो यूएफसी फेदरवेट चैंपियन इलिया टोपूरिया के मुख्य स्पारिंग पार्टनर रहे हैं।

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दूसरी तरफ भारत के ओवैस याकूब थे जो प्रसिद्ध अमेरिकन किकबॉक्सिंग एकेडमी (AKA) में ट्रेनिंग लेते हैं। ओवैस को पूर्व यूएफसी लाइटवेट चैंपियन हबीब नूरमागोमेदोव और प्रसिद्ध कोच जेवियर मेंडेज की देखरेख में अपनी फाइटिंग स्किल्स निखारने का मौका मिला है।

रिंग में फाइट की शुरुआत से ही ओवैस याकूब ने गजब का आत्मविश्वास दिखाया। उन्होंने मैच शुरू होते ही केज के बीच में अपनी पकड़ बनाई। शुरुआत में ओवैस ने एक तेज हेड किक लगाई जिसे जार्जीव ने ब्लॉक किया। इसके बाद ओवैस ने एक जोरदार राइट हैंड पंच जार्जीव के चेहरे पर कनेक्ट किया। साथ ही एक लो किक मारकर जार्जीव को अपना संतुलन खोने पर मजबूर कर दिया। जार्जीव ने भी कुछ लो किक मारने की कोशिश की लेकिन वे ज्यादा असरदार नहीं रहीं।

ओवैस का गेम प्लान शुरुआत से ही किक और पंचेस से भरा हुआ था। उन्होंने एक ओवरहैंड राइट पंच कनेक्ट किया और उसके बाद वन टू पंच कॉम्बिनेशन का बेहतरीन इस्तेमाल किया। जार्जीव ने ओवैस को जमीन पर गिराने के लिए टेकडाउन की कोशिश की। उन्होंने ओवैस की सिंगल लेग पकड़ने का प्रयास किया। ओवैस ने बहुत ही समझदारी से इस टेकडाउन अटेंप्ट को डिफेंड किया। जैसे ही जार्जीव आगे बढ़े ओवैस ने एक करारा लेफ्ट हुक जार्जीव की कनपटी पर जड़ दिया।

इस एक पंच से जार्जीव केज पर गिर पड़े। इसके बाद ओवैस ने बिना कोई मौका गंवाए उन पर मुक्कों की बारिश कर दी। रेफरी ने तुरंत हस्तक्षेप किया और फाइट को वहीं रोक दिया। आधिकारिक फैसले के अनुसार ओवैस याकूब ने इस 68 किलोग्राम कैचवेट फाइट को पहले ही दौर में TKO से अपने नाम कर लिया।

दक्षिण कश्मीर के पुलवामा जिले के मुरान गांव के रहने वाले ओवैस याकूब अब भारतीय एमएमए जगत में एक बड़ा नाम बन चुके हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत कश्मीर की वादियों से की थी। घरेलू स्तर पर कई प्रतियोगिताएं जीतने के बाद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बनाई है। अब तक उनके पेशेवर एमएमए करियर का रिकॉर्ड 5-1 का हो चुका है। खास बात यह है कि वे लगातार पांच मुकाबले जीत चुके हैं।

उनकी आक्रामक फाइटिंग स्टाइल और प्रतिद्वंद्वियों को पहले ही दौर में नॉकआउट करने की कला उन्हें बाकी खिलाड़ियों से अलग बनाती है। ब्रेव कॉम्बैट फेडरेशन में उन्होंने इससे पहले भी पहले राउंड में कई जीत दर्ज की हैं। वर्ष 2025 में उन्हें ब्रेव सीएफ ब्रेकआउट फाइटर ऑफ द ईयर का अवॉर्ड भी मिला था। यह उपलब्धि हासिल करने वाले वे चुनिंदा भारतीय फाइटर्स में से एक हैं।

फाइट से पहले ओवैस याकूब ने अपनी तैयारी को लेकर काफी सकारात्मकता जताई थी। उन्होंने कहा था कि इस फाइट के लिए उन्होंने दिन-रात मेहनत की है। उनका हर एक ट्रेनिंग सेशन इसी दिन के लिए था। वे केज के भीतर अपना शत-प्रतिशत प्रदर्शन देना चाहते थे।

ओवैस का कहना था कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जम्मू कश्मीर और भारत का प्रतिनिधित्व करना उनके लिए बहुत ही गर्व की बात है। उनका सपना देश का नाम पूरी दुनिया में रोशन करना है। जार्जीव के खिलाफ उनकी यह जीत न केवल उनके करियर का सबसे बड़ा मील का पत्थर है बल्कि यह भारतीय एमएमए के लिए भी एक ऐतिहासिक मोड़ है।

डेलियान जार्जीव एक बेहद मजबूत प्रतिद्वंद्वी माने जाते थे। इस फाइट से पहले उनका पेशेवर रिकॉर्ड 3-0 का था। वे दो बार के IMMAF वर्ल्ड चैंपियन भी रह चुके हैं। यूरोपीय एमएमए सर्किट में उन्हें बहुत ही प्रतिभाशाली फाइटर माना जाता था। लेकिन ओवैस की बेहतरीन टाइमिंग और स्ट्राइकिंग के आगे उनकी एक न चली। जार्जीव को अपने करियर की पहली हार का सामना करना पड़ा।

इस धमाकेदार जीत के बाद अब ओवैस याकूब ने ब्रेव सीएफ लाइटवेट टाइटल शॉट की दावेदारी पेश कर दी है। फाइट खत्म होने के बाद उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वे अब बेल्ट के लिए फाइट करने को पूरी तरह तैयार हैं। जिस तरह से उन्होंने लगातार अपने विरोधियों को मात दी है उससे लगता है कि उन्हें जल्द ही खिताबी मुकाबला मिल सकता है।

भारतीय कॉम्बैट स्पोर्ट्स फैंस के लिए यह एक बेहद सुखद पल है। सोशल मीडिया पर लोग ओवैस की जमकर तारीफ कर रहे हैं। कई फैंस का कहना है कि ओवैस याकूब जल्द ही यूएफसी में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए नजर आ सकते हैं। उनकी फाइटिंग स्टाइल में हबीब नूरमागोमेदोव की झलक साफ दिखाई देती है। हबीब के साथ ट्रेनिंग करने से उनके ग्राउंड गेम और स्ट्राइकिंग में काफी सुधार हुआ है।

जम्मू कश्मीर से निकलकर दुनिया के सबसे बड़े एमएमए संगठनों में से एक में अपनी जगह बनाना आसान नहीं था। ओवैस ने अपनी कड़ी मेहनत, अनुशासन और लगन के दम पर यह मुकाम हासिल किया है। पुलवामा के एक छोटे से गांव से शुरू हुआ उनका सफर आज बुल्गारिया के एरिना बुर्गास तक पहुंच चुका है।

इस जीत के साथ ही ओवैस याकूब ने यह साबित कर दिया है कि भारतीय फाइटर्स भी विश्व स्तर के एथलीटों को हराने की क्षमता रखते हैं। ब्रेव सीएफ 107 में मिली इस ऐतिहासिक जीत ने भारतीय कॉम्बैट स्पोर्ट्स के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। अब पूरी दुनिया की नजरें ओवैस के अगले खिताबी मुकाबले पर टिकी होंगी।