फरहान इसराइली/ जयपुर
जयपुर का आमेर किला अब सिर्फ पहाड़ियों, पुरानी सड़कों या प्राचीर के अंदर से देखने तक सीमित नहीं है। ऐतिहासिक मावठा सरोवर में नौकायन की शुरुआत के साथ ही पिंक सिटी के पर्यटन का एक नया अध्याय जुड़ गया है। राजस्थान सरकार की पहल पर यहां बोटिंग सेवा आधिकारिक रूप से शुरू हुई। पर्यटन विभाग के टेंडर के जरिए जसराज इन्फ्रा कंपनी इसका संचालन कर रही है। जोधपुर मूल के कंपनी संचालक कपिल कछवाहा इससे पहले जैसलमेर और जोधपुर की झीलों में भी जल पर्यटन सेवाएं दे चुके हैं।
जयपुर में आमेर की ऐतिहासिक विरासत पहले से ही देश दुनिया के सैलानियों को खींचती है। मावठा में बोटिंग का नया अनुभव जुड़ने से लोग यहां ज्यादा समय बिता रहे हैं। इससे स्थानीय गाइड, कैब ड्राइवर, हस्तशिल्प और खान पान के छोटे कारोबारियों की कमाई बढ़ने की संभावना है।

पानी के बीच से दिखेगा आमेर का अद्भुत नजारा
जैसे-जैसे नाव मावठा झील के शांत पानी में आगे बढ़ती है, आमेर किला पीछे की तरफ भव्य नजर आता है। अरावली की पहाड़ियां चारों तरफ से झील को घेरे हुए दिखती हैं। नाव ऐतिहासिक केसर क्यारी के पास से होकर गुजरती है। पानी के बीच से आमेर का जो दृश्य सामने आता है, वह जमीन से देखे गए नजारों से पूरी तरह अलग है।
मध्य प्रदेश से आए पर्यटक सुजाता मिश्रा के परिवार ने बताया कि उन्हें राजस्थान में बोटिंग की उम्मीद नहीं थी। आमेर में झील की सैर ने उनकी यात्रा को खास बना दिया। इस तरह के अनुभव सैलानियों को काफी पसंद आ रहे हैं।

बोटिंग के साथ राजस्थानी लोक संस्कृति का संगम
मावठा में बोटिंग को सिर्फ सैर सपाटे तक सीमित नहीं रखा गया है। इसे राजस्थान की समृद्ध संस्कृति से जोड़ने का अनूठा प्रयास हो रहा है। इलेक्ट्रिक बोट्स में स्थानीय लोक कलाकार पर्यटकों के साथ सफर करते हैं। वे राजस्थानी पोशाक पहनकर पारंपरिक लोकगीत और नृत्य प्रस्तुत करते हैं।
उदयपुर की झीलों में होने वाले सांस्कृतिक आयोजनों की तर्ज पर यह प्रयोग किया जा रहा है। संचालक के अनुसार दिवाली तक यहां कश्मीर की डल झील जैसे शिकारे लाने की योजना है। कश्मीर के शिकारे और राजस्थानी लोक संगीत का यह संगम मावठा सरोवर को एक नया सांस्कृतिक केंद्र बनाएगा।
किराया, समय और बोट्स की सुविधा
मावठा में पर्यटकों के लिए रोजाना सुबह 7:00 बजे से शाम 7:30 बजे तक बोटिंग उपलब्ध रहती है। झील में फिलहाल लगभग 38 बोट्स का संचालन किया जा रहा है। आने वाले पर्यटन सीजन में इनकी संख्या और बढ़ाई जाएगी।
यहां सैलानियों के लिए कई तरह के विकल्प मौजूद हैं:
सैलानी ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से टिकट बुक कर सकते हैं। इसके अलावा आमेर का किला, अरावली पहाड़ियां और झील का पानी एक साथ होने से यहां प्री-वेडिंग शूट के लिए बुकिंग की योजना भी बनाई जा रही है।

सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के कड़े इंतजाम
जल पर्यटन में सुरक्षा सबसे अहम पहलू है। पर्यटकों की सुरक्षा के लिए सभी बोट्स में लाइफ जैकेट अनिवार्य की गई हैं। तट पर प्रशिक्षित नाविक और गोताखोर हर समय तैनात रहते हैं। खराब मौसम या तेज हवा चलने पर बोटिंग तुरंत रोक दी जाती है।
पर्यावरण और जल प्रदूषण को रोकने के लिए ज्यादा संख्या में इलेक्ट्रिक बोट्स चलाई जा रही हैं। मावठा में मगरमच्छ होने की अफवाहों पर संचालक ने साफ किया कि 2018-19 के दौरान यहां मौजूद एक दो मगरमच्छों को रेस्क्यू कर लिया गया था। अब झील में कोई मगरमच्छ नहीं है।
सफाई और संरक्षण की चुनौतियां
मावठा सिर्फ एक पर्यटन स्थल नहीं है। यह आमेर के ऐतिहासिक ढांचे का अटूट हिस्सा है और इससे स्थानीय लोगों की भावनाएं जुड़ी हैं। बोटिंग शुरू होने के बाद पानी की सफाई और स्वच्छता बनाए रखना एक बड़ी चुनौती है।
संचालकों के मुताबिक झील की सफाई का मुख्य काम नगर निगम का है। हालांकि इस दिशा में अभी और बेहतर सहयोग की दरकार है। मावठा में बोटिंग का प्रयोग राजस्थान के पर्यटन में जल पर्यटन को स्थाई पहचान दिला पाएगा या यह महज एक मौसमी आकर्षण रहेगा, इसका सही अंदाजा अक्टूबर से शुरू होने वाले मुख्य पर्यटन सीजन में लगेगा।