आवाज द वाॅयस/नई दिल्ली
नई दिल्ली में सोमवार को भारत के 10वें और वर्तमान ग्रैंड मुफ्ती शेख अबू बकर अहमद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अहम मुलाकात की। इस मुलाकात में दोनों नेताओं ने देश के सामाजिक, शैक्षणिक और धार्मिक मुद्दों पर विचार-विमर्श किया। प्रधानमंत्री मोदी ने शेख अबू बकर अहमद के साथ हुई बातचीत को “बहुत अच्छी” बताया और कहा कि उनके प्रयास सामाजिक सद्भाव, भाईचारा और शिक्षा में सुधार लाने के लिए सराहनीय हैं।
शेख अबू बकर अहमद फरवरी 2019में भारत के ग्रैंड मुफ्ती नियुक्त किए गए थे। केरल के प्रमुख सुन्नी विद्वान के रूप में वे अखिल भारतीय सुन्नी जमिय्यतुल उलमा का नेतृत्व करते हैं। देश में धार्मिक और सामाजिक मामलों में उनकी सक्रिय भागीदारी और पहल उन्हें विशिष्ट पहचान दिलाती है।
Had a very good interaction with Sheikh Abubakr Ahmad Sahab, Grand Mufti of India. We exchanged views on a wide range of issues. His efforts to further social harmony, brotherhood and improve education are noteworthy.@shkaboobacker pic.twitter.com/HSxmCe2aUG
— Narendra Modi (@narendramodi) February 16, 2026
दुबई रवाना होने से पहले, आवाज़-द वॉइस के प्रधान संपादक अतीर खान ने शेख अबू बकर अहमद से संक्षिप्त बातचीत की। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री के साथ मुलाकात उनके मानवता और समाज सेवा के मिशन का हिस्सा थी। उन्होंने कहा, “यह बैठक मानवता के लिए मेरी यात्रा का हिस्सा थी। जनवरी में केरल मुस्लिम जमात द्वारा आयोजित 16दिवसीय ‘जनता के साथ’ और ‘मानवता के साथ’ थीम पर आधारित ‘केरल यात्रा’ के दौरान मैंने केरल के कई स्थानों का दौरा किया और उनकी स्थिति प्रधानमंत्री के सामने रखी।”
शेख अबू बकर अहमद ने बताया कि प्रधानमंत्री ने उनकी बात को गंभीरता से सुना और आवश्यक कदम उठाने का आश्वासन दिया। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ मुद्दों पर विचार जारी है, और सभी कार्रवाई कानून और नियमों के दायरे में रहकर की जाएगी।
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प्रधानमंत्री के सामने उन्होंने विशेष रूप से वक्फ संपत्ति और हाल ही में संसद द्वारा पारित संशोधन अधिनियम के संबंध में चर्चा की। शेख अबू बकर अहमद के अनुसार, बैठक लगभग आधे घंटे तक चली और इसमें वक्फ की जिम्मेदारियों और वास्तविक स्थिति पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। प्रधानमंत्री ने इस विषय पर कई सवाल किए, जिनके उत्तर उन्होंने विस्तार से दिए।
शेख ने शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों पर भी प्रधानमंत्री को अवगत कराया। उन्होंने कहा, “हमने केरल में एक शाखा से शुरू हुई शिक्षा यात्रा को निरंतर विकसित किया है। इस क्षेत्र में अभी बहुत कुछ करना बाकी है। हमने शिक्षा का प्रसार करने का प्रयास किया है और प्रधानमंत्री से इस मिशन में सहयोग मांगा।” उनकी यह पहल मरकज़ जमीयतुल उलमा के लिए शिक्षा के क्षेत्र में नया मानक स्थापित करने की दिशा में अहम कदम है।
सामाजिक सद्भाव और देश में भाईचारे के महत्व पर भी चर्चा हुई। शेख अबू बकर अहमद ने प्रधानमंत्री से कहा, “आंतरिक कलह से किसी को लाभ नहीं होता। देश में सद्भाव और भाईचारा होने पर ही विकास और प्रगति संभव है।” उन्होंने यह भी बताया कि समाज में प्रेम, सहिष्णुता और एकजुटता बढ़ाने के लिए धार्मिक और सांस्कृतिक संस्थाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है।
रमजान के पवित्र महीने के संदर्भ में उन्होंने संदेश दिया कि यह वह समय है जब अमीर और गरीब के बीच का अंतर कम होता है। शेख ने कहा, “रमजान प्रेम बांटने और ईश्वर की कृपा प्राप्त करने का महीना है। हमें इस पवित्र महीने में प्रेम और सद्भाव फैलाने के लिए निरंतर प्रयास करना चाहिए।” उनका यह संदेश सामूहिक सौहार्द और मानवता के मूल्यों को बढ़ावा देता है।

प्रधानमंत्री मोदी और शेख अबू बकर अहमद के बीच हुई यह मुलाकात केवल औपचारिक या प्रतीकात्मक नहीं थी। यह मुलाकात देश में धार्मिक सहिष्णुता, शिक्षा सुधार और सामाजिक भाईचारे को मजबूत करने की दिशा में एक स्पष्ट कदम के रूप में देखी जा रही है। शेख के अनुसार, प्रधानमंत्री ने उनके सुझावों और अनुभवों को गंभीरता से सुना और आगे की कार्रवाई के लिए सकारात्मक रुख अपनाया।
शेख अबू बकर अहमद ने अपने संदेश में यह भी स्पष्ट किया कि सभी कदम कानून और नियमों के दायरे में रहकर उठाए जाएंगे। उन्होंने इस अवसर पर यह विश्वास भी जताया कि राज्य सरकार और केंद्र सरकार मिलकर देश में शिक्षा, सामाजिक सद्भाव और धार्मिक सहिष्णुता को बढ़ावा देने में सक्षम हैं।
इस मुलाकात से यह स्पष्ट हुआ कि भारत में धार्मिक नेताओं और प्रशासनिक नेतृत्व के बीच संवाद और सहयोग बढ़ रहा है। शेख अबू बकर अहमद की पहल और प्रधानमंत्री मोदी की प्रतिक्रिया इस बात का संकेत हैं कि देश में शिक्षा, भाईचारा और सामाजिक समरसता को प्रोत्साहित करने के लिए संस्थागत सहयोग आवश्यक है।