जम्मू-कश्मीर की दृष्टिबाधित छात्रा ने CBSE 10वीं बोर्ड परीक्षा में 95% अंक हासिल किए

Story by  ओनिका माहेश्वरी | Published by  onikamaheshwari | Date 16-04-2026
Visually impaired JK girl secures 95% in CBSE Class 10 board exam
Visually impaired JK girl secures 95% in CBSE Class 10 board exam

 

श्रीनगर/नई दिल्ली
 
श्रीनगर की रहने वाली पूरी तरह दृष्टिबाधित छात्रा जैनब बिलाल ने अपने अदम्य साहस, मेहनत और आत्मविश्वास से एक ऐसी प्रेरणादायक मिसाल कायम की है, जिसने न सिर्फ कश्मीर बल्कि पूरे देश के छात्रों के लिए एक नई उम्मीद जगाई है। सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) द्वारा आयोजित 10वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा के नतीजे बुधवार को घोषित किए गए, और इस बार जैनब का नाम उन होनहार छात्रों में शामिल रहा जिन्होंने अपनी परिस्थितियों को चुनौती देते हुए असाधारण प्रदर्शन किया। जैनब ने 500 में से 475 अंक हासिल कर 95 प्रतिशत का शानदार स्कोर प्राप्त किया, जबकि कंप्यूटर साइंस विषय में उन्होंने पूरे 100 में से 100 अंक हासिल किए, जो उनकी गहरी रुचि और प्रतिभा को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।

जैनब की इस सफलता को और भी खास बनाता है यह तथ्य कि उन्होंने परीक्षा बिना किसी ‘स्क्राइब’ यानी सहायक लेखक की मदद के दी। उन्होंने लैपटॉप का इस्तेमाल करते हुए खुद ही पूरी परीक्षा लिखी, जो दृष्टिबाधित छात्रों के लिए एक नई दिशा और आत्मनिर्भरता का उदाहरण प्रस्तुत करता है। वह उन पहली दृष्टिबाधित छात्राओं में से एक बन गई हैं जिन्होंने इस तरह से CBSE की परीक्षा दी और उत्कृष्ट परिणाम हासिल किया। 16 वर्षीय जैनब श्रीनगर के बादशाह नगर, नटीपोरा की निवासी हैं और उन्होंने अपनी पढ़ाई दिल्ली पब्लिक स्कूल (DPS) श्रीनगर के लर्निंग रिसोर्स सेंटर में की। इस सेंटर ने उन्हें न केवल शैक्षणिक सहयोग प्रदान किया बल्कि मानसिक और भावनात्मक रूप से भी मजबूत बनाया। जैनब ने अपनी सफलता का श्रेय अपने स्कूल, शिक्षकों और परिवार को देते हुए कहा कि उनकी उपलब्धि में इन सभी का महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने स्कूल के मालिक विजय धर और अपने शिक्षकों का विशेष रूप से धन्यवाद किया, जिन्होंने हर कदम पर उनका मार्गदर्शन किया।

जैनब ने अपने माता-पिता के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि उनके पास धन्यवाद देने के लिए शब्द नहीं हैं, क्योंकि उनके माता-पिता, मां, पिता और यहां तक कि उनके दादाजी भी हर समय उनके साथ खड़े रहे और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते रहे। उन्होंने कहा कि उनके परिवार का सहयोग ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। अपने परिणाम को लेकर जैनब ने कहा कि उन्हें अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद थी, लेकिन इतने अधिक अंक आएंगे, इसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की थी। उन्होंने कहा कि “अल्हम्दुलिल्लाह, मेरे अंक बहुत अच्छे आए हैं। मैं खुश हूं और यह मेरे लिए गर्व का क्षण है।”

जैनब बचपन से ही सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) क्षेत्र में करियर बनाने का सपना देखती रही हैं। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि उनका लक्ष्य कंप्यूटर एप्लीकेशंस में बैचलर डिग्री हासिल करना है और वह भविष्य में कंप्यूटर से जुड़े क्षेत्र में ही कुछ करना चाहती हैं। उनका यह लक्ष्य उनके वर्तमान प्रदर्शन से पूरी तरह मेल खाता है, खासकर कंप्यूटर साइंस में उनके 100 प्रतिशत अंक इस दिशा में उनकी मजबूत नींव को दर्शाते हैं।

पढ़ाई के अलावा जैनब पाठ्येतर गतिविधियों में भी बेहद सक्रिय रही हैं। मात्र 12 वर्ष की आयु में उन्होंने जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और बॉलीवुड सुपरस्टार आमिर खान का इंटरव्यू लिया था। ये इंटरव्यू ‘रेडियो DPS’ पर प्रसारित किए गए थे, जो कि स्कूल द्वारा संचालित एक रेडियो स्टेशन है और छात्रों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच प्रदान करता है। इतनी कम उम्र में इस तरह के बड़े व्यक्तित्वों का इंटरव्यू लेना उनके आत्मविश्वास, संवाद कौशल और व्यक्तित्व की परिपक्वता को दर्शाता है।

दिव्यांग बच्चों के माता-पिता को संदेश देते हुए जैनब ने कहा कि उन्हें कभी भी अपने बच्चों से उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए। उन्होंने कहा कि “अगर मैं यह कर सकती हूं, तो कोई भी कर सकता है। बस बच्चों को आपके भरोसे और सहयोग की जरूरत होती है।” उनका यह संदेश समाज में सकारात्मक सोच और समावेशिता को बढ़ावा देता है। इस बीच, CBSE 10वीं बोर्ड परीक्षा के कुल परिणामों की बात करें तो इस वर्ष 93.70 प्रतिशत से अधिक छात्र सफल रहे। 55,368 से अधिक छात्रों ने 95 प्रतिशत से ज्यादा अंक हासिल किए, जबकि 2,21,574 से अधिक छात्रों ने 90 प्रतिशत से ऊपर अंक प्राप्त किए। लगभग 1.47 लाख छात्रों को ‘कंपार्टमेंट’ श्रेणी में रखा गया है।

लड़कियों ने एक बार फिर शानदार प्रदर्शन करते हुए लड़कों को पीछे छोड़ दिया। लड़कियों का पास प्रतिशत 94.99 रहा, जो लड़कों के 92.69 प्रतिशत से 1.3 प्रतिशत अधिक है। वहीं ट्रांसजेंडर उम्मीदवारों का पास प्रतिशत 87.50 दर्ज किया गया। क्षेत्रवार प्रदर्शन में त्रिवेंद्रम और विजयवाड़ा रीजन ने सबसे अच्छा प्रदर्शन किया, जहां पास प्रतिशत 99.79 दर्ज किया गया, जबकि गुवाहाटी रीजन का पास प्रतिशत सबसे कम 85.32 रहा। दिल्ली का पास प्रतिशत 97.38 रहा, जो राष्ट्रीय औसत से बेहतर है।

संस्थानों के अनुसार, केंद्रीय विद्यालयों का प्रदर्शन सबसे बेहतर रहा, जिनका पास प्रतिशत 99.57 रहा। इसके बाद नवोदय विद्यालयों का स्थान रहा, जिनका पास प्रतिशत 99.42 दर्ज किया गया। निजी स्कूलों का पास प्रतिशत 93.77 रहा, जबकि सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों का परिणाम सबसे कम 91.01 प्रतिशत रहा। विशेष जरूरतों वाले बच्चों (CWSN) का पास प्रतिशत 96.24 रहा, जो समावेशी शिक्षा की दिशा में एक सकारात्मक संकेत है। इनमें से कम से कम 91 छात्रों ने 95 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल किए, जबकि 452 छात्रों ने 90 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किए।

CBSE ने छात्रों के बीच अनावश्यक प्रतिस्पर्धा से बचने के लिए इस बार भी कोई मेरिट लिस्ट जारी नहीं की है और न ही छात्रों को पहली, दूसरी या तीसरी डिवीजन दी गई है। हालांकि, बोर्ड ने यह घोषणा की है कि विषयवार टॉप 0.1 प्रतिशत छात्रों को मेरिट सर्टिफिकेट दिया जाएगा, जो दूसरे बोर्ड परीक्षा के बाद उनके डिजिलॉकर में उपलब्ध कराया जाएगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) की सिफारिशों के अनुसार, इस वर्ष CBSE ने 10वीं कक्षा के छात्रों के लिए दो बोर्ड परीक्षाओं की व्यवस्था शुरू की है। पहला परीक्षा सत्र फरवरी-मार्च में आयोजित किया गया, जिसमें बैठना अनिवार्य था, जबकि दूसरा परीक्षा सत्र मई में आयोजित किया जाएगा। परिणाम घोषित होने के बाद छात्रों को अपने स्कूलों के माध्यम से दूसरे परीक्षा के लिए पंजीकरण कराने का अवसर दिया जाएगा।

CBSE के परीक्षा नियंत्रक संयम भारद्वाज ने बताया कि आमतौर पर 10वीं कक्षा के परिणाम मई के मध्य में घोषित किए जाते हैं, लेकिन इस बार बोर्ड ने लगभग 1.6 करोड़ उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन रिकॉर्ड समय में पूरा कर लिया और परिणाम निर्धारित समय से लगभग एक महीने पहले घोषित कर दिए गए। बोर्ड ने उन छात्रों के परिणाम भी घोषित किए हैं जो मध्य-पूर्व के देशों में परीक्षा दे रहे थे, जहां पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति के कारण परीक्षाएं रद्द कर दी गई थीं। CBSE ने इन छात्रों के लिए वैकल्पिक मूल्यांकन पद्धति अपनाई और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए उनके परिणाम अन्य छात्रों के साथ ही जारी किए। विदेशी स्कूलों का पास प्रतिशत 99.10 दर्ज किया गया।

इस वर्ष कुल 24.71 लाख से अधिक छात्रों ने परीक्षा दी, जो 8,074 परीक्षा केंद्रों पर आयोजित की गई। 21 फरवरी को आयोजित परीक्षा को एक ही दिन में आयोजित अब तक का सबसे बड़ा परीक्षा आयोजन माना गया, जिसमें लगभग 24.95 लाख छात्र शामिल हुए। इस दौरान 10 लाख से अधिक कमरों और 20 लाख से अधिक निरीक्षकों (इनविजिलेटरों) की व्यवस्था की गई थी। जैनब बिलाल की सफलता इस व्यापक परीक्षा परिदृश्य के बीच एक उज्ज्वल प्रेरणा के रूप में सामने आई है। उन्होंने यह साबित कर दिया कि शारीरिक सीमाएं किसी भी व्यक्ति की क्षमताओं को सीमित नहीं कर सकतीं, यदि उसके पास मजबूत इच्छाशक्ति, परिवार का समर्थन और सही मार्गदर्शन हो। उनकी कहानी न केवल दृष्टिबाधित छात्रों बल्कि हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है जो जीवन में किसी भी प्रकार की चुनौती का सामना कर रहा है।

 
इनपुट्स: कश्मीर क्राउन, अमर उजाला