दाऊदी बोहरा समुदाय का डिजिटल कदम, कुरान तिलावत अब ऑनलाइन

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 15-04-2026
The Dawoodi Bohra Community's Digital Initiative: Quran Recitation Now Online, AI photo
The Dawoodi Bohra Community's Digital Initiative: Quran Recitation Now Online, AI photo

 

आवाज द वाॅयस / मुंबई

मुंबई से एक अहम पहल सामने आई है। दाऊदी बोहरा समुदाय ने कुरान की शिक्षा को दुनिया भर में पहुंचाने के लिए एक नया डिजिटल प्लेटफॉर्म शुरू किया है। “सौत अल कुरआन अल करीम” नाम से शुरू हुआ यह यूट्यूब चैनल पूरी तरह कुरान की तिलावत को समर्पित है। इसमें कुरान शरीफ की पूरी तिलावत शहजादा हुसैन बुरहानुद्दीन की आवाज में पेश की गई है। वे हिज होलीनेस सैयदना मुफद्दल सैफुद्दीन के सबसे छोटे बेटे हैं।

यह पहल सिर्फ एक चैनल नहीं है। यह कुरान की पारंपरिक विद्या को डिजिटल युग से जोड़ने की कोशिश है। इस प्रोजेक्ट को महद अल जहरा ने तैयार किया है। यह संस्था कुरान की पढ़ाई, याद करने और सही तरीके से पढ़ने की शिक्षा देने के लिए जानी जाती है।

इस चैनल की खास बात यह है कि इसमें कुरान को खलफ अन हम्जा की रिवायत में पढ़ा गया है। यह कुरान पढ़ने के दस मान्य तरीकों में से एक है। यह रिवायत काफी जटिल मानी जाती है। इसकी उच्चारण शैली अलग होती है। यही वजह है कि यह आम तौर पर कम सुनने को मिलती है। अब इसे पहली बार पूरी तरह डिजिटल रूप में उपलब्ध कराया गया है।

कुरान की तिलावत में लहजा और उच्चारण बहुत अहम होता है। हर रिवायत की अपनी पहचान होती है। खलफ अन हम्जा की रिवायत में सटीकता की बहुत जरूरत होती है। इस चैनल के जरिए अब छात्र और आम लोग इस खास शैली को आसानी से सुन सकते हैं। यह उनके लिए सीखने का बड़ा मौका है।

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महद अल जहरा की स्थापना 1976 में हुई थी। इसे सैयदना मोहम्मद बुरहानुद्दीन ने शुरू किया था। इसका मकसद कुरान की तालीम को मजबूत करना था। यहां छात्रों को हिफ्ज और तिलावत दोनों की ट्रेनिंग दी जाती है। इस संस्था ने पिछले कई दशकों में हजारों हाफिज तैयार किए हैं।

साल 1998 से शहजादा हुसैन बुरहानुद्दीन इस संस्था के विकास की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। उन्होंने यहां पढ़ाई के स्तर को और बेहतर बनाया। उनके मार्गदर्शन में छात्रों को सिर्फ याद करना ही नहीं सिखाया जाता, बल्कि सही उच्चारण और नियमों की भी गहराई से समझ दी जाती है।

वे अलजामेअतुस सैफियाह के प्रोवोस्ट भी हैं। यह समुदाय का प्रमुख शिक्षण संस्थान है। यहां वे खुद हाफिजों की परीक्षा लेते हैं। इससे यह सुनिश्चित होता है कि छात्रों की तिलावत और याददाश्त दोनों मजबूत हों।

शहजादा हुसैन बुरहानुद्दीन खुद एक मशहूर कारी हैं। उन्हें काहिरा की प्रतिष्ठित संस्था नकाबत कुर्रा अल कुरआन अल करीम की मानद सदस्यता भी मिली है। यह संस्था दुनिया भर के नामी कारीयों का समूह मानी जाती है।

उनका अकादमिक योगदान भी काफी अहम है। उन्होंने “किराअत जाहिरा लि किताब अल्लाह” नाम की तीन खंडों वाली किताब लिखी है। इसमें कुरान की विभिन्न किराअत को आसान तरीके से समझाया गया है। इसमें चार्ट और विजुअल गाइड का इस्तेमाल किया गया है ताकि छात्र आसानी से सीख सकें।

इस किताब की एक खास बात यह भी है कि इसमें हर पेज पर क्यूआर कोड दिया गया है। छात्र इन्हें स्कैन कर सीधे उनकी तिलावत सुन सकते हैं। इससे पढ़ाई और प्रैक्टिस दोनों आसान हो जाती है। इस काम को अल अज़हर यूनिवर्सिटी ने भी प्रमाणित किया है। यह इस क्षेत्र की सबसे प्रतिष्ठित संस्थाओं में से एक है।

इस नए चैनल की शुरुआत सैयदना मुफद्दल सैफुद्दीन के विजन का हिस्सा है। वे लगातार समुदाय को कुरान से जुड़ने के लिए प्रेरित करते रहे हैं। उनका मानना है कि हर घर में कुरान की शिक्षा होनी चाहिए। वे चाहते हैं कि हर परिवार में कम से कम एक हाफिज जरूर हो।

उन्होंने यह भी लक्ष्य रखा है कि दुनिया भर में एक लाख हाफिज तैयार किए जाएं। यह लक्ष्य सिर्फ संख्या नहीं है। इसके पीछे कुरान से जुड़ाव को मजबूत करने की सोच है।

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डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए अब यह मिशन और आसान हो गया है। अब कोई भी व्यक्ति, चाहे वह किसी भी देश में हो, इस तिलावत को सुन सकता है। छात्र, शोधकर्ता और आम लोग सभी इससे फायदा उठा सकते हैं।

महद अल जहरा के वरिष्ठ सदस्य मुर्तजा जाफर ने इस पहल को एक बड़ा कदम बताया है। उनका कहना है कि यह प्रोजेक्ट कुरान की विद्या को सुरक्षित रखने और आगे बढ़ाने में मदद करेगा। खास तौर पर खलफ अन हम्जा जैसी जटिल रिवायत को उपलब्ध कराना एक बड़ी उपलब्धि है।

उन्होंने यह भी बताया कि यह प्रोजेक्ट यहीं नहीं रुकेगा। आने वाले समय में और भी रिवायतों की रिकॉर्डिंग जोड़ी जाएगी। इसमें हफ्स अन आसिम, वरश अन नाफी और अल सुसि अन अबी अम्र जैसी मशहूर रिवायतें शामिल होंगी।

इसका मतलब यह है कि भविष्य में यह चैनल कुरान की विभिन्न शैलियों का एक बड़ा डिजिटल संग्रह बन सकता है। इससे छात्रों को अलग अलग तरीकों को समझने में मदद मिलेगी। आज के दौर में डिजिटल माध्यम बहुत प्रभावी हो चुका है। खासकर युवाओं के लिए। ऐसे में इस तरह की पहल उन्हें अपनी धार्मिक जड़ों से जोड़ने का एक नया रास्ता देती है।

यह पहल दिखाती है कि परंपरा और तकनीक साथ चल सकते हैं। कुरान की तिलावत जैसे पारंपरिक ज्ञान को भी आधुनिक तरीके से पेश किया जा सकता है। इससे न सिर्फ सीखना आसान होता है, बल्कि यह ज्यादा लोगों तक पहुंचता भी है।

“सौत अल कुरआन अल करीम” चैनल अब ऑनलाइन उपलब्ध है। यहां पूरी कुरान की तिलावत सुनी जा सकती है। यह उन लोगों के लिए खास है जो कुरान को सही तरीके से पढ़ना और समझना चाहते हैं।इस पहल के जरिए दाऊदी बोहरा समुदाय ने एक बार फिर यह दिखाया है कि ज्ञान को साझा करना ही असली सेवा है। और जब यह सेवा कुरान से जुड़ी हो, तो इसका असर और भी गहरा हो जाता है।