असली केरल स्टोरी : मुस्लिम महावत ने मंदिर के भोजन से खोला रोजा

Story by  मलिक असगर हाशमी | Published by  [email protected] | Date 28-02-2026
Real Kerala Story: Muslim mahout breaks his fast with temple food
Real Kerala Story: Muslim mahout breaks his fast with temple food

 

मलिक असगर हाशमी/ नई दिल्ली

आज के दौर में जब सुर्खियां अक्सर नफरत और बंटवारे के शोर से भरी होती हैं, तब दक्षिण भारत के एक मंदिर से निकली तस्वीर ने पूरे देश को अपनी सादगी और मोहब्बत से खामोश कर दिया है। यह कहानी किसी प्रवचन या उपदेश की नहीं है, बल्कि एक ऐसे 'पल' की है जिसने सोशल मीडिया पर सवा लाख से ज्यादा दिलों को जीत लिया है। यह कहानी केरल के त्रिशूर जिले के पुथुकावु देवी मंदिर की है, जहां एक हाथी के साये में इबादत और इंसानियत का ऐसा मिलन हुआ, जिसे लोग अब 'असली केरल स्टोरी' कह रहे हैं।

केरल के त्योहार अपनी भव्यता और हाथियों के लिए जाने जाते हैं। पुथुकावु देवी मंदिर में भी जश्न का माहौल था। ढोल-नगाड़ों की थाप थी और मंदिर की परंपरा के अनुसार हाथियों का प्रदर्शन हो रहा था। इसी बीच शाम ढली और एक मुस्लिम महावत, पप्पन सैनुद्दीन के लिए अपने ईमान का फर्ज निभाने का वक्त आया। सैनुद्दीन रमजान का रोजा रख रहे थे। ड्यूटी पर तैनात सैनुद्दीन कहीं दूर नहीं जा सकते थे, इसलिए वे अपने विशालकाय साथी (हाथी) के पैरों के पास ही जमीन पर इफ्तार के लिए बैठ गए।

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जब आस्था ने तोड़ी दीवारें

सैनुद्दीन को शायद लगा होगा कि वे मंदिर के एक कोने में चुपचाप अपना रोजा खोल लेंगे। लेकिन पुथुकावु मंदिर कमेटी की नजर जब उन पर पड़ी, तो नजारा ही बदल गया। मंदिर के प्रबंधकों ने न केवल उन्हें वहां इफ्तार की इजाजत दी, बल्कि खुद आगे बढ़कर उनके लिए खाने और फल का इंतजाम किया। एक हिंदू मंदिर के प्रांगण में, उत्सव के शोर के बीच, एक मुस्लिम महावत मंदिर के ही दिए भोजन से अपना रोजा खोल रहा था। यह कोई छोटा वाकया नहीं था। यह उस भारत की झलक थी, जिसे लोग आज भी अपनी आंखों में संजोए बैठे हैं।

इस घटना का वीडियो 'गीव इंडिया' नामक इंस्टाग्राम हैंडल पर जैसे ही आया, वह आग की तरह फैल गया। इसे महज एक दिन में सवा लाख से ज्यादा लोगों ने पसंद किया। प्रतिष्ठित अंग्रेजी अखबार 'मातृभूमि' ने भी इस खबर को चार कॉलम में प्रमुखता से छापा। वीडियो के डिस्क्रिप्शन में लिखा था। "एक ऐसी दुनिया में जो अक्सर इस बात पर ध्यान देती है कि हमें क्या बांटता है, इस पल ने हमें याद दिला दिया कि क्या हमें आज भी एक साथ रखता है।"

सोशल मीडिया पर उमड़ा मोहब्बत का सैलाब

वीडियो वायरल होते ही प्रतिक्रियाओं का तांता लग गया। सोशल मीडिया के 'इनबॉक्स' सकारात्मक संदेशों से लद गए। 'मंजर' नाम के एक यूजर ने एक्स (ट्विटर) पर लिखा। "जब मंदिर के साये में रोजा खुला तो देश ने एकता का असली मतलब देखा। वहां सिर्फ इफ्तार नहीं हो रहा था, वहां इंसानियत अपनी सबसे खूबसूरत शक्ल में नजर आ रही थी।"

प्रशंसकों ने इसे किसी राजनीतिक चश्मे से देखने के बजाय 'इंसानियत' का चश्मा पहना। अनिल कुमार नाम के एक यूजर ने लिखा। "हमारे लिए यह कोई मुस्लिम मैन नहीं है, यह एक मलयाली है।" वहीं, 'इनसेन सोल' नाम के हैंडल से एक बहुत ही भावुक टिप्पणी आई। "मंदिर कमेटी ने एक मुस्लिम महावत के लिए भोजन का प्रबंध किया। कुछ लोगों को यह सुनकर आश्चर्य हो सकता है, लेकिन हमारे लिए इसमें कुछ भी हैरान करने वाला नहीं है। हम इसी माहौल में बड़े हुए हैं, जहां मंदिर के दीये जलाते समय मस्जिद की अजान सुनाई देती है। यही असली केरल स्टोरी है।"

नफरत के दौर में मोहब्बत का जवाब

वीडियो पर कमेंट करने वाले कई लोगों ने इसे उन फिल्मों और विमर्श का जवाब बताया जो केरल की छवि को नकारात्मक रूप में पेश करते हैं। 'टीआरके खामोश' और 'इरशाद' जैसे यूजर्स ने इसे बार-बार 'द रियल केरल स्टोरी' कहा। शिजू ने लिखा। "केरल ने दिखा दिया कि इंसानियत क्या होती है।" वहीं शमशीर ने इसे 'ईश्वर का अपना देश' (गॉड’स ओन कंट्री) होने का प्रमाण बताया।

दिलचस्प बात यह है कि इस वीडियो को पसंद करने वाले सिर्फ केरल के लोग नहीं थे। नेह सक्सेना और सोभा विश्वनाथ जैसी हस्तियों ने भी इस पर अपनी खुशी जाहिर की। लोगों का कहना था कि यह नजारा इसलिए खास है क्योंकि इसमें कोई दिखावा नहीं था। मंदिर कमेटी ने यह सब पब्लिसिटी के लिए नहीं किया था, बल्कि यह उनके स्वभाव का हिस्सा था।

 

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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एकता का अटूट धागा

भारत जैसे देश में जहां धर्म अक्सर चर्चा का केंद्र रहता है, पुथुकावु देवी मंदिर की यह तस्वीर एक बड़े बदलाव की ओर इशारा करती है। यह बताती है कि जमीन पर रहने वाला आम नागरिक आज भी एक-दूसरे के विश्वास का सम्मान करता है। महावत पप्पन सैनुद्दीन के लिए वह पल शायद सामान्य रहा होगा, लेकिन मंदिर कमेटी के उस एक कदम ने करोड़ों लोगों को उम्मीद दी है।

खबर लिखे जाने तक इस वीडियो पर पौने दो लाख के करीब लाइक्स आ चुके थे। हजारों लोग इस पर अपनी राय दे चुके हैं। कोई इसे दक्षिण भारत की संस्कृति बता रहा है, तो कोई इसे बदलते भारत की उम्मीद। लेकिन सच तो यही है कि जब एक मंदिर का पुजारी और एक मस्जिद का नमाजी एक-दूसरे के सम्मान में खड़े होते हैं, तभी तिरंगे की शान बढ़ती है।

यह वीडियो उन सभी लोगों के लिए एक आईना है जो धर्मों के बीच नफरत की खाई खोदने का काम करते हैं। त्रिशूर के इस मंदिर ने बता दिया कि इबादत का तरीका अलग हो सकता है, लेकिन इंसानियत की भाषा एक ही होती है। सैनुद्दीन का रोजा और मंदिर का खाना-यह संगम ही भारत की असल खूबसूरती है। जय हिंद।