ओनिका माहेश्वरी/ नई दिल्ली
दिल्ली को अक्सर दिल वालों की दिल्ली कहा जाता है भीड़ भागदौड़ और रोजमर्रा की चुनौतियां के बीच यहां से कई बार ऐसी खबरें भी सामने आती हैं जो इंसानियत पर भरोसा और मजबूत कर देती हैँ ।
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राजधानी के रोहिणी इलाके से आई एक ऐसी ही सच्ची कहानी इन दिनों लोगों के दिल को छू रही है। यह कहानी है एक साधारण कबाड़ी की असाधारण ईमानदारी की, जिसने कबाड़ में मिली करीब 10 लाख रुपये की सोने-चांदी की ज्वेलरी उसके असली मालिक तक पहुंचाकर यह साबित कर दिया कि सच्चाई और नेकनीयती आज भी जिंदा है।
मामला उत्तर-पश्चिम दिल्ली के रोहिणी सेक्टर-26 का है, जहां रहने वाली चांदनी कुमारी ने घर का पुराना सामान बेचने का फैसला किया। घर की सफाई के दौरान एक पुरानी लोहे की अलमारी भी कबाड़ में दे दी गई। जल्दबाजी में अलमारी के अंदर बने लॉकर की ठीक से जांच नहीं हो सकी। परिवार को इस बात का बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि उसी लॉकर में एक स्टील के डिब्बे के भीतर सोने और चांदी के कीमती गहने रखे रह गए हैं। अलमारी घर से निकल गई, लेकिन इस बड़ी चूक का एहसास किसी को नहीं हुआ। यह एक सामान्य कबाड़ का सौदा था, जो अगले ही दिन इंसानियत की मिसाल बन गया।
रोहिणी सेक्टर-16 में कबाड़ का काम करने वाले अशरफ ने जब खरीदी गई अलमारी को खोलने की कोशिश की, तो उन्हें भीतर बने लॉकर में एक स्टील का डिब्बा नजर आया। जिज्ञासा में जब उन्होंने डिब्बा खोला तो अंदर सोने के झुमके, अंगूठियां, मंगलसूत्र, नथ और चांदी के कई अन्य आभूषण सलीके से रखे हुए मिले। एक पल के लिए उनकी आंखें खुली की खुली रह गईं।
सामने लाखों रुपये के गहने थे, कोई देखने वाला नहीं था और न ही किसी को इस बात का पता था कि अलमारी के भीतर क्या छिपा है। यह वह क्षण था, जब किसी भी इंसान की नीयत की असली परीक्षा होती है। लेकिन अशरफ ने लालच के बजाय ईमानदारी का रास्ता चुना। उन्होंने तय किया कि यह गहने उनकी अमानत नहीं हैं और इन्हें उनके असली मालिक तक पहुंचाना ही उनका फर्ज है।
अशरफ ने तुरंत अपने साथियों नौशाद और सरताज को बुलाया और अलमारी बेचने वाले परिवार का पता लगाने की कोशिश शुरू की। थोड़ी मेहनत और पूछताछ के बाद उन्हें चांदनी कुमारी और उनके पति सुनील का पता मिल गया। जब उन्होंने परिवार से संपर्क कर गहनों के बारे में जानकारी दी, तो पहले तो उन्हें यकीन ही नहीं हुआ। परिवार को तब एहसास हुआ कि अलमारी के लॉकर में रखे गहने कबाड़ के साथ ही चले गए थे।

जब अशरफ खुद परिवार के घर पहुंचे और पूरे गहने सुरक्षित सौंप दिए, तो वहां का माहौल भावुक हो उठा। चांदनी कुमारी और उनके पति की आंखों में खुशी और राहत के आंसू थे। करीब 10 लाख रुपये मूल्य के गहने सुरक्षित वापस मिलना किसी चमत्कार से कम नहीं था। दंपती ने कहा कि आज के दौर में जहां छोटी-छोटी बातों पर भरोसा टूट जाता है, वहां अशरफ जैसे लोग समाज में उम्मीद की किरण हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि अगर अशरफ चाहते तो आसानी से इन गहनों को अपने पास रख सकते थे, लेकिन उन्होंने इंसानियत को प्राथमिकता दी।
परिवार ने खुशी और आभार स्वरूप अशरफ को 3 हजार रुपये का इनाम देने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने विनम्रता से इसे लेने से मना कर दिया। अशरफ का कहना था कि किसी की अमानत लौटाना कोई उपकार नहीं, बल्कि इंसानियत का कर्तव्य है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि मेहनत की कमाई में जो सुकून है, वह किसी और की चीज रखने में कभी नहीं मिल सकता। उनके अनुसार ईमानदारी ही इंसान की सबसे बड़ी पूंजी है और उसी के सहारे जीवन में सम्मान मिलता है।
करीब दस वर्षों से रोहिणी इलाके में कबाड़ का काम कर रहे अशरफ बताते हैं कि उन्होंने हमेशा मेहनत और सच्चाई का रास्ता अपनाया है। उनका कहना है कि हाल ही में उन्होंने सोशल मीडिया पर एक ईमानदार कबाड़ी की कहानी देखी थी, जिसने उन्हें गहराई से प्रेरित किया। शायद वही प्रेरणा इस मौके पर उनके निर्णय में भी झलकी। उनका मानना है कि समाज में सकारात्मक उदाहरणों को आगे आना चाहिए, ताकि लोग समझ सकें कि ईमानदारी का रास्ता भले ही कठिन लगे, लेकिन अंततः वही सुकून देता है।
इस घटना के सामने आने के बाद रोहिणी इलाके में अशरफ की जमकर सराहना हो रही है। स्थानीय लोग उन्हें बधाई दे रहे हैं और उनकी ईमानदारी को मिसाल बता रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी यह खबर तेजी से फैल रही है और लोग कह रहे हैं कि ऐसी घटनाएं समाज में भरोसा और भाईचारे की भावना को मजबूत करती हैं। कई लोगों ने लिखा कि नकारात्मक खबरों के बीच इस तरह की सकारात्मक घटनाएं दिल को सुकून देती हैं और यह विश्वास जगाती हैं कि अच्छे लोग आज भी हमारे आसपास मौजूद हैं।
जहां जीवन में रिश्ते और भरोसा कई बार कमजोर पड़ते दिखाई देते हैं, वहां अशरफ जैसी घटनाएं सामाजिक ताने-बाने को मजबूत करती हैं। यह कहानी सिर्फ 10 लाख रुपये की ज्वेलरी लौटाने की नहीं है, बल्कि यह उस सोच की कहानी है जो कहती है कि ईमानदारी परिस्थितियों पर निर्भर नहीं करती, बल्कि व्यक्ति के चरित्र पर आधारित होती है। अगर नीयत साफ हो तो कोई भी परिस्थिति इंसान को डगमगा नहीं सकती।
रोहिणी की यह घटना एक महत्वपूर्ण संदेश देती है कि हर पेशा सम्मान के योग्य है और ईमानदारी किसी एक वर्ग या समुदाय तक सीमित नहीं होती। एक साधारण कबाड़ी ने अपने व्यवहार से यह साबित कर दिया कि इंसानियत सबसे बड़ी पहचान है। जब समाज में ऐसे उदाहरण सामने आते हैं तो वे न केवल सकारात्मक चर्चा को जन्म देते हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा भी बनते हैं।
दिल्ली जैसे महानगर में, जहां रोज हजारों कहानियां जन्म लेती हैं, अशरफ की ईमानदारी की यह कहानी लंबे समय तक याद रखी जाएगी। यह हमें याद दिलाती है कि भरोसा टूटने की घटनाएं भले ज्यादा चर्चा में रहती हों, लेकिन भरोसा बनाने वाले लोग भी कम नहीं हैं।जरूरत है तो बस ऐसी कहानियों को सामने लाने और सराहने की, ताकि समाज में सच्चाई और इंसानियत का उजाला बना रहे।