इंदौर में अनिका शर्मा के इलाज के लिए मुस्लिम समुदाय ने दिल खोलकर किया दान

Story by  ओनिका माहेश्वरी | Published by  onikamaheshwari | Date 27-02-2026
An example of communal harmony in Indore, the Muslim community donated generously for the treatment of Anika Sharma.
An example of communal harmony in Indore, the Muslim community donated generously for the treatment of Anika Sharma.

 

मंसूरूद्दीन फरीदी /नई दिल्ली

इंदौर की गलियों में एक छोटे से बच्चे के जीवन को बचाने के लिए जो मुहिम चल रही है, वह न केवल इंसानियत की मिसाल बन गई है, बल्कि यह धर्म, जाति और समुदाय से परे एकजुटता का प्रतीक भी बन चुकी है। तीन साल की अनिका शर्मा, जो एक गंभीर बीमारी से जूझ रही है, के इलाज के लिए हर वर्ग और हर धर्म के लोग एक साथ खड़े हो गए हैं। अनिका को ‘स्पाइनल मस्क्यूलर एट्रोफी टाइप 2’ नामक गंभीर बीमारी है, जिसमें शरीर की मांसपेशियाँ धीरे-धीरे कमजोर हो जाती हैं और इसका इलाज अत्यंत महंगा है। इस बीमारी का एकमात्र विश्वसनीय इलाज ज़ोल्जेंस्मा नामक जीनथैरेपी इंजेक्शन है, जिसकी कीमत लगभग नौ करोड़ रुपए है।

यह राशि किसी सामान्य परिवार के लिए जुटाना असंभव सा प्रतीत होता है, लेकिन शहर की विभिन्न एनजीओ ने मिलकर एक क्राउडफंडिंग मुहिम शुरू की है। स्वयंसेवक घर-घर, गली-गली जाकर दान इकट्ठा कर रहे हैं और लोग दिल खोलकर मदद कर रहे हैं। खास बात यह है कि इस अभियान में धर्म या जाति को नहीं देखा गया, केवल एक मासूम की जान बचाने की कोशिश की जा रही है।

The family is busy raising money for innocent Anika.

इंदौर के मुस्लिम बहुल इलाकों में लोग इस मुहिम में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। बंबई बाजार में जब एनजीओ के कार्यकर्ता पहुंचे, तो वहां उन्होंने केवल इंसानियत और दया की मिसाल देखी। रमजान के पाक महीने के दौरान स्थानीय काउंसलर, दुकानदार और वहां मौजूद लोग मिलकर ₹1.20 लाख का दान इकट्ठा कर चुके हैं। यह राशि सिर्फ़ तत्काल सहायता के लिए नहीं दी गई, बल्कि अभियान के आयोजकों से आग्रह किया गया कि वे रमजान के बाद फिर से आएँ, ताकि और अधिक मदद जुटाई जा सके।

अब तक लगभग ₹4.5 करोड़ की राशि जमा हो चुकी है, लेकिन पूरी राशि जुटाना अभी भी बाकी है। अनिका के माता-पिता पिछले तीन-चार महीनों से हर संभव प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने मशहूर हस्तियों, राजनेताओं, उद्योगपतियों और समाजसेवियों से मदद की अपील की है। भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान रोहित शर्मा से भी अनिका की माँ ने अपने बच्चे की जान बचाने के लिए अपील की थी। हालांकि अब तक जितना दान मिला है, वह पूरी राशि का लगभग आधा है।

अनिका के इलाज में एक और बड़ी चुनौती यह है कि उनका वजन उस समय ही ठीक रहेगा जब वह 13.5 किलो तक न पहुँचें। डॉक्टरों के अनुसार, इंजेक्शन तभी दिया जा सकता है जब बच्ची का वजन इस सीमा से अधिक न हो। फिलहाल अनिका का वजन 10.5 किलो है और अगले एक से डेढ़ महीने में उनका वजन 13.5 किलो तक पहुँच सकता है। इस दौरान माता-पिता ने अनिका के आहार का खास ध्यान रखा है और रोटियाँ तथा चावल की जगह केवल दूध, जूस और फल दिए हैं ताकि उनका वजन नियंत्रित रहे और इलाज का समय निकल न जाए।

अब अनिका के माता-पिता ने इंदौर के सभी स्कूलों से अपील की है कि यदि शहर के 4.5 लाख छात्र-छात्राएं केवल ₹100 का दान करें, तो शेष ₹4.5 करोड़ की राशि जुटाई जा सकती है। इस मुहिम ने समाज में एकजुटता और इंसानियत का संदेश फैलाया है। यह दिखा रहा है कि जब बात इंसानियत की होती है, तो नफरत और भेदभाव की कोई जगह नहीं होती। पूरे शहर ने मिलकर यह साबित किया है कि लोगों के दिलों में दया और करुणा अभी भी जीवित है।

यह अभियान केवल धन जुटाने की मुहिम नहीं रह गया है, बल्कि यह एक ऐसा सामाजिक आंदोलन बन गया है जो हर वर्ग, हर समुदाय और हर धर्म के लोगों को जोड़ रहा है। यह मुहिम हमें याद दिलाती है कि असली ताकत इंसानियत में है, और जब लोग मिलकर काम करते हैं, तो कोई लक्ष्य असंभव नहीं होता। अनिका की यह कहानी समाज को यह सिखाती है कि दिलों का दान और एकजुटता किसी भी बड़ी चुनौती को पार कर सकती है। इस मुहिम ने केवल अनिका के लिए उम्मीद जगाई है, बल्कि यह संदेश भी दिया है कि पूरे समाज की संवेदनशीलता और एकजुटता के साथ किसी भी मुश्किल का सामना किया जा सकता है।

हर वर्ग और समुदाय के लोगों ने मिलकर यह साबित किया है कि जब एक मासूम की जान की बात आती है, तो इंसानियत सबसे बड़ा धर्म बन जाती है और सभी खड़ी हो जाते हैं। अनिका को एक नया जीवन देने के लिए इस पूरे शहर ने अपने दिल और हाथ खोल दिए हैं, और यह अभियान आगे भी इसी तरह प्यार, दया और एकजुटता की मिसाल बना रहेगा।