एनएसए अजित डोभाल की अपील: अपनी पहचान को सिर्फ मजहब के दायरे में न सिमटने दें

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 18-04-2026
NSA Ajit Doval's Appeal: Do Not Let Your Identity Be Confined Solely Within the Sphere of Religion.
NSA Ajit Doval's Appeal: Do Not Let Your Identity Be Confined Solely Within the Sphere of Religion.

 

आतिर खान / नई दिल्ली

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजित डोभाल ने मुस्लिम समुदाय के प्रबुद्ध नागरिकों के साथ एक अहम मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने देश के वर्तमान माहौल और समुदाय की भागीदारी पर खुलकर अपनी बात रखी। डोभाल ने बताया कि पिछले 12 सालों में सेना और अर्धसैनिक बलों में रिकॉर्ड संख्या में मुस्लिम युवाओं की भर्ती हुई है। उन्होंने साफ कहा कि फौज में युवाओं का चुना जाना इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि भारत में भर्ती की प्रक्रिया में मजहब के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होता।

डोभाल ने कहा कि लोकतंत्र में हर किसी को सरकार के फैसलों की आलोचना करने का पूरा हक है, लेकिन सरकार की नीयत पर शक नहीं करना चाहिए। उन्होंने सरकारी नौकरियों का जिक्र करते हुए कहा कि अगर कुछ उम्मीदवार सफल नहीं हो पाते, तो इसके पीछे आर्थिक पिछड़ापन जैसे कई कारण हो सकते हैं, इसे केवल संस्थागत भेदभाव मान लेना ठीक नहीं है।

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पहचान का दायरा बढ़ाएं

मुलाकात के दौरान डोभाल ने एक बहुत ही महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने आग्रह किया कि मुस्लिम समुदाय को अपनी विविध पहचान को सिर्फ एक धार्मिक पहचान तक सीमित नहीं करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि हर इंसान की कई परतें होती हैं, वह भारतीय भी है और अपने पेशे या क्षेत्र से भी जुड़ा है। जब कोई व्यक्ति खुद को केवल एक ही पहचान में कैद कर लेता है और उसे ही सर्वोपरि मानने लगता है, तो समाज से कटाव महसूस होने लगता है। उन्होंने कहा कि यह कट्टर सोच अक्सर मन में 'पीड़ित' होने का एक गलत अहसास पैदा कर देती है, जिससे बचना जरूरी है।

डोभाल ने एक खूबसूरत मिसाल देते हुए कहा कि हमारा देश एक बड़े जहाज की तरह है और हम सब इसके मल्लाह हैं। उन्होंने जोर दिया कि हम सब एक ही सफर पर हैं, या तो हम मिलकर इस पार जाएंगे या फिर एक साथ डूबेंगे। उन्होंने आपसी अविश्वास को खत्म करने के लिए संवाद यानी बातचीत जारी रखने पर जोर दिया।

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समुदाय के दिग्गजों ने रखे अपने विचार

इस बैठक का नेतृत्व शिक्षाविद् और कारोबारी जफर सरेशवाला ने किया। इसमें अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) की कुलपति नईमा खातून, दिल्ली हज कमेटी की कौसर जहां, पद्मश्री डॉ. जहीर आई काजी और कई बड़े उद्योगपति शामिल हुए। नईमा खातून ने कहा कि महिला सशक्तिकरण पर सरकार के जोर की वजह से ही वह सौ साल में एएमयू की पहली महिला कुलपति बन पाई हैं।

वहीं, जफर सरेशवाला ने गुजरात के 'डिस्टर्ब एरिया एक्ट' की वजह से मुस्लिम इलाकों में घरों की कमी का मुद्दा उठाया। डॉ. जहीर काजी ने बताया कि उनके संस्थान के छात्र नासा तक पहुंचे हैं, लेकिन एफसीआरए (FCRA) के नियमों की वजह से खाड़ी देशों से मिलने वाले शैक्षिक अनुदान में दिक्कतें आ रही हैं।

गुजरात के उद्योगपति फारुक पटेल ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि उनके पिता बस कंडक्टर थे, लेकिन आज उनकी कंपनी में 1600लोग काम करते हैं, जिनमें से 90प्रतिशत गैर-मुस्लिम हैं। उन्होंने कहा कि व्यापार के मामले में सरकार की तरफ से कोई रुकावट नहीं आई है।

आगे बढ़ने का रास्ता

अजित डोभाल ने अंत में सुझाव दिया कि मुस्लिम समाज के संपन्न और सफल लोग शिक्षा के क्षेत्र में आगे आएं। वे स्कूल खोलें और गरीब बच्चों के लिए स्कॉलरशिप प्रोग्राम शुरू करें। उन्होंने कहा कि समुदाय को केवल शिकायतों तक सीमित रहने के बजाय सरकार के सामने ठोस प्रस्ताव रखने चाहिए। डोभाल ने भरोसा दिलाया कि अवसरों तक सबकी पहुंच आसान बनाने के लिए सरकार सहयोग के लिए तैयार है। कुछ सदस्यों ने 'इस्लामिक बैंकिंग' को एक विकल्प के तौर पर आजमाने का सुझाव भी दिया, जिससे अर्थव्यवस्था को फायदा हो सके।