चेन्नई में मिसाल: मुस्लिम जौहरी ने हिंदू कर्मचारी के लिए निभाई 'भाई' की रस्म

Story by  मलिक असगर हाशमी | Published by  [email protected] | Date 17-04-2026
A Shining Example in Chennai: Muslim Jeweler Performs 'Brother's' Ritual for Hindu Employee
A Shining Example in Chennai: Muslim Jeweler Performs 'Brother's' Ritual for Hindu Employee

 

आवाज द वाॅयस /वेलाचेरी ( चेन्नई )

आज के दौर में जब हम सुबह उठकर सोशल मीडिया खोलते हैं, तो अक्सर नफरत और कड़वाहट भरी खबरें सामने आती हैं। लेकिन इसी शोर के बीच तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई से एक ऐसी कहानी आई है, जो हमारे दिल को सुकून देती है। यह कहानी किसी फिल्म की स्क्रिप्ट नहीं है, बल्कि हमारे अपने देश की उस 'गंगा-जमुनी तहजीब' की जीती-जागती तस्वीर है, जिसे हम अक्सर भूल जाते हैं। चेन्नई के वेलाचेरी में एक मुस्लिम परिवार ने अपनी हिंदू कर्मचारी के लिए जो किया, उसने न सिर्फ इंटरनेट पर लोगों का दिल जीत लिया, बल्कि मानवता की एक नई परिभाषा भी लिख दी।

रिश्तों की गहराई: जब कर्मचारी बनी घर की बेटी

चेन्नई के वेलाचेरी इलाके में 'ए.पी. कादर' (AP Kadar) नाम का एक मशहूर ज्वेलरी स्टोर है। यहाँ काम करने वाली एक हिंदू महिला कर्मचारी अपनी गर्भावस्था के आखिरी महीनों में थी। हम सभी जानते हैं कि आज के प्रोफेशनल और कॉर्पोरेट जगत में रिश्तों की अहमियत अक्सर फाइलों और सैलरी तक सीमित रह जाती है। ज़्यादातर जगहों पर ऐसी स्थिति में बस मैटरनिटी लीव (प्रसूति अवकाश) देकर काम खत्म समझ लिया जाता है। लेकिन इस स्टोर के मालिक और उनके परिवार की सोच कुछ अलग थी।

उन्होंने अपनी इस कर्मचारी को सिर्फ एक कर्मचारी नहीं समझा। उनके लिए वह उनके परिवार की एक छोटी बहन और एक बेटी जैसी थी। जब उन्हें पता चला कि वह माँ बनने वाली है, तो उन्होंने तय किया कि उसकी खुशियों में वे भी वैसे ही शामिल होंगे जैसे उसका अपना मायका होता है।

स्टोर के भीतर गूँजी खुशियाँ: एक अनोखी 'वलईकाप्पु' रस्म

तमिलनाडु में 'वलईकाप्पु' (गोदभराई) की रस्म का बहुत महत्व है। यह सिर्फ एक रस्म नहीं है, बल्कि होने वाली माँ को मानसिक रूप से खुश रखने और आने वाले बच्चे को आशीर्वाद देने का एक तरीका है। आमतौर पर यह सातवें या नौवें महीने में मनाया जाता है।

मुस्लिम व्यवसायी परिवार ने पूरी तैयारी के साथ स्टोर के अंदर ही इस उत्सव का आयोजन किया। उन्होंने हिंदू रीति-रिवाजों का पूरा सम्मान किया। पूरे स्टोर को फूलों और रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया गया। होने वाली माँ को नए पारंपरिक वस्त्र और गहने भेंट किए गए। उसकी आरती उतारी गई और उसे वो हर सम्मान दिया गया जिसकी कोई भी महिला अपने जीवन के इस पड़ाव पर उम्मीद करती है।

जब स्टोर के इंस्टाग्राम हैंडल पर इसका वीडियो साझा किया गया, तो वह जंगल की आग की तरह फैल गया। लाखों लोगों ने इस वीडियो को देखा और उनकी आँखों में खुशी के आँसू आ गए। स्टोर मालिक ने बहुत ही सादगी से संदेश दिया कि उनकी टीम ही उनकी असली ताकत है और उनके सुख-दुख में खड़ा होना उनका फर्ज है।

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नफरत के दौर में मोहब्बत का जवाब

पिछले कुछ समय से समाज में धर्म के नाम पर दूरियाँ पैदा करने की कोशिशें देखी गई हैं। लेकिन चेन्नई की इस घटना ने उन तमाम कोशिशों पर करारा प्रहार किया है। जब एक मुस्लिम परिवार एक हिंदू कर्मचारी की गोदभराई में 'मायके' की भूमिका निभाता है, तो धर्म की दीवारें अपने आप गिर जाती हैं।

दक्षिण भारत और खासकर तमिलनाडु हमेशा से अपनी साझा संस्कृति के लिए जाना जाता रहा है। यह घटना हमें याद दिलाती है कि हमारे संस्कार और हमारी तहजीब हमें जोड़ना सिखाती है, तोड़ना नहीं। यह उन लोगों को एक जवाब है जो मजहब के नाम पर समाज को बाँटना चाहते हैं। यहाँ न तो कोई छोटा था, न बड़ा। यहाँ सिर्फ 'इंसानियत' का रिश्ता सबसे ऊपर था।

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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सोशल मीडिया पर उमड़ा भावनाओं का सैलाब

इस वीडियो के वायरल होने के बाद कमेंट सेक्शन में लोगों का प्यार उमड़ पड़ा। लोग इस बात से बेहद खुश थे कि आज के समय में भी ऐसे इंसान मौजूद हैं।  एक यूजर ने भावुक होकर लिखा, "मैंने इस वीडियो को बार-बार देखा। यह देखकर बहुत अच्छा लगता है कि दुनिया में अभी भी इतनी अच्छाई बची है।" एक महिला यूजर ने कमेंट किया, "यही असली भारत है। भाषा और रस्में अलग हो सकती हैं, लेकिन प्यार की भाषा एक ही होती है।" 

कई लोगों ने इस ज्वेलरी स्टोर के मालिक को 'दुनिया का सबसे अच्छा बॉस' करार दिया।महज़ कुछ ही दिनों में इस पोस्ट को लाखों लाइक्स मिले। यह इस बात का सबूत है कि हम लोग आज भी प्यार और भाईचारे को ही सबसे ज़्यादा पसंद करते हैं।

मानवता ही सबसे बड़ा मजहब है

यह कहानी सिर्फ एक गोदभराई की रस्म तक सीमित नहीं है। यह कहानी है उस भरोसे की, जो एक कर्मचारी और मालिक के बीच होना चाहिए। यह कहानी है उस सम्मान की, जो हर महिला की गरिमा के लिए ज़रूरी है। चेन्नई के इस परिवार ने साबित कर दिया कि त्यौहार और मजहब हमें अलग करने के लिए नहीं, बल्कि खुशियाँ बांटने के लिए होते हैं।

आज जब हम इस खबर को पढ़ते हैं, तो हमें गर्व होता है कि हम ऐसे देश का हिस्सा हैं जहाँ एक माँ की खुशी और एक भाई का फर्ज किसी सरहद या मजहब को नहीं मानता। ए.पी. कादर ज्वेलरी स्टोर के मालिक और उनके परिवार ने न केवल एक महिला के चेहरे पर मुस्कान लाई, बल्कि पूरे देश को एक बहुत बड़ा सबक दिया है।

जब इंसानियत की बात आती है, तो दिल से बड़ी कोई मस्जिद नहीं होती और प्यार से बड़ा कोई मंदिर नहीं होता। चेन्नई की इस तस्वीर ने साबित कर दिया कि जहाँ मोहब्बत होती है, वहाँ खुदा और भगवान खुद-ब-खुद बस जाते हैं। आने वाला बच्चा जब दुनिया में कदम रखेगा, तो उसे विरासत में नफरत नहीं, बल्कि अपने आस-पास मौजूद इस निस्वार्थ प्रेम की कहानी सुनने को मिलेगी। और यही एक स्वस्थ समाज की सबसे बड़ी जीत है।