मेवात का नया चेहरा : 'खेलो मेवात' से उम्मीद की लौ, खेल के जरिए बदलती किस्मत

Story by  मलिक असगर हाशमी | Published by  [email protected] | Date 30-08-2025
New face of Mewat: Flame of hope from 'Khelo Mewat', changing fate through sports
New face of Mewat: Flame of hope from 'Khelo Mewat', changing fate through sports

 

मलिक असगर हाशमी/ गुरुग्राम( हरियाणा)

दिल्ली से लगभग 75 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हरियाणा का नूंह जिला—जिसे आमतौर पर मेवात के नाम से जाना जाता है—अब अपने पुराने पहचान से बाहर निकलने की ओर अग्रसर है.कभी साइबर क्राइम, गोकशी और अन्य आपराधिक गतिविधियों के लिए कुख्यात यह क्षेत्र अब एक नए बदलाव की कहानी लिख रहा है.

नकारात्मकता से बाहर निकलकर यह इलाका अब खेल, शिक्षा और प्रतिभा की ओर बढ़ रहा है.जिस तरह अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में युवाओं को मुख्यधारा में लाने के लिए शिक्षा और खेल का सहारा लिया गया, उसी राह पर मेवात भी आगे बढ़ रहा है.

यहां भी युवाओं को अपराध और नशे की गर्त से बाहर निकालने के लिए खेल को एक सशक्त माध्यम के रूप में अपनाया गया है.इसी दिशा में एक मजबूत कदम के रूप में उभरी है,‘खेलो मेवात’ की पहल.

‘खेलो मेवात’ एक तीन महीने की मेगा खेल प्रतियोगिता है जिसकी शुरुआत 3अप्रैल को नूंह प्रशासन द्वारा की गई.इस प्रतियोगिता का उद्देश्य साफ था—क्षेत्र के युवाओं को नशे और अपराध जैसी विनाशकारी प्रवृत्तियों से दूर करके उन्हें खेलों में व्यस्त करना और उन्हें सकारात्मक दिशा में अग्रसर करना.

सबसे खास बात यह रही कि इसकी शुरुआत उन्हीं इलाकों से की गई जो अब तक साइबर क्राइम के हॉटस्पॉट माने जाते थे, जैसे पुन्हाना और फिरोजपुर झिरका ब्लॉक के 60 गांव.

प्रतियोगिता की सफलता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पहले ही वर्ष में पंचायत से लेकर ब्लॉक स्तर तक करीब 10,000खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया.

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खेलो मेवात की वाॅलीबाॅल प्रतियोगिता में हाथ आजमाते मेवाती युवा

इसमें 264 क्रिकेट टीमें, 150 वॉलीबॉल टीमें, 214 रस्साकशी टीमें, 119 कुश्ती दल और 1000 से अधिक ट्रैक एंड फील्ड एथलीट शामिल थे.इन खिलाड़ियों को न केवल मंच प्रदान किया गया, बल्कि उन्हें नकद इनामों से भी प्रोत्साहित किया गया—जिसमें विजेता टीम को ₹1.5लाख और समग्र चैंपियन को ₹5लाख तक का पुरस्कार मिला.

मेवात लंबे समय से नशे और बेरोजगारी की गंभीर समस्या से जूझता रहा है.एक सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, पिछले वर्ष नूंह के नशामुक्ति केंद्र में 493 युवक इलाज के लिए पहुंचे, जिनमें से 57 को भर्ती करना पड़ा.

ऐसे माहौल में जब युवा खेल की ओर रुख करते हैं, तो यह न केवल उनके शारीरिक और मानसिक विकास का माध्यम बनता है, बल्कि उन्हें समाज की मुख्यधारा से भी जोड़ता है.

गांव के सरपंच इमरान कहते हैं, “जब युवा खेल में व्यस्त रहते हैं, तो उनके पास गलत राह पर चलने का समय ही नहीं बचता.” वहीं अतिरिक्त उपायुक्त प्रदीप मलिक का मानना है कि नकद इनाम और पुरस्कार जैसी योजनाएं युवाओं की सोच बदलती हैं,“जब बच्चों को लगता है कि खेल से पहचान और पुरस्कार मिल सकता है, तो वे जुनून के साथ मैदान में उतरते हैं.हर बच्चा खेलना चाहता है और हर गांव जीतना चाहता है.”

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परवेज खान

इस खेल महोत्सव ने केवल प्रतियोगिता का रूप नहीं लिया, बल्कि यह एक सामाजिक क्रांति की नींव बन गया.नूंह जैसे इलाके से निकले कुछ खिलाड़ियों की सफलता ने इस बदलाव को और भी मजबूती दी है.

परवेज खान और शाहबाज अहमद जैसे नाम आज पूरे मेवात के लिए गर्व का विषय हैं.परवेज खान ने अमेरिका की प्रतिष्ठित NCAA चैंपियनशिप में 1500मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया.

वे NCAA में गोल्ड जीतने वाले पहले भारतीय ट्रैक एथलीट बने.इससे पहले 2022में उन्होंने राष्ट्रीय खेलों में 28साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ते हुए स्वर्ण पदक हासिल किया था.एक किसान परिवार से आने वाले परवेज को अमेरिका के फ्लोरिडा विश्वविद्यालय से छात्रवृत्ति मिली, और वहां से उन्होंने भारतीय एथलेटिक्स को नई दिशा दी.

दूसरी ओर, क्रिकेट में मेवात का नाम रोशन करने वाले शाहबाज अहमद भारतीय क्रिकेट टीम के ऑलराउंडर के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं.उनका सफर यह बताता है कि अगर प्रतिभा को सही मंच और संसाधन मिले तो मेवात जैसे इलाकों से भी अंतरराष्ट्रीय सितारे निकल सकते हैं.

खेलों ने केवल व्यक्तिगत स्तर पर परिवर्तन नहीं लाया, बल्कि सामुदायिक सोच में भी बदलाव आया है.पुन्हाना ब्लॉक की विजेता क्रिकेट टीम के कप्तान रहीम अहमद बताते हैं कि उन्होंने बिना किसी विशेष संसाधन के कठिन मैदानों पर अभ्यास किया, लेकिन जीतने का जुनून कभी कम नहीं हुआ.

उनका कहना है कि “खेलो मेवात” ने उन्हें वह मंच दिया जिसकी उन्हें वर्षों से तलाश थी.वहीं पिनगवां ब्लॉक की विजेता वॉलीबॉल टीम के खिलाड़ी रोहित कहते हैं, “पहले मेरी मां मेरे खेलने को लेकर चिंतित रहती थीं, लेकिन अब वही सबसे जोर से तालियां बजाती हैं.”

मेवात के खिलाड़ी अब शारीरिक खेलों के साथ-साथ बौद्धिक खेलों में भी अपनी उपस्थिति दर्ज करवा रहे हैं.शतरंज जैसी खेल, जिसे अक्सर शहरी बच्चों का खेल माना जाता है, अब मेवात के युवाओं के लिए भी गर्व का विषय बन रहा है.

हरियाणा शतरंज एसोसिएशन द्वारा आयोजित अंतर जिला चैंपियनशिप में मेवात के खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया, जो बताता है कि इस क्षेत्र की प्रतिभा केवल मैदान तक सीमित नहीं, बल्कि दिमाग के खेल में भी मजबूत है.

इस पूरे बदलाव के पीछे सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है समुदाय का जागरण और स्थानीय नेतृत्व का सहयोग.सीरोली गांव के नेता चौधरी शौकत कहते हैं, “हमारे यहां प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, बस उन्हें मौका देने की जरूरत है.

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शाहबाज अहमद

शिक्षा और खेल दो ऐसे क्षेत्र हैं, जिन पर अगर हम फोकस करें तो मेवात की छवि ही बदल सकती है.” उनका कहना है कि "अब समय आ गया है कि हम हरियाणा को दिखाएं कि मेवात क्या कर सकता है."

‘खेलो मेवात’ केवल एक खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि एक आंदोलन है.यह पहल यह दिखाती है कि अगर प्रशासन, समाज और युवा मिलकर काम करें, तो किसी भी क्षेत्र की पहचान बदली जा सकती है.

मेवात अब एक ऐसे बदलाव की मिसाल बन चुका है, जिसे देश के उन सभी इलाकों में लागू किया जाना चाहिए जहां अपराध, बेरोजगारी और नशे जैसी समस्याएं जड़ें जमा चुकी हैं.

जब हर गांव से एक खिलाड़ी निकलेगा, तो वह केवल मेडल ही नहीं लाएगा, बल्कि समाज में बदलाव की रोशनी भी फैलाएगा.'खेलो मेवात' जैसी पहलें यही संदेश देती हैं कि खेल सिर्फ प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि परिवर्तन का माध्यम भी हो सकते हैं—एक ऐसा परिवर्तन जो गांव से शुरू होकर देश तक पहुंच सकता है.