अर्सला खान/नई दिल्ली
उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़ जिले का बासूपार गांव आज पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है. वजह है यहां का प्राथमिक विद्यालय, जो अब किसी साधारण सरकारी स्कूल जैसा नहीं बल्कि आधुनिक सुविधाओं से भरपूर शिक्षा का केंद्र बन चुका है. इस बदलाव के पीछे हैं गांंव के प्रधान प्रतिनिधि अब्दूल वहाब, जिनकी दूरदर्शी सोच और शिक्षा को लेकर प्रतिबद्धता ने इस गाँव की तस्वीर बदल दी है.
शिक्षा और मुस्लिम एकता का संगम
अब्दूल वहाब ने प्रधान प्रतिनिधि की भूमिका निभाते हुए यह दिखा दिया कि अगर नेतृत्व ईमानदार और समाज के प्रति ज़िम्मेदार हो तो बड़ा बदलाव संभव है. उनका मानना है कि शिक्षा ही समाज की तरक्क़ी की असली कुंजी है. उन्होंने गांव के मुस्लिम समुदाय को एकजुट किया और सबको यह यक़ीन दिलाया कि बच्चों की पढ़ाई ही भविष्य को बदल सकती है.
वहाब कहते हैं “अगर हम अपनी आने वाली पीढ़ियों को मजबूत देखना चाहते हैं तो हमें शिक्षा को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाना होगा.” यही सोच उन्हें अलग बनाती है और बासूपार को एक मिसाल में बदल देती है.
बासूपार विद्यालय की बदलती तस्वीर
आज बासूपार के प्राथमिक विद्यालय में वह सब कुछ है जिसकी उम्मीद लोग बड़े शहरों के निजी स्कूलों से करते हैं. विद्यालय में लाइब्रेरी, हाई स्पीड वाई-फाई, आईटी लैब, आरओ पानी, स्वच्छ किचन और सुंदर भोजनालय जैसी सुविधाएं मौजूद हैं. बच्चों के लिए प्ले एरिया बनाया गया है, जहाँ वे खेल-कूद और शारीरिक गतिविधियों से अपना सर्वांगीण विकास कर रहे हैं. विद्यालय की सुरक्षा के लिए पूरे परिसर को सीसीटीवी कैमरों से लैस किया गया है. यह सब अब्दूल वहाब की पहल और उनके विज़न का नतीजा है.
प्रधानाध्यापक धनंजय मिश्र की अहम भूमिका
इस परिवर्तन में विद्यालय के प्रधानाध्यापक धनंजय मिश्र की भूमिका भी बेहद अहम रही. उन्होंने अब्दूल वहाब के विज़न को ज़मीन पर उतारने का जिम्मा संभाला. धनंजय मिश्र का मानना है कि गाँव के बच्चों को वही सुविधाएँ मिलनी चाहिए जो शहरों के बच्चे पाते हैं. उनकी मेहनत और व्यवस्थापन क्षमता के चलते आज यह विद्यालय बच्चों और अभिभावकों की पहली पसंद बन चुका है.
गांव के लिए गर्व का कारण
पहले इस स्कूल की स्थिति साधारण थी, लेकिन अब यह बच्चों के भविष्य की नई रौशनी बन गया है. अभिभावक गर्व से कहते हैं कि उनके बच्चे अब डिजिटल युग के साथ कदम मिलाकर चल रहे हैं. गांव के लोग भी इस बदलाव को मुस्लिम समाज की एकता और शिक्षा के प्रति जागरूकता का नतीजा मानते हैं.
अब्दूल वहाब की सोच ने यह साबित कर दिया कि जब समाज एकजुट होता है और शिक्षा को प्राथमिकता दी जाती है, तो तरक्क़ी अपने आप रास्ता बना लेती है.
मुस्लिम समाज के लिए प्रेरणा
बासूपार का यह मॉडल पूरे प्रदेश के लिए एक सीख है कि नेतृत्व केवल राजनीति तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि समाज की बुनियादी ज़रूरतों शिक्षा, स्वास्थ्य और भविष्य पर केंद्रित होना चाहिए. अब्दूल वहाब ने मुस्लिम एकता को आधार बनाकर यह दिखा दिया कि शिक्षा ही असली इबादत है और बच्चों का भविष्य सबसे बड़ी अमानत.
प्रधानाध्यापक धनंजय मिश्र की सोच
इस परिवर्तन में प्रधान प्रतिनिधि के साथ-साथ विद्यालय के प्रधानाध्यापक धनंजय मिश्र का भी बड़ा योगदान है. उन्होंने विद्यालय की व्यवस्थाओं को आधुनिक स्वरूप देने में अहम भूमिका निभाई. मिश्र का मानना है कि ग्रामीण बच्चों को भी वही माहौल और सुविधाएं मिलनी चाहिए जो किसी बड़े शहर के निजी विद्यालय में मिलती हैं.
उनकी देखरेख में विद्यालय में लाइब्रेरी, आईटी लैब, हाई-स्पीड वाईफाई, आरओ पानी, स्वच्छ किचन और सुंदर भोजनालय जैसी व्यवस्थाएं की गईं. उन्होंने बच्चों की पढ़ाई के साथ-साथ उनकी सेहत और सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया.
अब्दूल वहाब के नेतृत्व और धनंजय मिश्र की मेहनत से बासूपार का प्राथमिक विद्यालय आज़मगढ़ ही नहीं बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश में मिसाल बन गया है. यह सिर्फ़ एक स्कूल की कहानी नहीं बल्कि मुस्लिम एकता, सामाजिक जागरूकता और शिक्षा की ताक़त की कहानी है.
आज बासूपार का नाम जब लिया जाता है तो लोग कहते हैं – “यह गाँव शिक्षा और बदलाव की नयी पहचान है.”